फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   himachal assembly election 2017 side story

हिमाचल चुनाव में दिख रहा बदले सियासी माहौल का असर

Sat, 14 Oct 2017 03:13 PM IST
अरुणेश पठानिया/अमर उजाला, शिमला
अरुणेश पठानिया/अमर उजाला, शिमला Updated Sat, 14 Oct 2017 03:13 PM IST
विज्ञापन
himachal assembly election 2017 side story

हिमाचल प्रदेश की चुनावी जंग कई मायनों में उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की मोदी लहर से अलग दिख रही है। भाजपा की चुनावी रणनीति पर 6 माह में पैदा हुए नए मुद्दों का असर दिख रहा है। चुनाव से पहले कांग्रेस के मंत्रियों - विधायकों को तोड़कर भाजपा में शामिल करने की रणनीति हिमाचल में सिर्फ दावों तक सीमित रही।

विज्ञापन


जिस नोटबंदी के फैसले को मोदी सरकार की कालेधन पर सर्जिकल स्ट्राइक बताकर भुनाया गया, उसे अब कांग्रेस गिरती अर्थव्यवस्था से जोड़कर पेश कर रही है। महंगाई भी अब चुनावी मुद्दा बनता दिख रहा है, जबकि गुड्स एवं सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) के फैसले की सफलता या विफलता चुनावी नतीजों पर टिकी है।
विज्ञापन


इन चुनावों में पहली बार भाजपा की बेदाग छवि पर हमला हो रहा है। राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय शाह की संपत्ति के नाम पर कांग्रेस हमला कर रही है। पहाड़ चढ़ने के दौरान बदले सियासी मौसम को देखते हुए अब भाजपा के रणनीतिकारों को भी अपनी रणनीति में बदलाव करने की जरूरत महसूस हो रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन

हिमाचल चुनाव में असल परीक्षा

himachal assembly election 2017 side story

फरवरी-मार्च 2017 में पांच राज्यों में हुए चुनावों में भाजपा की कारगर रणनीति की अब हिमाचल चुनाव में असल परीक्षा है। मोदी सरकार का चेहरा आगे रखकर इन राज्यों में भाजपा को कामयाबी मिली। हिमाचल में भी पार्टी का चेहरा मोदी सरकार ही है। यूपी और उत्तराखंड की तरह यहां भी पार्टी ने कोई चेहरा नहीं दिया।

नोटबंदी, सर्जिकल स्ट्राइक, उज्ज्वला, मेक इन इंडिया, जनधन योजना को यहां भी पार्टी भुना रही है। अब तक केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा करने में नाकाम रही कांग्रेस इस बार आक्रामक दिख रही है। इस बार नया यह है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के आंकड़ों से ही कांग्रेस नोटबंदी पर मोदी को घेर रही है।

मेक इन इंडिया को रोजगार के सरकारी आंकड़ों से जोड़कर पेश कर रही है। सबसे नया जीएसटी का मुद्दा कांग्रेस को मिला है। जीएसटी को अर्थव्यवस्था में आई गिरावट के सरकारी आंकड़ों के सहारे महंगाई से जोड़कर पेश किया जा रहा है। ये तमाम मुद्दे 6 माह पहले पांच राज्यों के चुनाव में नहीं थे।

दल-बदल का नहीं पड़ा साया

himachal assembly election 2017 side story

पड़ोसी राज्य उत्तराखंड में भाजपा ने चुनाव से एक वर्ष पहले कांग्रेस के 8 मंत्री और विधायकों को तोड़ लिया था। इसके बाद एक मंत्री और विधायक को चुनाव से ठीक पहले शामिल करवाया। एक दर्जन पूर्व विधायक, प्रदेश संगठन पदाधिकारी भी चुनाव के दौरान भाजपा में शामिल हुए थे।

उत्तर प्रदेश में सपा, बसपा और कांग्रेस के 100 से अधिक मंत्री, विधायक, पूर्व विधायक संगठन पदाधिकारी भाजपा में शामिल हुए थे। हिमाचल में कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान का फायदा मिलता नहीं दिख रहा है। भाजपा में अभी तक कोई बड़ा नेता कांग्रेस से नहीं गया है। हालांकि, कुछ क्षेत्रीय चेहरे जरूर शामिल करवाए गए हैं।

वोट प्रतिशत पर टिका दारोमदार

himachal assembly election 2017 side story

प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती वर्ष 2014 में मिले 54 प्रतिशत वोट बैंक को बनाए रखने की है। पार्टी इस आंकड़े को चुनावी लक्ष्य लेकर चल रही है। 68 विधानसभा सीटों से 57 सीटों पर भाजपा लोकसभा चुनाव में आगे रही थी।

वोट प्रतिशत में गिरावट या बढ़ोतरी वर्ष 2019 लोकसभा चुनाव के लिहाज से बेहद अहम है। यही नहीं, हिमाचल के चुनावी नतीजे भाजपा के लिए वर्ष 2018 में होने वाले दूसरे राज्यों के विधानसभा चुनावों को भी प्रभावित कर सकते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed