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विक्रमादित्य व चंपा के टिकट पर पेच, स्टोक्स के चुनाव लड़ने पर असमंजस
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Sun, 22 Oct 2017 12:17 PM IST
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मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य सिंह और स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर की बेटी चंपा ठाकुर के टिकट पर पेच फंस गया है। स्टोक्स के चुनाव लड़ने पर असमंजस की स्थिति है। बड़े नेताओं के बेटी-बेटों को टिकट देने और कुछ हलकों में बगावत की आशंका में उलझी कांग्रेस शनिवार को शेष नौ सीटों पर प्रत्याशी घोषित नहीं कर सकी।
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हालांकि, जिनके टिकट लगभग फाइनल हो गए हैं, उन्हें नामांकन भरने के लिए हरी झंडी दे दी है। देर शाम उनके घरों में टिकट मिलने की खुशी में पटाखे फोड़े गए। नामांकन को महज सोमवार का एक दिन शेष रहने के कारण टिकट के दावेदारों की धुकधुकी बढ़ गई है। इसी बीच, शनिवार को विक्रमादित्य दिल्ली पहुंच गए।
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टिकट फाइनल न होने के बावजूद कौल सिंह की बेटी चंपा ने मंडी सदर से पर्चा दाखिल कर दिया। चंपा का दावा है कि उन्हें सीएम और पार्टी हाईकमान की हरी झंडी मिल गई है। शनिवार को भी कांग्रेस शिमला ग्रामीण, ठियोग, मंडी सदर, पालमपुर, शाहपुर, कुल्लू, मनाली, नालागढ़ व कुटलैहड़ सीटों के लिए प्रत्याशियों पर फैसला नहीं कर सकी।
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शनिवार को दो बार केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक हुई, मगर कुछ टिकटों पर फैसला नहीं हो सका। सूत्रों की मानें तो शाहपुर, कुल्लू और मनाली सीटों पर टिकट तय हो चुके हैं। कुटलैहड़ से रामनाथ के बेटे विवेक शर्मा और पालमपुर सीट से बीबीएल बुटेल के पुत्र आशीष बुटेल का नाम लगभग तय हैं।
नालागढ़ से लखविंदर राणा को दोबारा प्रत्याशी बनाए जाने पर सहमति नहीं बन पाई। असल पेच वीरभद्र सिंह के बेटे और कौल सिंह ठाकुर की बेटी पर फंसा हुआ है। कांग्रेस आलाकमान पर विरोधी गुट के नेता दबाव बना रहे हैं कि अगर एक ही परिवार से दो लोगों को टिकट दिया गया तो इसका गलत संदेश जाएगा।
भाजपा को चुनाव में कांग्रेस के खिलाफ वंशवाद का नया मुद्दा मिल जाएगा। जहां तक ठियोग सीट की बात है तो इस पर विद्या स्टोक्स पहले वीरभद्र को चुनाव लड़वाना चाह रही थी। स्टोक्स को वीरभद्र सिंह ने इस सीट से चुनाव लड़ने के लिए मनवा भी लिया था, मगर उनकी सीट पर भी स्थिति साफ नहीं है।
स्टोक्स की तबीयत बिगड़ी, चंडीगढ़ में चेकअप के बाद दिल्ली रवाना
कांग्रेस में नौ सीटों पर फंसे पेच की एक वजह वरिष्ठ मंत्री विद्या स्टोक्स हैं। तबीयत खराब होने पर शनिवार को उन्होंने चंडीगढ़ में चेकअप करवाया। यहां से वे दिल्ली रवाना हो गई हैं। स्टोक्स पर हाईकमान का ठियोग से चुनाव लड़ने का दबाव है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह भी उन्हें मनाने का प्रयास कर रहे हैं।
नब्बे वर्षीय स्टोक्स अगर चुनाव नहीं लड़ती हैं तो कांग्रेस के लिए ठियोग से चेहरा तलाशना बड़ी चुनौती है। स्टोक्स अपनी सीट छोड़ ठियोग से वीरभद्र सिंह को चुनाव लड़ाकर सक्रिय राजनीति से रिटायर होना चाह रही थीं। सीएम पहले तैयार थे, लेकिन दिल्ली में प्रदेश चुनाव समिति की बैठक में सीएम ने एलान कर दिया कि वे अर्की से चुनाव लड़ेंगे।
स्टोक्स ने सोनिया को फैक्स भेजा कि ठियोग से केवल वीरभद्र सिंह से ही चुनाव लड़ाया जाना चाहिए। लेकिन वीरभद्र के अर्की से चुनाव लड़ने पर फैसला हो चुका था। इस सीट से स्टोक्स को लड़ाने की तैयारी थी कि अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। हाईकमान ने अभी ठियोग सीट से किसी का टिकट फाइनल नहीं किया है।
स्टोक्स ने राजेंद्र वर्मा का नाम भेजा
सूत्रों ने बताया कि विद्या स्टोक्स के अलावा अब ठियोग से कांग्रेस के टिकट के लिए राजेंद्र वर्मा के नाम पर भी मंथन हो रहा है। राजेंद्र 2003 और 2007 में कांग्रेस के टिकट पर ठियोग से चुनाव लड़ चुके हैं। वे निर्दलीय चुनाव जीतने वाले राकेश वर्मा और भाजपा प्रत्याशियों को कड़ी टक्कर दे चुके हैं। वर्मा स्टोक्स खेमे के ही नेता हैं। अनदेखी से वे नाराज चल रहे थे।