विधानसभा मानसून सत्र: मुख्यमंत्री शहरी आजीविका योजना को कानून बनाएगी हिमाचल सरकार
भारद्वाज ने यह जानकारी कांग्रेस विधायक आशीष बुटेल की ओर से गैर सरकारी सदस्य दिवस के तहत मनरेगा की तर्ज पर मुख्यमंत्री शहरी आजीविका योजना को कानूनी अधिनियम का रूप देने संबंधित संकल्प पर हुई चर्चा के जवाब में दी।
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हिमाचल सरकार जल्द ही मुख्यमंत्री शहरी आजीविका योजना को कानून बनाएगी। शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने गुरुवार को विधानसभा में कहा कि सरकार इस योजना को कानूनी रूप देने पर विचार कर रही है। जैसे ही औपचारिकताएं पूरी होंगी, इस योजना को विधेयक के रूप में विधानसभा में लाकर विपक्ष की सहमति से ही कानून बनाया जाएगा। गांव में मनरेगा की तर्ज पर शहरी क्षेत्रों में लोगों को रोजगार के अवसर मिलते रहेंगे।
भारद्वाज ने यह जानकारी कांग्रेस विधायक आशीष बुटेल की ओर से गैर सरकारी सदस्य दिवस के तहत मनरेगा की तर्ज पर मुख्यमंत्री शहरी आजीविका योजना को कानूनी अधिनियम का रूप देने संबंधित संकल्प पर हुई चर्चा के जवाब में दी। उन्होंने कहा कि इस योजना के लिए सरकार शीघ्र फंड का सृजन करेगी। उन्होंने कहा कि आरंभ में इस योजना के लिए बजट प्रावधान नहीं किया गया था, वर्ष 2021- 22 के बजट में इसके लिए 4 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने कहा कि इस योजना से शहरी क्षेत्रों में न केवल रोजगार मिला है बल्कि लोगों का पलायन भी रुका। इस योजना के तहत शहरी गरीबों को 120 दिन के रोजगार की गारंटी दी गई है। पिछले साल इस योजना के तहत पांच हजार से अधिक लोगों ने पंजीकरण करवाया और इस साल अप्रैल से अभी तक ही पांच हजार से अधिक लोग पंजीकरण करवा चुके हैं। शहरी विकास मंत्री के जवाब संतुष्ट आशीष बुटेल ने अपना संकल्प वापस ले लिया।
इससे पूर्व कांग्रेस सदस्य आशीष बुटेल ने गैर सरकारी सदस्य दिवस पर सदन में मनरेगा की तर्ज पर मुख्यमंत्री शहरी आजीविका योजना को कानूनी दर्जा देने का संकल्प पेश किया। भाजपा सदस्य डॉ. राजीव बिंदल ने कहा कि मनरेगा योजना अच्छी है और इसका लाभ लोगों को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि हिमाचल सरकार ने मुख्यमंत्री शहरी आजीविका योजना लाकर नवीन प्रयोग किया है। अरुण कुमार ने भी इस चर्चा में हिस्सा लिया।
बागवानों को नहीं हुई 573 लाख रुपये की अदायगी
एचपीएमसी और हिमफेड के माध्यम से प्रदेश के बागवानों से वर्ष 2020-21 के दौरान खरीदे गए सेब की एवज में अभी तक 573 लाख रुपये की अदायगी नहीं की गई है। विधायक राकेश सिंघा के सवाल का लिखित जवाब देते हुए बागवानी मंत्री महेंद्र सिंह ने बताया कि 2019-20 तक की खरीद के लिए एजेंसियों को पूरी राशि जारी कर दी गई है।
शेष राशि को जारी करने की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने बताया कि देरी से हो रही अदायगी पर ब्याज देने की व्यवस्था नहीं है। मंत्री ने बताया कि डीबीटी के माध्यम से पेमेंट देने का अभी किसी भी एजेंसी से आग्रह नहीं आया है।