हिमाचल में राम राज, जयराम को 1990 में कश्मीर मार्च से मिली पहचान
जयराम ठाकुर को राष्ट्रीय स्तर पर 1990 में पहचान मिली। एबीवीपी की जम्मू-कश्मीर इकाई में संगठन सचिव बने। आतंकवाद प्रभावित जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडितों के विस्थापन की मदद के लिए आयोजित कश्मीर मार्च के आयोजनकर्ताओं में से वह एक रहे। 11 सितंबर 1990 को निकाले गए इस मार्च में देश भर से करीब 10 हजार एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया।
विस्थापन के समय कश्मीरी पंडितों के लिए रहने-खाने और दवा आदि की व्यवस्था करते-करते वे खुद बीमार पड़ गए। बावजूद इसके हिम्मत नहीं रही। इस आयोजन का हिस्सा संघ और एबीवीपी की बड़ी बड़ी हस्तियां भी बनीं। ये जयराम की इस कार्यकुशलता का गवाह बने।
विस्थापित कश्मीरी पंडितों की मदद के लिए दिन-रात किया था काम
1990 से 1992 तक उनकी टीम में हर्षित शर्मा भी शामिल रहे। वे आजकल सुंदरनगर में एक सरकारी पद पर तैनात हैं। 1990 में सोलन कॉलेज से एबीवीपी के पूर्णकालिक बनकर निकले शर्मा कहते हैं कि जयराम ठाकुर की सादगी का हर कोई कायल था।
तीन साल तक उन्होंने प्रचारक होने के नाते या तो लोगों के घर खाना खाया या जयराम के हाथों की बनी खिचड़ी। वह भी खिचड़ी बनाने में माहिर थे। तीन साल तक इन्होंने एबीवीपी में कार्य किया। इनका ठिकाना जम्मू का परेड ग्राउंड था।
इस कार्यकाल में उनकी टीम में जम्मू-कश्मीर के डिप्टी सीएम डॉ. निर्मल सिंह, इंद्रेश कुमार पूर्व प्रांत प्रचार आरएसएस और वर्तमान में राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य, एबीवीपी के राष्ट्रीय महामंत्री मुरली धर, संघ प्रांत प्रचारक रमेश पप्पा, उस समय के प्रांत प्रचारक संजय नागपाल आदि भी शामिल रहे।