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हिमाचल बजट सत्र: विधायक धवाला ने निगमों-बोर्डों के घाटे पर घेरी अपनी सरकार
Sat, 26 Feb 2022 03:49 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Sat, 26 Feb 2022 03:49 PM IST
सार
मुख्यमंत्री ने कहा कि रमेश धवाला टेक्निकल आदमी हैं। अच्छा होता घाटा दूर करने के सुझाव भी देते। बताया कि हिमाचल में 11 निगम और एक बोर्ड घाटे में है।
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ज्वालामुखी से भाजपा विधायक रमेश धवाला
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
ज्वालामुखी से भाजपा विधायक रमेश धवाला ने शनिवार को सदन में प्रश्नकाल के दौरान निगमों और बोर्डों के घाटे पर अपनी ही सरकार को घेरा। उन्होंने घाटे से जूझ रहे निगमों और बोर्डों के सरप्लस कर्मचारियों को अन्य उपक्रमों में भेजने की मांग उठाई। कहा कि निगमों-बोर्डों में करीब चार हजार करोड़ के घाटे की बात कैग रिपोर्ट में भी सामने आई है। 70 फीसदी निगम-बोर्ड घाटे में हैं। परिवहन निगम में चालकों और परिचालकों से अधिक अफसर हैं।
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बिजली बोर्ड में जरूरत से अधिक चीफ इंजीनियर नियुक्त हैं। इस तरह के सरप्लस स्टाफ को अन्य उपक्रमों में भेजने के लिए नीति बनाई जानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि रमेश धवाला टेक्निकल आदमी हैं। अच्छा होता घाटा दूर करने के सुझाव भी देते। बताया कि हिमाचल में 11 निगम और एक बोर्ड घाटे में है। तीन की आर्थिक स्थिति में कुछ सुधार आया है। दूरदराज क्षेत्रों में लोगों की सुविधा के लिए घाटे वाले उपक्रमों को चलाना भी जरूरी है। इन्हें बंद करने का सुझाव कुछ जगह व्यावहारिक नहीं है।
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जनहित में बिजली बोर्ड और एचआरटीसी को बंद नहीं किया जा सकता। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की सुविधा के लिए कई रूट घाटे में चलाने पड़ते हैं। दुर्गम क्षेत्रों में बिजली की मेंटेनेंस करनी पड़ती है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ओबीसी जैसे वर्गों के लिए भी उपक्रम बनाए गए हैं। इन्हें भी लाभ और नुकसान की दृष्टि से नहीं आंका जा सकता। कोरोना संकट में सरकार ने कई उपक्रमों की वित्तीय सहायता की है।
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बिजली बोर्ड को बीते तीन वर्ष में 1521 करोड़, एचआरटीसी को 1585 करोड़ और पर्यटन विकास निगम को 70 करोड़ की मदद दी गई है। वन निगम, हस्तशिल्प एवं हथकरघा निगम और अल्पसंख्यक विकास निगम में कुछ सुधार आया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरप्लस स्टाफ को लेकर जानकारी जुटाने के बाद आगामी फैसला लिया जाएगा। विपक्ष के विधायक जगत सिंह नेगी भी इसे प्रदेश हित का मामला बताते हुए इस पर अनुपूरक प्रश्न लगाने की मांग करते रहे लेकिन उन्हें अनुमति नहीं मिली।