भाजपा अध्यक्ष सतपाल सत्ती ने पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह के बयान पर किया पलटवार
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भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती ने पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बेरोजगारी भत्ते पर दिए बयान पर पलटवार किया है। सत्ती ने कहा कि वीरभद्र सिंह व कांग्रेस पार्टी अभी तक हार के सदमे से बाहर नहीं निकल पाए हैं, इसलिए वह तथ्यहीन बयानबाजी कर रहे हैं।
अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश में 12 लाख बेरोजगार युवा है, जबकि कंाग्रेस ने 12 हजार युवाओं को भत्ता दिया। पूर्व कांग्रेस सरकार ने बेरोजगारी भत्ता के नाम पर केवल राजनीतिक रोटियां ही सेंकी।
उन्होंने कहा कि जहां तक सरकारी क्षेत्र में रोजगार देने की बात है तो पूर्व कांग्रेस सरकार ने केवल अपने चंद चहेतों को ही नौकरियों की बंदरबांट की है। अध्यक्ष ने कहा कि वीरभद्र सिंह पूरे पांच साल बिना बजट की खोखली घोषणाएं ही करते रहे।
केवल अपनी शिलान्यास पट्टिकाएं लगाने में लगे रहे। उनके कार्यकाल के दौरान प्रदेश के विकास को बट्टा लग गया था। पूरे प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई थी।
सत्ती ने कहा कि पिछली सरकार ने केवल प्रदेश पर कर्ज का बोझ बढ़ाया। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनते ही प्रदेश सरकार ने जनहित के फैसले लेने शुरू कर दिए हैं।
हार का ठीकरा ईवीएम पर फोड़ रही कांग्रेस : मिश्रा
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता हिमांशु मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस अपनी हार का ठीकरा ईवीएम पर फोड़ रही है। यह संकीर्ण मानसिकता का परिचायक है। उन्होंने कहा कि इन विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को केवल 21 सीटें मिली हैं और कांग्रेस अपना विपक्ष का नेता भी नहीं बना पाई है।
आज 7479 बूथों में से कांग्रेस केवल लगभग 2000 बूथों पर ही बढ़त बना पाई है और बाकी बूथों पर भाजपा ने अपना परचम लहराया है। मिश्रा ने कहा कि यदि ईवीएम में गड़बड़ी होती तो कांग्रेस एक भी सीट पर जीत दर्ज नहीं कर पाती।
हर चुनाव के पश्चात उनका एक ही आरोप होता है कि ईवीएम में गड़बड़ी की वजह से उनकी पार्टी की हार हुई है, क्योंकि उनके पास और कोई मुद्दा ही नहीं है। जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकारें हैं वहां पर कांग्रेस पार्टी ईवीएम में गड़बड़ी की कोई भी शिकायत व आपत्ति दर्ज नहीं करती।
पूर्व कांग्रेस सरकार ने हिमाचल को कर्ज में डूबोया : मंत्री
उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह और वन एवं परिवहन मंत्री मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने कहा कि पूर्व कांग्रेस सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन और अनावश्यक खर्च के कारण राज्य कर्ज के बोझ के तले दबा है। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश पर 46 करोड़ रुपये का ऋण है।
कांग्रेस नेता अपनी भूल को स्वीकार करने के बजाए प्रदेश की खराब वित्तीय हालत के लिए पूर्व भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं जो कि पूरी तरह अनुचित व असंगत है।
मंत्रियों ने कहा कि पूर्व कांग्रेस सरकार ने ही प्रदेश को दयनीय वित्तीय स्थिति की ओर धकेला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान 45 से भी ज्यादा लोगों को विभिन्न बोर्डों तथा निगमों के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के तौर पर नियुक्त किया गया।
उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री के सभी करीबी लोगों को अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के पदों से नवाजा गया जिससे सालाना करोड़ों रुपये के अनावश्यक खर्च का बोझ राज्य कोष पर पड़ा। कांग्रेस सरकार ने अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों में बिना किसी वित्तीय प्रावधानों के विभिन्न घोषणाएं की।