इस औद्योगिक क्षेत्र के 150 गत्ता उद्योगों पर संकट के बादल
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बड़ी पेपर मिल्स और पेपर डीलरों की सांठगांठ से छोटे गत्ता उद्योगों पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। दो माह में ही क्राफ्ट पेपर के रेट 15 से 20 प्रतिशत बढ़ चुके हैं।
छोटे उद्योगों से कोई बढ़े हुए दामों पर माल खरीदने को तैयार नहीं हो रहा है। बीबीएन के करीब 150 गत्ता उद्योग अपना अस्तित्व बचाने को जद्दोजहद कर रहे हैं। पिछले दस दिन से स्टॉक खत्म होने से उद्योगों में उत्पादन नाममात्र रह गया है।
यह बात प्रदेश गत्ता उद्योग संघ के उपाध्यक्ष सुरेंद्र जैन, बीबीएन गत्ता उद्योग संघ के अध्यक्ष हेमराज चौधरी, उपाध्यक्ष सुशील सिंगला, महासचिव अशोक राणा सहित विशाल सिंगला, नवीन वत्स, पूर्व प्रधान एलएस वर्मा, रमन अग्रवाल, बलराम, डीडी कश्यप, सपन दीप सिंह, मोहित गोयल, गौरव गर्ग ने वीरवार को बद्दी के एक होटल में पत्रकारों से बातचीत में कही।
उन्होंने कहा कि गत्ता उद्योग गंभीर संकट के दौर से गुजर रहा है। दो माह में क्राफ्ट पेपर के दाम 15 से 20 प्रतिशत बढ़ चुके हैं। डीजल के दाम बढ़ने से मालभाड़ा भी 10 प्रतिशत बढ़ा है।
दाम बढ़ाने से गत्ता उद्योग बंद होने की कगार पर
बिजली 25 प्रतिशत महंगी हो गई है। लेबर भी 7 प्रतिशत बढ़ी है, स्टिचिंग वायर और स्टार्च के दामों में भी दस-दस प्रतिशत का उछाल आया है, लेकिन गत्ता उद्योगों के उत्पाद के दामों में वृद्धि नहीं हुई है।
चीन में सैकड़ों पेपर मिल बंद होने से देश की पेपर मिलों ने दाम 20 प्रतिशत तक बढ़ा दिए हैं। यही कारण है कि पेपर मिल्स और बड़े पेपर डीलरों की मिलीभगत और उनके दाम बढ़ाने से गत्ता उद्योग बंद होने की कगार पर पहुंच गया है।
उद्योगपतियों का कहना है कि बीबीएन के लगभग डेढ़ सौ गत्ता उद्योगों में करीब पांच हजार लोगों को प्रत्यक्ष और दो हजार लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल रहा है।
उन्होंने सरकार से मांग की है कि देश की सभी पेपर मिलों को निर्देश दिए जाएं कि अपने कुल उत्पादन का 25 प्रतिशत से अधिक निर्यात न करें। स्थानीय गत्ता उद्योगों में कच्चे माल की भारी कमी हो गई है।