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Shimla News: शोघी में बनेगी हाईटेक फूड टेस्टिंग लैब, मिलावटखोरों पर कसेगा शिकंजा
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जिला सलाहकार समिति की बैठक में डीसी ने दी जानकारी, त्योहारी सीजन में अब सैंपल बाहर भेजने की नहीं रहेगी जरूरत
लोगों को मिलेंगे गुणवत्तापूर्ण खाद्य और पेय पदार्थ
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। शहर से सटे शोघी क्षेत्र में जल्द हाईटेक फूड टेस्टिंग लैब स्थापित की जाएगी। लैब शुरू होने से खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों पर समय रहते कार्रवाई की जा सकेगी। साथ ही जांच रिपोर्ट आने में होने वाली महीनों की देरी से भी विभाग को राहत मिलेगी।
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत गठित जिला स्तरीय सलाहकार समिति की मंगलवार को उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह फैसला लिया गया। इसके लिए विभाग सरकारी भवन का निरीक्षण कर जल्द अपनी रिपोर्ट सौंपेगा। लैब शुरू होने के बाद दूध, घी, तेल, मसाले, मिठाइयों, पेय पदार्थों समेत अन्य खाद्य सामग्री के नमूनों की जांच के लिए उन्हें सोलन या चंडीगढ़ भेजने की आवश्यकता नहीं रहेगी। अभी तक विभाग को विशेष रूप से त्योहारी सीजन में सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता था। इस दौरान बड़ी संख्या में विभिन्न जिलों और राज्यों से नमूने (सैंपल) जांच के लिए पहुंचने के कारण रिपोर्ट मिलने में कई महीने लग जाते थे। ऐसे में रिपोर्ट आने तक लोग संबंधित खाद्य पदार्थों का सेवन कर चुके होते थे जिससे समय पर कार्रवाई संभव नहीं हो पाती थी।
शहर में ही फूड टेस्टिंग लैब स्थापित होने से जांच प्रक्रिया तेज होगी और विभाग को समय पर रिपोर्ट मिलने के साथ संबंधित संचालकों के खिलाफ कार्रवाई करने में भी आसानी होगी। लैब में कीटनाशकों के अवशेष, हानिकारक रसायनों, भारी धातुओं और सूक्ष्म जीवों की जांच की जाएगी। इसके अलावा स्थानीय खाद्य उत्पादकों, होटल-रेस्तरां, डेयरी तथा खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को भी अपने उत्पादों की गुणवत्ता प्रमाणित कराने में सुविधा मिलेगी। बैठक में खाद्य सुरक्षा विभाग ने बताया कि शिमला ग्रामीण क्षेत्र से अब तक 28 खाद्य नमूने लिए हैं और अधिकांश नमूने निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पाए गए हैं। बैठक में खाद्य सुरक्षा अधिकारी (शिमला ग्रामीण) धर्मेंद्र चौहान, खाद्य सुरक्षा अधिकारी अनीता ठाकुर, जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. विनीत लखनपाल सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
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जिले में 800 पंजीकरण और 65 लाइसेंस जारी
बैठक में बताया कि जिले में खाद्य व्यवसाय संचालकों के 800 पंजीकरण हुए हैं और 65 को लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं। चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 172 नए पंजीकरण किए हैं तथा 67 नए लाइसेंस जारी किए हैं। बैठक में बताया कि जिले में विश्लेषक (एनालिस्ट) की नियुक्ति नहीं होने के कारण मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब के माध्यम से खाद्य नमूनों की जांच नहीं हो पा रही है। इसके अलावा ईट राइट स्कूल अभियान के तहत विद्यालयों के आसपास बिकने वाली कुल्फी, चुस्की, आइसक्रीम तथा अन्य खाद्य पदार्थों की नियमित जांच के भी निर्देश दिए।
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लोगों को मिलेंगे गुणवत्तापूर्ण खाद्य और पेय पदार्थ
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। शहर से सटे शोघी क्षेत्र में जल्द हाईटेक फूड टेस्टिंग लैब स्थापित की जाएगी। लैब शुरू होने से खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों पर समय रहते कार्रवाई की जा सकेगी। साथ ही जांच रिपोर्ट आने में होने वाली महीनों की देरी से भी विभाग को राहत मिलेगी।
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत गठित जिला स्तरीय सलाहकार समिति की मंगलवार को उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह फैसला लिया गया। इसके लिए विभाग सरकारी भवन का निरीक्षण कर जल्द अपनी रिपोर्ट सौंपेगा। लैब शुरू होने के बाद दूध, घी, तेल, मसाले, मिठाइयों, पेय पदार्थों समेत अन्य खाद्य सामग्री के नमूनों की जांच के लिए उन्हें सोलन या चंडीगढ़ भेजने की आवश्यकता नहीं रहेगी। अभी तक विभाग को विशेष रूप से त्योहारी सीजन में सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता था। इस दौरान बड़ी संख्या में विभिन्न जिलों और राज्यों से नमूने (सैंपल) जांच के लिए पहुंचने के कारण रिपोर्ट मिलने में कई महीने लग जाते थे। ऐसे में रिपोर्ट आने तक लोग संबंधित खाद्य पदार्थों का सेवन कर चुके होते थे जिससे समय पर कार्रवाई संभव नहीं हो पाती थी।
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शहर में ही फूड टेस्टिंग लैब स्थापित होने से जांच प्रक्रिया तेज होगी और विभाग को समय पर रिपोर्ट मिलने के साथ संबंधित संचालकों के खिलाफ कार्रवाई करने में भी आसानी होगी। लैब में कीटनाशकों के अवशेष, हानिकारक रसायनों, भारी धातुओं और सूक्ष्म जीवों की जांच की जाएगी। इसके अलावा स्थानीय खाद्य उत्पादकों, होटल-रेस्तरां, डेयरी तथा खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को भी अपने उत्पादों की गुणवत्ता प्रमाणित कराने में सुविधा मिलेगी। बैठक में खाद्य सुरक्षा विभाग ने बताया कि शिमला ग्रामीण क्षेत्र से अब तक 28 खाद्य नमूने लिए हैं और अधिकांश नमूने निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पाए गए हैं। बैठक में खाद्य सुरक्षा अधिकारी (शिमला ग्रामीण) धर्मेंद्र चौहान, खाद्य सुरक्षा अधिकारी अनीता ठाकुर, जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. विनीत लखनपाल सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
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जिले में 800 पंजीकरण और 65 लाइसेंस जारी
बैठक में बताया कि जिले में खाद्य व्यवसाय संचालकों के 800 पंजीकरण हुए हैं और 65 को लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं। चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 172 नए पंजीकरण किए हैं तथा 67 नए लाइसेंस जारी किए हैं। बैठक में बताया कि जिले में विश्लेषक (एनालिस्ट) की नियुक्ति नहीं होने के कारण मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब के माध्यम से खाद्य नमूनों की जांच नहीं हो पा रही है। इसके अलावा ईट राइट स्कूल अभियान के तहत विद्यालयों के आसपास बिकने वाली कुल्फी, चुस्की, आइसक्रीम तथा अन्य खाद्य पदार्थों की नियमित जांच के भी निर्देश दिए।