{"_id":"6687eb0dbd95ab05030db2dc","slug":"hill-is-cracking-in-bhattakufar-fruit-market-gardeners-in-panic-shimla-news-c-19-sml1001-375694-2024-07-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shimla News: भट्ठाकुफर फल मंडी में दरक \nरही पहाड़ी, दहशत में बागवान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shimla News: भट्ठाकुफर फल मंडी में दरक रही पहाड़ी, दहशत में बागवान
विज्ञापन
बारिश के दौरान रोजाना गिर रहे पहाड़ी से पत्थर
आढ़ती बोले, हादसे का सता रहा है डर
भारती शर्मा
शिमला। राजधानी की भट्ठाकुफर फल मंडी पर दोबारा खतरा मंडराना शुरू हो गया है। बारिश में भट्ठाकुफर फल मंडी की पहाड़ी से हर रोज पत्थर गिर रहे हैं। इससे आढ़ती और बागवान दहशत में हैं। समय रहते कदम नहीं उठाए तो किसी बड़े हादसे से भी इन्कार नहीं किया जा सकता।
चार साल पहले फल मंडी में पहाड़ी दरक गई थी। इस हादसे में मंडी में सैकड़ों पेटी सेब बर्बाद हो गया था। अब दोबारा बरसात शुरू होते ही पहाड़ी से पत्थर गिरना शुरू हो गए हैं। इससे बागवानों और आढ़तियों को पहाड़ी दरकने का डर सताने लगा है। बारिश के दौरान मलबे के साथ मंडी में पानी भर जाता है। इससे मंडी में पहुंच रहे सेब और नाशपती की पेटियां खराब हो रही हैं। आढ़तियों को पेटियों के कार्टन बदलकर बाहरी राज्यों में फलों की सप्लाई भेजनी पड़ रही है।
आढ़तियों ने पानी से बचाने के लिए पेटियों के नीचे लकड़ी के स्टैंड बनाए हैं। बारिश के दौरान आढ़तियों को पानी को अंदर आने से रोकने के लिए तिरपाल भी लगाना पड़ता है। मंडी में दो ऑक्शन यार्ड बनाए हैं लेकिन कारोबार एक ही यार्ड में चलता है। कई बार ज्यादा माल आने पर उसे दूसरे यार्ड में उतारा जाता है। लेकिन दूसरे यार्ड की छत टूटी हुई है। इससे बारिश का पानी मंडी में घुस जाता है। बारिश के दौरान वहां भी मलबे के साथ पानी भर जाता है। आढ़ती अंशुमन ने बताया कि बारिश के दौरान रोजाना पहाड़ी से पत्थर गिरते हैं। ऐसा लगता है कि कभी भी पहाड़ी दरक जाएगी। कहा कि सेब सीजन तो अभी शुरू ही हुआ है, आने वाले दिनों में फसल की सप्लाई बढ़ना शुरू हो जाएगी, ऐसे में इतनी जगह में कारोबार करने में परेशानी होगी। मलबा गिर गया तो सीजन लगाना मुश्किल हो जाएगा। आढ़तियों का कहना है कि हर बार सीजन के लिए नई मंडी बनाने का दिलासा दिया जाता है, लेकिन मंडी अभी तक नहीं बनाई है।
विज्ञापन
कोट
भट्ठाकुफर फल मंडी से हटने वाले मलबे को हटा दिया है। मंडी में नया अस्थायी शेड और नीलामी मंच बनाया जाना है। इसे सेब सीजन से पहले तैयार किया जाना था लेकिन चुनाव आचार संहिता के चलते इसकी टेंडर प्रक्रिया रुक गई थी।
-देवानंद वर्मा, चेयरमैन, एपीएमसी शिमला किन्नौर
विज्ञापन
आढ़ती बोले, हादसे का सता रहा है डर
भारती शर्मा
शिमला। राजधानी की भट्ठाकुफर फल मंडी पर दोबारा खतरा मंडराना शुरू हो गया है। बारिश में भट्ठाकुफर फल मंडी की पहाड़ी से हर रोज पत्थर गिर रहे हैं। इससे आढ़ती और बागवान दहशत में हैं। समय रहते कदम नहीं उठाए तो किसी बड़े हादसे से भी इन्कार नहीं किया जा सकता।
चार साल पहले फल मंडी में पहाड़ी दरक गई थी। इस हादसे में मंडी में सैकड़ों पेटी सेब बर्बाद हो गया था। अब दोबारा बरसात शुरू होते ही पहाड़ी से पत्थर गिरना शुरू हो गए हैं। इससे बागवानों और आढ़तियों को पहाड़ी दरकने का डर सताने लगा है। बारिश के दौरान मलबे के साथ मंडी में पानी भर जाता है। इससे मंडी में पहुंच रहे सेब और नाशपती की पेटियां खराब हो रही हैं। आढ़तियों को पेटियों के कार्टन बदलकर बाहरी राज्यों में फलों की सप्लाई भेजनी पड़ रही है।
विज्ञापन
आढ़तियों ने पानी से बचाने के लिए पेटियों के नीचे लकड़ी के स्टैंड बनाए हैं। बारिश के दौरान आढ़तियों को पानी को अंदर आने से रोकने के लिए तिरपाल भी लगाना पड़ता है। मंडी में दो ऑक्शन यार्ड बनाए हैं लेकिन कारोबार एक ही यार्ड में चलता है। कई बार ज्यादा माल आने पर उसे दूसरे यार्ड में उतारा जाता है। लेकिन दूसरे यार्ड की छत टूटी हुई है। इससे बारिश का पानी मंडी में घुस जाता है। बारिश के दौरान वहां भी मलबे के साथ पानी भर जाता है। आढ़ती अंशुमन ने बताया कि बारिश के दौरान रोजाना पहाड़ी से पत्थर गिरते हैं। ऐसा लगता है कि कभी भी पहाड़ी दरक जाएगी। कहा कि सेब सीजन तो अभी शुरू ही हुआ है, आने वाले दिनों में फसल की सप्लाई बढ़ना शुरू हो जाएगी, ऐसे में इतनी जगह में कारोबार करने में परेशानी होगी। मलबा गिर गया तो सीजन लगाना मुश्किल हो जाएगा। आढ़तियों का कहना है कि हर बार सीजन के लिए नई मंडी बनाने का दिलासा दिया जाता है, लेकिन मंडी अभी तक नहीं बनाई है।
विज्ञापन
कोट
भट्ठाकुफर फल मंडी से हटने वाले मलबे को हटा दिया है। मंडी में नया अस्थायी शेड और नीलामी मंच बनाया जाना है। इसे सेब सीजन से पहले तैयार किया जाना था लेकिन चुनाव आचार संहिता के चलते इसकी टेंडर प्रक्रिया रुक गई थी।
-देवानंद वर्मा, चेयरमैन, एपीएमसी शिमला किन्नौर