पहले सत्र में अफसरशाही ने कराई जयराम सरकार की किरकिरी
दोनों पक्षों में नई पीढ़ी और नई सियासत के उदय का फार्मूला लेकर चली जयराम सरकार की पहले ही विधानसभा सत्र में अफसरशाही ने किरकिरी करवा दी। शीतकालीन सत्र के पहले दिन जिस तरह कांग्रेस और भाजपा दोनों ओर से नौजवान नेताओं जयराम ठाकुर तथा मुकेश अग्निहोत्री ने सौहार्दपूर्ण माहौल में गले मिलकर रचनात्मक सहयोग से सरकार चलाने की बातें की, उस पर तीसरे दिन ही पानी फिरता नजर आया।
सत्र के तीसरे दिन कांग्रेस ने सत्तापक्ष की कुर्सियां खाली देख वाकआउट कर दिया। सत्र के दूसरे दिन राज्यपाल के अभिभाषण को विपक्ष ने अपना राजनीतिक हथियार बना लिया। विपक्ष ने राज्यपाल के अभिभाषण की ड्राफ्टिंग पर सवाल उठाए। राज्यपाल के अभिभाषण में पहली बार बने युवा मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के वाक्य को त्रुटिपूर्ण करार दिया।
विपक्ष की आशा कुमारी ने अभिभाषण के ड्राफ्ट की अंग्रेजी तक पर सवाल उठा दिए। ड्राफ्ट को बेकार कहा गया। वाक्य में प्रयोग किए गए पहली बार शब्द को विपक्ष ने तथ्यों के साथ गलत बताने का प्रयास किया।
अभिभाषण की चर्चा के बाद सदन में मुख्यमंत्री जयराम ने भी पहली बार शब्द को त्रुटि माना। तीसरे दिन विपक्ष ने सत्तापक्ष को सलाह दी थी कि जयराम ठाकुर अफसरों के चंगुल में न फंसें। यह आपको गलत सलाह दे सकते हैं, इसी बात को विपक्ष ने दूसरे दिन आगे बढ़ाया।
बदलते गए सियासी रंग, गुलदस्ते और चरणवंदना नहीं रुकी
तपोवन में शीतकालीन सत्र के दौरान सियासी रंग भी बदले। पहले दिन जयराम-मुकेश में गलबहियां, नरम तेवर तीसरे दिन वाकआउट के साथ तल्ख हुए। विपक्ष ने सोची-समझी रणनीति के तहत अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए जयराम सरकार को किनारे पर धकेलने की कोशिश की।
हालांकि मुख्यमंत्री जयराम ने सदन में अपने अनुभव को ढाल बनाकर विपक्ष को करारा जवाब भी जरूर दिया। वहीं, सत्र से पहले मुख्यमंत्री की ओर से उनको गुलदस्ते न देने का आग्रह जनता के साथ मंत्रियों ने भी नहीं माना। चरणवंदना भी सत्र में नहीं रुकी।
करोड़ों खर्चे पर जनता को बैठने के लिए एक कुर्सी नहीं
जिस जनता ने सरकार को चुना, उसी जनता को विधानसभा परिसर में बैठने के लिए कोई कुर्सी तक नहीं लगाई गई। जनता अपने चुने गए नुमाइंदों से मिलने के लिए घंटों लाइन में लगी रही।
सत्र में कर्मचारी और अफसर सीएम के स्वागत में ड्यूटी देते देखे। चार दिन में शीतकालीन सत्र पर करीब 4 करोड़ रुपये खर्च हो गए। फिजूलखर्ची कर शहर को रंग-बिरंगी लड़ियों से भी सजाया गया था।