हिमाचल विधानसभा बजट सत्र: सदन में हंगामा, सत्ता पक्ष से तीखी नोकझोंक के बाद विपक्ष का वाकआउट
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हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन मंगलवार को सदन में सुबह फिर हंगामा हुआ। प्रश्नकाल निर्धारित समय 11 बजे शुरू नहीं हो पाया। करीब 55 मिनट तक सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष में नोकझोंक होती रही। फिर प्रश्नकाल की घोषणा हुई तो विपक्ष इसका विरोध करता रहा और नेता प्रतिपक्ष समेत पांच विधायकों के निलंबन को रद्द करने का मामला उठाता रहा। शोर-शराबे में प्रश्नकाल पांच मिनट के लिए शुरू तो हो गया, पर विपक्ष के सदस्य नारेबाजी करते हुए सदन से वाकआउट कर गए।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने बाहर परिसर में आकर भी कहा कि कांग्रेस नेताओं को राज्यपाल और राज्य की जनता से माफी मांगनी चाहिए। भोजनावकाश के बाद राज्यपाल के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा बगैर विपक्ष के हुई। कांग्रेस विधायक भीतर नहीं लौटे। अपराह्न 3:45 बजे सदन की कार्यवाही बुधवार 11 बजे तक के लिए स्थगित की गई। इससे पहले सुबह की कार्यवाही के शुरू होने से पहले नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री समेत निलंबित पांचों विधायक विधानसभा के मुख्य द्वार पर बैठे। इनके साथ पूर्व कांग्रेस विधायक सुभाष मंगलेट और अन्य पार्टी नेता भी मौजूद रहे। सदन में बैठक शुरू होते ही नादौन से कांग्रेस विधायक सुखविंद्र सिंह सुक्खू खड़े हो गए।
उन्होंने कहा कि सरकार ने विपक्ष को विश्वास में नहीं लिया। राज्यपाल ने अभिभाषण पूरा नहीं पढ़ा। राज्यपाल का स्वास्थ्य ठीक न होने की बात विपक्ष को नहीं बताई गई। विधानसभा उपाध्यक्ष हंसराज ने नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री को धक्का दिया। गैरकानूनी तरीके से किए निलंबन को रद्द किया जाए, वरना सदन नहीं चलने दिया जाएगा। कांग्रेस विधायक आशा कुमारी ने भी इस घटना के लिए संसदीय कार्य मंत्री और विधानसभा उपाध्यक्ष को कसूरवार ठहराया। इस पर पहले संसदीय कार्य मंत्री सुरेश भारद्वाज और फिर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कांग्रेस पर पलटवार किया। भारद्वाज ने बगैर शर्त के उनसे माफ ी मांगने को कहा। मुख्यमंत्री ने इसे निंदनीय बताते हुए कहा कि क्या हुआ इसके वीडियो मौजूद हैं।
जितने भी वीडियो या कैसेट हैं, सदन में किए जाएं पेश: आशा
चंबा के डलहौजी की कांग्रेस विधायक आशा कुमारी ने सदन में प्रश्नकाल से पहले हुए हंगामे के बीच कहा कि जितने भी वीडियो और कैसेट हैं, उन्हें सदन में पेश किया जाए। सच सामने आ जाएगा। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस सरकार सत्ता में थी तो कल्याण सिंह जब यहां भाषण देने आए तो उस वक्त भी साझा किया गया कि वह अस्वस्थ हैं और वह पूरा भाषण नहीं पढे़ंगे। उस वक्त कांग्रेस सत्तारूढ़ थी। इस बारे में इस बार भी विपक्ष को सूचित कर दिया जाता, पर ऐसा नहीं किया गया। हर बार स्पीकर की ओर से छोटी सी पर्ची आती है कि राज्यपाल के अभिभाषण के बाद चाय के लिए ज्वाइन करें। इसमें नेता प्रतिपक्ष बुलाए जाते हैं। इस बार पर्ची नहीं भेजी। बाहर शांतिपूर्ण तरीके से नारे लग रहे थे। संसदीय कार्य मंत्री सुरेश भारद्वाज ‘आग लगी है’ कहते हुए बाहर धक्का देते हुए आए। संसदीय कार्य मंत्री और उपाध्यक्ष ने भी धक्का दिया। राज्यपाल को गमलों के बीच से निकालकर ले जा रहे थे।
