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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Himachal: Awareness boards to be set up in schools to tell ill effects of drugs

हिमाचल: नशे के दुष्प्रभाव बताने के लिए स्कूलों में लगेंगे जागरूकता बोर्ड

Sat, 26 Aug 2023 05:17 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sat, 26 Aug 2023 05:17 PM IST
सार

शनिवार को राज्य सचिवालय में शिक्षा सचिव डॉ. अभिषेक जैन ने शैक्षणिक संस्थानों में बच्चों में नशे की प्रवृति पर रोक लगाने के लिए आयोजित बैठक में जानकारी दी। शिक्षा विभाग बच्चों में नशे की प्रवृति पर रोक लगाने के लिए कारगर कदम उठा रहा है। 

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Himachal: Awareness boards to be set up in schools to tell ill effects of drugs
स्कूल(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों के परिसर में नशे के दुष्प्रभावों की जानकारी से संबंधित जागरूकता बोर्ड लगाए जाएंगे। शनिवार को राज्य सचिवालय में शिक्षा सचिव डॉ. अभिषेक जैन ने शैक्षणिक संस्थानों में बच्चों में नशे की प्रवृति पर रोक लगाने के लिए आयोजित बैठक में जानकारी दी।

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शिक्षा विभाग बच्चों में नशे की प्रवृति पर रोक लगाने के लिए कारगर कदम उठा रहा है। शिक्षा सचिव ने कहा कि नशे के दुष्प्रभावों संबंधी संदेश को प्रभावशाली तरीके से बच्चों तक पहुंचाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से बनाए ऑडियो-वीडियो संदेश के माध्यम से उन्हें जागरूक किया जाएगा।
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स्कूलों को नशीले पदार्थों के दुष्प्रभाव संबंधी व्याख्यान एवं गतिविधियां हर 15 दिनों में आयोजित करवाने के निर्देश दिए गए हैं। ग्राम पंचायत, स्काउट्स एंड गाइड्स, एनसीसी, एनएसएस और पीटीए को शामिल करके नशीले पदार्थों पर रोक लगाने के लिए सहयोग लिया जा रहा है। विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभाव के बारे में मनोवैज्ञानिक परामर्श दिया जाएगा। प्रधानाचार्य स्कूल में होने वाली नशे संबंधी किसी भी गतिविधि पर रोक लगाना सुनिश्चित करेंगे।
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शैक्षणिक संस्थानों के 100 गज के दायरे में किसी भी तरह के नशीले पदार्थ बेचना गैर कानूनी एवं दंडनीय अपराध है। पुलिस व प्रशासन के अलावा इसकी सूचना अथवा शिकायत टोल फ्री नंबर 112 व 1908 पर की जा सकती है। शैक्षणिक संस्थानों को इस संबंध में रिपोर्ट भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं। बच्चों को नशे की गर्त में जाने से बचाने के लिए अध्यापक स्कूलों में बच्चों को नियमित रूप से खेलकूद एवं सांस्कृतिक गतिविधियाें में भाग लेने के लिए प्रेरित करें।

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