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हिमाचल: सेब सीजन में श्रमिकों का संकट गहराया, दिहाड़ी 600 पहुंची; तुड़ाई और ढुलाई से बढ़ी बागवानों की चिंता
Mon, 20 Jul 2026 02:53 PM IST
Ankesh Dogra
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Mon, 20 Jul 2026 02:53 PM IST
सार
हिमाचल प्रदेश में सेब सीजन के दौरान नेपाली श्रमिकों की कमी से बागवानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। तुड़ाई और ढुलाई प्रभावित होने के साथ मजदूरों की दिहाड़ी 600 रुपये तक पहुंच गई है। बागवानों का कहना है कि श्रमिकों की कमी से लागत बढ़ रही है। दूसरी ओर, झारखंड के श्रमिक मंडी और कुल्लू में नया विकल्प बनकर सामने आए हैं, हालांकि शिमला में अभी भी श्रमिकों की कमी बनी हुई है।
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सेब
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
हिमाचल प्रदेश में सेब सीजन के दौरान मजदूरों की भारी कमी बागवानों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। नेपाली श्रमिकों की संख्या घटने से सेब की तुड़ाई और ढुलाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। इससे मजदूरी दरों में भी वृद्धि दर्ज की गई है, जहां अकुशल श्रमिकों की दिहाड़ी 600 रुपये तक ली जा रही है। पर्याप्त मजदूर न मिलने से बागवानों को अपनी फसल मंडियों तक पहुंचाने में परेशानी हो रही है। नेपाली मजदूरों का रुझान अब खाड़ी देशों की ओर बढ़ रहा है, जहां उन्हें अधिक आय और बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं। नेपाली समाज भारत के अध्यक्ष जोखी राम ने बताया कि मजदूरों के पास अब रोजगार के अधिक विकल्प हैं।
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उन्होंने कहा कि हिमाचल में विशेष सुविधाएं नहीं हैं और इस बार सेब सीजन भी कमजोर है। हिमाचल प्रदेश फल, फूल एवं सब्जी उत्पादक संघ के अध्यक्ष हरीश चौहान ने भी मजदूरों की कमी की बात मान रहे हैं। उन्होंने बताया कि उपलब्ध मजदूर कम मजदूरी पर काम करने को तैयार नहीं हैं, इससे बागवानों की लागत लगातार बढ़ रही है। राज्य बागवानी विभाग के निदेशक सतीश शर्मा ने भी श्रमिकों की कमी स्वीकार की। उन्होंने स्पष्ट किया कि श्रमिकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना विभाग के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।
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नेपाली श्रमिकों की महसूस हो रही कमी
नेपाली मजदूरों की कमी के कई कारण हैं। खाड़ी देशों में बेहतर आय और सुविधाओं के कारण उनका रुझान उधर बढ़ गया है। भारत के अन्य राज्यों में भी रोजगार के बढ़ते अवसरों ने हिमाचल आने वाले नेपाली मजदूरों की संख्या को प्रभावित किया है। नेपाल में सरकार बदलने के बाद यह पहला सेब सीजन है, इसमें हिमाचल प्रदेश में नेपाली मजदूरों की कमी अधिक महसूस की जा रही है। बागवानी क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि इसकी प्रमुख वजह आर्थिक है।
झारखंड के मजदूर बने विकल्प
नेपाल से श्रमिकों की संख्या कम होने के बावजूद झारखंड से बड़ी संख्या में मजदूर हिमाचल के मंडी और कुल्लू जिले में आने लगे हैं। ये मजदूर बागवानों के लिए एक नया विकल्प बनकर उभरे हैं। जुब्बल निवासी प्रेम तांटा ने बताया कि मंडी और कुल्लू में स्थानीय श्रमिकों के अलावा झारखंड के मजदूर भी उपलब्ध हो रहे हैं। हालांकि, सेब बहुल शिमला में इनकी पहुंच अभी ज्यादा नहीं है, जिससे वहां संकट बना हुआ है।
नेपाली मजदूरों की कमी के कई कारण हैं। खाड़ी देशों में बेहतर आय और सुविधाओं के कारण उनका रुझान उधर बढ़ गया है। भारत के अन्य राज्यों में भी रोजगार के बढ़ते अवसरों ने हिमाचल आने वाले नेपाली मजदूरों की संख्या को प्रभावित किया है। नेपाल में सरकार बदलने के बाद यह पहला सेब सीजन है, इसमें हिमाचल प्रदेश में नेपाली मजदूरों की कमी अधिक महसूस की जा रही है। बागवानी क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि इसकी प्रमुख वजह आर्थिक है।
झारखंड के मजदूर बने विकल्प
नेपाल से श्रमिकों की संख्या कम होने के बावजूद झारखंड से बड़ी संख्या में मजदूर हिमाचल के मंडी और कुल्लू जिले में आने लगे हैं। ये मजदूर बागवानों के लिए एक नया विकल्प बनकर उभरे हैं। जुब्बल निवासी प्रेम तांटा ने बताया कि मंडी और कुल्लू में स्थानीय श्रमिकों के अलावा झारखंड के मजदूर भी उपलब्ध हो रहे हैं। हालांकि, सेब बहुल शिमला में इनकी पहुंच अभी ज्यादा नहीं है, जिससे वहां संकट बना हुआ है।