आशा बोलीं, मामा जी वीडियो बोल रहा
आशा कुमारी ने सुरेश भारद्वाज की ओर इशारा कर कहा - ये मेरे मामा हैं। इनका काम सुरक्षा देना होता है। मेरी मां जुब्बल से थीं। मैं शिमला में ही पली-बढ़ी। वीडियो बोल रहा है कि मामा जी आप क्या कर रहे थे। केवल एक आदमी महेंद्र सिंह ठाकुर ने सभ्य तरीके से बात की। सीएम चुपचाप सब देखते रहे।
विष्णुकांत शास्त्री के राज्यपाल रहते भी हुई थी ऐसी घटना, वीरभद्र ने मांगी थी माफी: भारद्वाज
संसदीय कार्य मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि केवल आशा कुमारी और सुखविंद्र सिंह सुक्खू ही सही बोल रहे हैं, ऐसा नहीं है। सोशल मीडिया पर कई वीडियो पेश किए जा रहे हैं। उन्हें अलग-अलग तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है। राज्यपाल को गाड़ी में नहीं बैठने दिया गया। उनकी गाड़ी का दरवाजा ही तोड़ने का प्रयास हुआ। निलंबन पहली बार नहीं हुआ है। सुरेश भारद्वाज बोले कि कांग्रेस सरकार के वक्त उन्हें और राजीव बिंदल को भी निलंबित किया गया था। वाद-विवाद से लोकतंत्र चलता है। इस प्रकार की घटना में नेता विपक्ष भी शामिल हों, यह पहली बार देखा गया है। वीरभद्र, विद्या स्टोक्स और प्रेमकुमार धूमल भी नेता प्रतिपक्ष रहे हैं, ऐसी स्थिति में वे पीछे रहे हैं। पर यहां तो नेता प्रतिपक्ष ही नेतृत्व कर रहे थे। बगैर किसी शर्त के राज्यपाल से माफी मांगी जाए, उसके बाद ही निलंबन पर विचार होना चाहिए। विष्णुकांत शास्त्री के राज्यपाल रहते भी ऐसी घटना हुई थी तो उस वक्त राज्यपाल से वीरभद्र सिंह ने माफी मांगी थी कि ऐसा हो गया है। पर यहां स्थिति यह है कि कांग्रेस विधायक अपने पूर्वजों को ही नहीं मानते हैं।
विधायक विक्रमादित्य के खिलाफ लाया जाए विशेषाधिकार प्रस्ताव : हंसराज
विधानसभा में उपाध्यक्ष हंसराज और कांग्रेस विधायक विक्रमादित्य के बीच हुई तीखी नोकझोंक के बाद उपाध्यक्ष ने सदन में कहा कि विक्रमादित्य सिंह ने जिस तरह का व्यवहार किया है, उस पर भी उचित कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से विक्रमादित्य के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव लाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर जिस तरह के आपत्तिजनक वीडियो डाले जा रहे हैं, उस पर कार्रवाई हो। उन्हें जान का खतरा है। जिस तरह से एनएसयूआई के लोग कह रहे हैं, उससे ऐसा लग रहा है। राज्यपाल की जान को भी खतरा था, इसलिए बीच बचाव करना पड़ा।
विधानसभा के भीतर उपाध्यक्ष का व्यवहार सही नहीं था : विक्रमादित्य
कांग्रेस विधायक विक्रमादित्य ने विधानसभा परिसर में कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान जो कुछ हुआ उसके लिए भाजपा जिम्मेदार है। उपाध्यक्ष हंसराज ने नेता प्रतिपक्ष को धक्का मारा है। कांग्रेस विधायकों को निलंबित किया है जबकि उपाध्यक्ष के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि विधानसभा के भीतर उपाध्यक्ष का व्यवहार सही नहीं था।