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भाजपा में खेमेबाजी पाटने को हाईकमान ने खेला बिंदल पर दांव

Thu, 16 Jan 2020 01:37 PM IST
अरविन्द ठाकुर सुरेश शांडिल्य, अमर उजाला, शिमला
सुरेश शांडिल्य, अमर उजाला, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Thu, 16 Jan 2020 01:37 PM IST
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himachal bjp president election new president will be announced soon
डॉ. राजीव बिंदल - फोटो : फाइल फोटो

हिमाचल भाजपा में खेमेबाजी पाटने के लिए हाईकमान ने डॉ. राजीव बिंदल पर दांव चला है। आगे भाजपा के सामने 2022 का मिशन रिपीट का लक्ष्य होगा तो इस रण में भी नए अध्यक्ष जयराम के नए सारथी बन सकते हैं। अब नड्डा के भरोसेमंद संघ और संगठन में अच्छी पकड़ वाले डॉ. बिंदल पहले धूमल सरकार के कर्मठ स्वास्थ्य मंत्री रह चुके हैं। आयुर्वेद की डाक्टरी कर राजनीति में आए बिंदल भाजपा के हर प्रादेशिक नेता की नब्ज टटोलने और हर सियासी मर्ज के उपचार में सक्षम माने जाते हैं।

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शिमला संसदीय क्षेत्र से उनका नाम तय कर भाजपा ने क्षेत्रीय और जातीय संतुलन भी साधा है। दो साल पहले जयराम सरकार सत्ता में आई तो बिंदल का मंत्री बनना तय माना गया। मगर उन्हें विधानसभा अध्यक्ष बनाकर संतुष्ट किया गया। स्पीकर के तौर पर भी बिंदल का प्रबंधन सत्तारूढ़ दल के खूब काम आया। विपक्ष को भी चेयर ने बोलने का पूरा मौका दिया। हालांकि, यहां वह आसन की बंदिशों में बंधे रहे तो यह चर्चा भी खूब रही कि वह मंत्री बनने में भी रुचि ले रहे हैं।

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मोदी, शाह, नड्डा और जयराम ठाकुर से उनकी बारंबार होती मुलाकातों को इससे जोड़कर देखा गया। मगर पिछले कई दिनों से भाजपा प्रदेशाध्यक्ष पद के लिए तमाम नामों की चर्चा के बीच लोहड़ी-मकर संक्रांति पर डॉ. बिंदल का नाम अचानक सामने आ गया।

लोहड़ी के दिन जयराम-बिंदल की अलाव के ताप में हंसी-ठिठोली इस बात का संकेत देती रही कि दोनों के बीच कुछ पक चुका है। बिंदल के इस मनोनयन के पीछे नड्डा और जयराम की हामी तो है ही। बताया जा रहा है कि धूमल-अनुराग ने भी बिंदल का विरोध नहीं किया है। शांता कुमार तो इस मामले में तटस्थ बताए जाते हैं।  

नए क्षेत्र नाहन में भी दिग्गजों को हराकर चर्चित हुए थे बिंदल 
सवा दशक पहले डॉ. बिंदल का तत्कालीन निर्वाचन क्षेत्र सोलन आरक्षित हो गया था तो उन्होंने नाहन को नया हलका चुना। नई जगह भी उन्होंने एक सिंटिंग एमएलए, एक पूर्व मंत्री और एक पूर्व विधायक को हराकर चुनाव जीता था। इससे चुनावी प्रबंधन के लिए डॉ. बिंदल चर्चा में आए थे। उनका प्रबंधन बाद में भाजपा ने कई मौकों पर आजमाया जो अचूक रहा। अब इसकी आजमाइश मिशन रिपीट में होगी।

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