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अलविदा 12वीं विधानसभा: कई वजहों से खास रही वीरभद्र सरकार

Fri, 13 Oct 2017 01:15 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Fri, 13 Oct 2017 01:15 PM IST
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himachal assembly election 2017 decisions of virbhadra government in five years

बारहवीं विधानसभाकी विदाई का वक्त आ गया। ये विधानसभा कई वजहों से खास रही है। पूर्व धूमल सरकार ने वीरभद्र सिंह के केंद्रीय मंत्री रहते हुए उनके खिलाफ सीडी मामले में भ्रष्टाचार के आरोपों में मुकदमा चलाया।

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बावजूद इसके वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने वीरभद्र सिंह को ही प्रदेश की कैंपेन कमेटी की कमान दी। बाद में विरोधी धड़ों के भरसक विरोध के बावजूद वीरभद्र ही मुख्यमंत्री बने।
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उन्होंने 25 दिसंबर को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। ठीक एक दिन पहले 24 दिसंबर को वीरभद्र को विशेष न्यायाधीश शिमला की अदालत ने बरी कर दिया। मुख्यमंत्री पद पर शपथ लेने के बाद सीएम ने अपने मंत्रिमंडल में विरोधी खेमे के नेताओं को भी स्थान दिया।

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कई सत्र विपक्ष के शोर-शराबे में गुजरे

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सीडी मामले से बरी होने के बावजूद विपक्ष ने वीरभद्र सिंह को सीबीआई और ईडी में चल रहे मामलों को लेकर भी घेरे रखा। विधानसभा के कई सत्र विपक्ष के शोर-शराबे में ही गुजरे। वीरभद्र को कुर्सी छोड़ने के लिए दबाव बनाया जाता रहा।

भाजपा सरकार के समय से पूर्व ही गिरने की भविष्यवाणी भी करती रही, मगर सरकार ने पूरे पांच साल निर्बाध निकाले।  बारहवीं विधानसभा के इस कार्यकाल में भी पिछली सरकारों की तरह ही तमाम प्रयासों के बावजूद राज्य की अर्थव्यवस्था को कर्ज से नहीं उबारा जा सका।

आज हिमाचल पर करीब 40 हजार करोड़ रुपये का ऋण है। बावजूद इसके वीरभद्र सरकार कर्मचारियों और समाज के अन्य वर्गों को खुश करने को प्रयासरत रही, मगर विपक्ष के लगातार निशाने पर बनी रही।

राजेंद्र राणा हार गए चुनाव

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कांग्रेस सरकार के पांच साल के कार्यकाल में उपचुनाव की नौबत आई। मुख्यमंत्री बनते ही सीएम वीरभद्र सिंह को मंडी लोकसभा सीट से इस्तीफा देना पड़ा। उपचुनाव में वहां से मुख्यमंत्री की पत्नी प्रतिभा सिंह सांसद बनीं। इसके बाद वर्ष 2014 के आम चुनाव में प्रदेश की चारों लोकसभा सीटों पर भाजपा विजयी हुई।

इसी विधानसभा के कार्यकाल में निर्दलीय विधायक राजेंद्र राणा के कांग्रेस का टिकट लेकर लोकसभा चुनाव लड़ने से सुजानपुर विधानसभा सीट खाली हुई। बाद में राजेंद्र राणा ये चुनाव हार गए।

लोकसभा के साथ ही विधानसभा के चुनाव हुए तो भाजपा के नरेंद्र ठाकुर ने राजेंद्र राणा की पत्नी एवं कांग्रेस की प्रत्याशी अनिता राणा को चुनाव में हराया।

अनिल धीमान भाजपा टिकट पर जीते

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इससे पहले तक कांग्रेस की झोली में 36, भाजपा के पास 26 और निर्दलीय विधायक पांच और एक हिलोपा विधायक थे। अब भाजपा की सीटें बढ़कर 27 हो गईं। भोरंज से भाजपा के विधायक आईडी धीमान के देहांत के बाद हाल ही में विधानसभा उपचुनाव हुए तो इस सीट से स्वर्गीय आईडी धीमान के बेटे डॉ. अनिल धीमान भाजपा टिकट पर जीते।

कुछ वक्त बीते ही हिलोपा के एकमात्र विधायक महेश्वर सिंह ने भी अपनी पूरी पार्टी के साथ भाजपा को ज्वाइन किया। इस तरह से भाजपा की सीटें बढ़कर 28 हो गईं। हाल ही में मंत्री कर्ण सिंह के देहांत के बाद से बंजार सीट खाली हो गई है। वर्तमान में कांग्रेस के पास 35 विधायक ही रह गए हैं। इस सीट पर उपचुनाव नहीं हुए।

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