हिमाचल: कृषि और बागवानी विवि के वीसी की नियुक्ति का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, नई चयन प्रक्रिया पर भी संकट
चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर और डॉ. यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी में कुलपतियों की नियुक्ति का विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। हिमाचल हाईकोर्ट के 27 अगस्त के आदेश के बाद लोकभवन ने यूजीसी के 2018 नियमों के अनुसार नई चयन प्रक्रिया शुरू की थी। इसी बीच राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी है। अब दोनों विश्वविद्यालयों में वीसी नियुक्ति की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के रुख पर निर्भर हो सकती है।
विस्तार
चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर और डॉ. यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी में कुलपतियों (वीसी) की नियुक्ति का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के 27 अगस्त के आदेश के अनुपालन में लोकभवन ने दोनों विश्वविद्यालयों में कुलपति चयन की नई प्रक्रिया शुरू कर दी थी। इसी बीच हिमाचल प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी है। सचिव कृषि सी पाल रासू ने सरकार के सर्वोच्च न्यायालय में जाने की पुष्टि की है। प्रदेश सरकार के सुप्रीम कोर्ट जाने से दोनों विश्वविद्यालयों में कुलपति नियुक्ति की प्रक्रिया एक बार फिर रुक सकती है। एक ओर लोकभवन हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार नई चयन प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकार ने उसी आदेश के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।
ऐसे में अब सुप्रीम कोर्ट के रुख पर निगाह रहेगी कि लोकभवन की ओर से नई शुरू की गई चयन प्रक्रिया आगे जारी रहती है या उस पर भी कोई असर पड़ता है। हाईकोर्ट ने 27 अगस्त को दिए आदेश में दोनों विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति से संबंधित राज्य सरकार के संशोधित प्रावधानों को निरस्त कर दिया था। अदालत ने आदेश दिया था कि कुलपतियों की नियुक्ति के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के 2018 के नियमों के अनुरूप प्रक्रिया अपनाई जाए। अदालत ने कुलपति चयन के लिए गठित होने वाली सर्च कमेटी की संरचना को भी महत्वपूर्ण माना था। यूजीसी के नियमों के अनुसार चयन समिति में यूजीसी की ओर से नामित सदस्य की भूमिका रहती है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद पुरानी चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के बजाय नए सिरे से प्रक्रिया अपनाने की स्थिति बनी।
ऐसे शुरू हुआ था विवाद
कुलपतियों की नियुक्ति को लेकर विवाद सरकार की ओर से संबंधित अधिनियम में संशोधन किए जाने के बाद शुरू हुआ था। सरकार ने कुलपति नियुक्ति की प्रक्रिया में राज्य सरकार की भूमिका से जुड़े प्रावधान किए थे। इसके बाद दोनों विश्वविद्यालयों में कुलपति पद के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे। इन संशोधित प्रावधानों को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। सुनवाई के बाद अदालत ने राज्य सरकार के संशोधित प्रावधानों को यूजीसी के 2018 के नियमों के अनुरूप नहीं माना और उन्हें निरस्त कर दिया।