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दूसरी परीक्षा में भी फेल हुए कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप राठौर

Fri, 25 Oct 2019 01:17 PM IST
अरविन्द ठाकुर अनिमेष कौशल, अमर उजाला, शिमला
अनिमेष कौशल, अमर उजाला, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Fri, 25 Oct 2019 01:17 PM IST
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Himachal Congress defeat in By Election in Pachhad and dharamshala
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप राठौर (फाइल फोटो)

हिमाचल में पांच महीनों के भीतर हुई दूसरी परीक्षा में भी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप राठौर फेल हो गए हैं। मई महीने में चारों लोकसभा सीटों पर हार का सामना करने के बाद अब पच्छाद और धर्मशाला में हुए उपचुनाव में भी राठौर कोई करिश्मा दिखाकर पार्टी को जीत नहीं दिला पाए। कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की अंतर्कलह के चलते ही धर्मशाला में पार्टी तीसरे नंबर पर पहुंच गई।

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छह साल तक पार्टी की कमान संभालने वाले सुखविंद्र सिंह सुक्खू को हटाकर जनवरी महीने में कुलदीप राठौर की प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर ताजपोशी की गई थी। सभी धड़ों को एक साथ लेकर चलाने के लिए राठौर को हाईकमान ने प्रदेश कांग्रेस की प्रधानी सौंपी थी। प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद कुलदीप राठौर को लोकसभा चुनावों में मोदी की सुनामी का सामना करना पड़ा।
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इस चुनाव में मिली कांग्रेस की हार को पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने सुक्खू को देरी से हटाने का तर्क देकर कुलदीप राठौर की पैरवी कर दी थी लेकिन अब पांच माह बाद दो उपचुनावों में हुई कांग्रेस की हार के ठीकरे से बचना राठौर के लिए मुश्किल हो गया है। अपने राजनीतिक जीवन में पहली बार पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह चुनावी माहौल बनाने के लिए स्वास्थ्य कारणों के कारण मैदान में नहीं उतर सके।

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Himachal Congress defeat in By Election in Pachhad and dharamshala

नेता विपक्ष मुकेश अग्निहोत्री सहित अन्य कांग्रेस विधायकों ने जरूर मोर्चा संभाला लेकिन परिणाम नहीं बदल सके। पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा और जीएस बाली भी मतदान से एकाएक पहले ही कांगड़ा पहुंचे। सुधीर का समर्थन नहीं मिलने का खुलासा कर धर्मशाला से कांग्रेस प्रत्याशी रहे विजय इंद्र करण ने कुलदीप राठौर की परेशानी को और बढ़ा दिया है।

कांग्रेस प्रत्याशी के आरोपों ने पार्टी नेताओं की दूरियों को सार्वजनिक कर दिया है। अब इस मामले से कुलदीप राठौर कैसे निपटते हैं। यह देखने लायक होगा। उधर, ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी की ओर से प्रदेश में चुनाव प्रचार के लिए कोई स्टार प्रचारक भी नहीं भेजा गया। पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा के आने की उम्मीद थी लेकिन वह भी हरियाणा में प्रचार कर लौट गए। ऐसे में प्रदेश अध्यक्ष को स्वयं ही दोनों विधानसभा क्षेत्रों में जूझना पड़ा।

संगठन में काम करने का लंबा अनुभव भी कुलदीप राठौर के काम नहीं आ सका। उधर, कुलदीप राठौर का कहना है कि पच्छाद में लोकसभा चुनाव के दौरान हार का अंतर करीब 17 हजार वोट थे। अब मजबूती से चुनाव लड़कर अंतर को काफी कम किया गया है। सत्ता का दुरुपयोग होने से भाजपा जीती है। धर्मशाला में प्रत्याशी को लेकर काफी संशय रहा। सुधीर शर्मा के चुनाव नहीं लड़ने से पार्टी को नुकसान हुआ।

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