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हिमाचल प्रदेश: संकट में खेती, सूखे से 3,087 हेक्टेयर में गेहूं की फसल बर्बाद; इस रिपोर्ट से हुआ खुलासा

Wed, 07 Jan 2026 06:00 AM IST
अंकेश डोगरा अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: अंकेश डोगरा Updated Wed, 07 Jan 2026 06:00 AM IST
सार

हिमाचल प्रदेश में लंबे वक्त से बारिश न होने से गेहूं की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। पूरे प्रदेश में 3087 हेक्टेयर में फसल खराब हो गई है। पढ़ें पूरी खबर...

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Himachal Agriculture in crisis wheat crop destroyed in 3087 hectares due to drought
बंगाणा में बिना बारिश से पीली पड़ी गेंहू की फसल। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

राज्य में रबी सीजन में बनी सूखे जैसी स्थिति ने खेती को संकट में डाल दिया है। लंबे वक्त से बारिश न होने से प्रदेश में गेहूं की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। पूरे प्रदेश में 9,359 हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की फसल प्रभावित हुई है तो 3087 हेक्टेयर में फसल खराब हो गई है। यह खुलासा राज्य कृषि निदेशालय को फील्ड से मिली ताजा रिपोर्ट में हुआ है। कम नमी के कारण 10 फीसदी क्षेत्र में बुआई नहीं हो पाई है। राज्य में दिसंबर तक 3,55,347 हेक्टेयर भूमि पर हुई रबी फसलों की बिजाई नहीं हो पाई। 2,90,713 हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की फसल की बुआई की गई। अब बुआई भी नहीं की जा सकती है। इसकी पुष्टि कृषि निदेशक डॉ. रवींद्र सिंह जसरोटिया ने की है।

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राज्य के कई जिलों में गेहूं की फसल पर सूखे जैसे हालात पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है। कम नमी के चलते लगभग 10 प्रतिशत क्षेत्र में गेहूं की बुआई पहले ही नहीं हो पाई है। यानी 90 फीसदी क्षेत्र में बुआई हो पाई है। इससे किसानों को रबी सीजन की शुरुआत में ही नुकसान झेलना पड़ रहा। गेहूं हिमाचल की प्रमुख रबी फसल है और इसका उत्पादन मुख्य रूप से कांगड़ा, मंडी, हमीरपुर, ऊना, बिलासपुर, सोलन, सिरमौर जिलों के अलावा शिमला, चंबा और कुल्लू के निचले इलाकों में होता है।

कृषि निदेशक डॉ. जसरोटिया और संयुक्त निदेशक डॉ. रविंद्र चौहान ने बताया कि बारिश की कमी और मिट्टी में नमी के अभाव के कारण फसल की बढ़वार प्रभावित हुई है। लंबे समय तक वर्षा न होने से मिट्टी में जरूरी नमी नहीं है, जिससे अंकुरण और पौधों की शुरुआती अवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ा है। कई इलाकों में सिंचाई के सीमित साधनों के कारण किसान फसल को बचाने में असमर्थ रहे हैं, जबकि कुछ क्षेत्रों में पौधों की बढ़वार रुक गई हैं या बालियां ठीक से विकसित नहीं हो पाईं।

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कृषि निदेशक डॉ. रविंद्र सिंह जसरोटिया ने बताया कि यह रिपोर्ट ताजा है। आने वाले समय में बारिश हुई तो नुकसान की भरपाई हो सकती है। राजस्व विभाग के मानकों के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों का विस्तृत नुकसान आकलन किया जा रहा है और रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजी जाएगी। समय-समय पर फील्ड रिपोर्ट मंगवाई जा रही हैं।

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गेहूं की कब कितनी फसल हुई
फसल मीट्रिक टन में
2020-21 5,73,87,000
2021-22 6,47,27,000
2022-23 6,12,32,000
2023-24 7,80,07,000
2024-25 6,28,00,000
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