प्रशासनिक ट्रिब्यूनल ने शिक्षकों के हक में सुनाया अहम फैसला
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राज्य प्रशासनिक ट्रिब्यूनल ने साल 2010 में अनुबंध पर नियुक्त शिक्षकों को बैकडेट से नियमितीकरण के लाभ देने के आदेश दिए हैं। ट्रिब्यूनल का फैसला आने के बाद साल 2016 में नियमित हुए शिक्षकों को साल 2010 से लाभ मिलेंगे।
प्रशासनिक ट्रिब्यूनल ने शिक्षा विभाग में कार्यरत अनुबंध पीजीटी और टीजीटी जो 2010 में अनुबंध पर नियुक्त हुए थे, उन्हें नियुक्ति की तारीख से नियमितीकरण करने के आदेश पारित किए हैं।
पीजीटी राजेश कुमार, संतोष कुमार, कपिल डोगरा और अन्य बनाम सरकार के केस में यह फैसला 16 दिसंबर में आया था। करीब 70 में से 15 टीजीटी में राजेश कुमार वर्मा, चंद्रकांत ठाकुर, मुनीष गर्ग और अन्य बनाम प्रदेश सरकार के केस में ट्रिब्यूनल का फैसला 28 फरवरी को आया।
अब अन्य 55 टीजीटी समीर पटियाल और अन्य बनाम सरकार केस में इन शिक्षकों के पक्ष में फैसला 22 मार्च को आया। ये सभी शिक्षक 2002 में नियुक्त टीजीटी के पक्ष में आए सुप्रीमकोर्ट के फैसले को आधार बनाकर ट्रिब्यूनल में गए थे। सुप्रीमकोर्ट ने उनके पक्ष में भर्ती एवं पदोन्नति को आधार बनाकर फैसला सुनाया था।
साल 2016 में नियमित हुए शिक्षकों को 2010 से मिलेंगे लाभ
इसी फैसले देवराज बनाम सरकार को आगे रखते हुए अनुबंध शिक्षकों ने ट्रिब्यूनल को बताया कि जब हमारी भर्ती के लिए विज्ञापन निकाला गया तो उस समय 1973 के भर्ती एवं पदोन्नति नियम ही चल रहे थे, जिनमें अनुबंध आधार पर नियुक्तियां नहीं हो सकती थीं।
केवल नियमित नियुक्तियों का ही प्रावधान था। अनुबंध आधार पर शिक्षकों की नियुक्ति के भर्ती एवं पदोन्नति नियम भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद बने। ऐसे में प्रशासनिक ट्रिब्यूनल ने देवराज बनाम सरकार केस में सुप्रीमकोर्ट के फैसले को आधार बनाकर अपना फैसला इन शिक्षकों के पक्ष में सुनाया।
ट्रिब्यूनल के फैसले का स्वागत करते हुए प्रदेश अनुबंध अध्यापक संघ के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष राजेश जयसिंहपुरिया और पूर्व महासचिव राजेश वर्मा ने कहा कि जब हमारी नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हुई थी, उस समय पुराने भर्ती एवं पदोन्नति नियम लागू थे।
अनुबंध पर भर्ती के ये नियम बाद में बने और लागू हुए हैं। इन्हीं के आधार पर पुराने भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के अनुसार नियुक्ति की तारीख से वे सभी लाभ दिए जाएं, जो नियमित नियुक्ति पर मिलते हैं।