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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Himachal Assembly byelection: BJP and Congress fear sabotage in Dehra Himachal Assembly byelection

हिमाचल विधानसभा उपचुनाव: देहरा में भाजपा और कांग्रेस को भितरघात का भय, जानें पूरा मामला

Thu, 20 Jun 2024 10:39 AM IST
Krishan Singh मदन मोहन लखेड़ा, धर्मशाला
मदन मोहन लखेड़ा, धर्मशाला Published by: Krishan Singh Updated Thu, 20 Jun 2024 10:39 AM IST
सार

उपचुनाव में सुर्खियां बनी देहरा की जंग में भाजपा के बाद अब कांग्रेस भी सकते में आ गई है। बगावती तेवरों और भितरघात के खतरे से दोनों दलों को भय सताने लगा है। 

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Himachal Assembly byelection: BJP and Congress fear sabotage in Dehra Himachal Assembly byelection
नरदेव कंवर, संजीव शर्मा - फोटो : संवाद

विस्तार

हिमाचल विधानसभा उपचुनाव में सुर्खियां बनी देहरा की जंग में भाजपा के बाद अब कांग्रेस भी सकते में आ गई है। बगावती तेवरों और भितरघात के खतरे से दोनों दलों को भय सताने लगा है।   एक-दूसरे के खिलाफ सियासी तलवारें भांजने के बजाय दोनों ओर फिलहाल घरेलू क्लेश की उलझन जोर मार रही है। नामांकन से पहले ही बने इन हालातों में भाजपा और कांग्रेस दोनों के सामने डैमेज कंट्रोल की चुनौती साफ खड़ी दिख रही है। देहरा का समर नए-नए रंगों के साथ बेहद रोचक मोड़ पर आ गया है। भाजपा शुरुआती दौर से ही इसके झटके झेलते हुए ऑल इज वेल की कोशिश के साथ आगे बढ़ रही थी। कांग्रेस को बुधवार को इस झटके का अहसास हुआ।

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दरअसल, भाजपा में पूर्व मंत्री रमेश धवाला उपचुनाव में होशियार सिंह को चुनावी चेहरा बनाने से पार्टी को लगातार बगावती तेवर दिखा रहे हैं। 2022 में वह देहरा से पार्टी टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। भाजपा हाईकमान के फैसले पर विरोध जता रहे धवाला ने पार्टी सिपहसालारों के माथे पर भी बल डाल रखे हैं। देहरा से विधायक रह चुके पूर्व मंत्री रविंद्र रवि की चुप्पी भी रहस्यमय बनी है। यही नहीं, कांगड़ा से राज्यसभा सांसद रह चुके कृपाल परमार और कुछ अन्य नेता पार्टी में उठ रहे बगावती सुरों को खूब हवा देने का काम अलग से कर रहे हैं। भाजपा की परेशानी का एक और कारण यह भी है कि दो बार निर्दलीय चुनाव जीत चुके होशियार सिंह और देहरा के भाजपा नेताओं के बीच रिश्ते कड़वाहट भरे ही रहे हैं। 

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गाहे-बगाहे होशियार और देहरा भाजपा में तनातनी साफ नजर आती रही है। इस कड़वे सच को स्वीकार कर होशियार मंगलवार को पहली बार देहरा भाजपा की बैठक में न सिर्फ शामिल हुए बल्कि उन्होंने कार्यकर्ताओं से माफी मांगकर रिश्तों में मिठास घोलने की कोशिश भी की। इस स्थिति में भाजपा के लिए बगावत और भितरघात के खतरों से इनकार नहीं किया जा सकता। उधर, मंगलवार को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की धर्मपत्नी कमलेश ठाकुर को चुनावी दंगल में उतारने का दांव खेलकर कांग्रेस देहरा के रण में पकड़ मजबूत होने की आस जगा बैठी थी। लेकिन, उनके लिए भी परेशानी पैदा हो सकती है। 

प्रदेश कांग्रेस के कोषाध्यक्ष एवं 2022 में पार्टी प्रत्याशी रहे डॉ. राजेश ने बगावती तेवर दिखाए हैं। डॉ. राजेश ने सीएम की पत्नी को टिकट देने का सार्वजनिक मंच पर विरोध कर फिलहाल हर हाल में चुनाव लड़ने का एलान कर दिया है। उन्होंने सीधे मुख्यमंत्री सुक्खू को निशाने पर लेकर उन पर गंभीर आरोपों की बौछार कर देहरा की प्रतिष्ठित जंग में और रोचकता लाने का काम भी कर दिया है। अब कांग्रेस ही नहीं, स्वयं मुख्यमंत्री सुक्खू के लिए भी डॉ. राजेश के बागवती तेवरों से पार पाने की चुनौती खड़ी हो गई है।

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पार्टी ने सोच-विचार कर ही कमलेश ठाकुर को टिकट दिया है। देहरा में बगावत जैसी कोई बात नहीं। जल्द सब ठीक हो जाएगा। उपचुनाव के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मनोबल काफी ऊंचा है। -नरदेव कंवर, चेयरमैन, कामगार कल्याण बोर्ड

पूर्व मंत्री रमेश धवाला पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। उन्हें लेकर बगावत जैसी कोई बात नहीं है। पार्टी का शीर्ष नेतृत्व उनके संपर्क में है। जल्द ही गिले-शिकवे दूर हो जाने पर वह उपचुनाव में पार्टी के लिए काम करते दिखेंगे।- संजीव शर्मा, अध्यक्ष, भाजपा संगठनात्मक जिला, देहरा

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