फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   himachal assembly winter session negligence of officers

पहले सत्र में अफसरशाही ने कराई जयराम सरकार की किरकिरी

Sat, 13 Jan 2018 11:41 AM IST
सुनील चड्ढा, अमर उजाला, धर्मशाला
सुनील चड्ढा, अमर उजाला, धर्मशाला Updated Sat, 13 Jan 2018 11:41 AM IST
विज्ञापन
himachal assembly winter session negligence of officers

दोनों पक्षों में नई पीढ़ी और नई सियासत के उदय का फार्मूला लेकर चली जयराम सरकार की पहले ही विधानसभा सत्र में अफसरशाही ने किरकिरी करवा दी। शीतकालीन सत्र के पहले दिन जिस तरह कांग्रेस और भाजपा दोनों ओर से नौजवान नेताओं जयराम ठाकुर तथा मुकेश अग्निहोत्री ने सौहार्दपूर्ण माहौल में गले मिलकर रचनात्मक सहयोग से सरकार चलाने की बातें की, उस पर तीसरे दिन ही पानी फिरता नजर आया।

विज्ञापन


सत्र के तीसरे दिन कांग्रेस ने सत्तापक्ष की कुर्सियां खाली देख वाकआउट कर दिया। सत्र के दूसरे दिन राज्यपाल के अभिभाषण को विपक्ष ने अपना राजनीतिक हथियार बना लिया। विपक्ष ने राज्यपाल के अभिभाषण की ड्राफ्टिंग पर सवाल उठाए। राज्यपाल के अभिभाषण में पहली बार बने युवा मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के वाक्य को त्रुटिपूर्ण करार दिया।
विज्ञापन


विपक्ष की आशा कुमारी ने अभिभाषण के ड्राफ्ट की अंग्रेजी तक पर सवाल उठा दिए। ड्राफ्ट को बेकार कहा गया। वाक्य में प्रयोग किए गए पहली बार शब्द को विपक्ष ने तथ्यों के साथ गलत बताने का प्रयास किया।
विज्ञापन
विज्ञापन


अभिभाषण की चर्चा के बाद सदन में मुख्यमंत्री जयराम ने भी पहली बार शब्द को त्रुटि माना। तीसरे दिन विपक्ष ने सत्तापक्ष को सलाह दी थी कि जयराम ठाकुर अफसरों के चंगुल में न फंसें। यह आपको गलत सलाह दे सकते हैं, इसी बात को विपक्ष ने दूसरे दिन आगे बढ़ाया।

बदलते गए सियासी रंग, गुलदस्ते और चरणवंदना नहीं रुकी

himachal assembly winter session negligence of officers

तपोवन में शीतकालीन सत्र के दौरान सियासी रंग भी बदले। पहले दिन जयराम-मुकेश में गलबहियां, नरम तेवर तीसरे दिन वाकआउट के साथ तल्ख हुए। विपक्ष ने सोची-समझी रणनीति के तहत अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए जयराम सरकार को किनारे पर धकेलने की कोशिश की।

हालांकि मुख्यमंत्री जयराम ने सदन में अपने अनुभव को ढाल बनाकर विपक्ष को करारा जवाब भी जरूर दिया। वहीं, सत्र से पहले मुख्यमंत्री की ओर से उनको गुलदस्ते न देने का आग्रह जनता के साथ मंत्रियों ने भी नहीं माना। चरणवंदना भी सत्र में नहीं रुकी। 

करोड़ों खर्चे पर जनता को बैठने के लिए एक कुर्सी नहीं 
जिस जनता ने सरकार को चुना, उसी जनता को विधानसभा परिसर में बैठने के लिए कोई कुर्सी तक नहीं लगाई गई। जनता अपने चुने गए नुमाइंदों से मिलने के लिए घंटों लाइन में लगी रही।

सत्र में कर्मचारी और अफसर सीएम के स्वागत में ड्यूटी देते देखे। चार दिन में शीतकालीन सत्र पर करीब 4 करोड़ रुपये खर्च हो गए। फिजूलखर्ची कर शहर को रंग-बिरंगी लड़ियों से भी सजाया गया था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed