फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   High Court strict on lack of drug testing laboratory in Himachal, summons test report from Health Secretary

Himachal: दवाइयों की परीक्षण प्रयोगशाला नहीं होने पर हाईकोर्ट सख्त, स्वास्थ्य सचिव से तलब की टेस्ट रिपोर्ट

Thu, 25 May 2023 06:43 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Thu, 25 May 2023 06:43 PM IST
सार

 प्रदेश हाईकोर्ट ने सूबे में दवाइयों की परीक्षण प्रयोगशाला न होने पर कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने केंद्र सहित राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। 

विज्ञापन
High Court strict on lack of drug testing laboratory in Himachal, summons test report from Health Secretary
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सूबे में दवाइयों की परीक्षण प्रयोगशाला न होने पर कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने केंद्र सहित राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अदालत ने प्रधान सचिव स्वास्थ्य और ड्रग कंट्रोलर से 186 दवाइयों की टेस्ट रिपोर्ट का रिकॉर्ड तलब किया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश वीरेंदर सिंह की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई 28 जून को निर्धारित की है। अदालत ने राज्य सरकार से पूछा है कि सेंट्रल बैंक की ओर से दवाइयों की परीक्षण प्रयोगशाला बनाने के लिए जारी किए गए 30 करोड़ कहां खर्च किए गए। अदालत ने ड्रग इंस्पेक्टर के खाली पदों की जानकारी भी मांगी है। अदालत ने स्पष्ट करने के आदेश दिए हैं कि खाली पद भरने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि वर्ष 2017 में सेंट्रल बैंक ने बद्दी में दवाइयों की परीक्षण प्रयोगशाला के निर्माण के लिए 30 करोड़ की राशि स्वीकृत की थी।

विज्ञापन


निर्माण कार्यों का ब्योरा तलब किया
अदालत ने इन सभी निर्माण कार्यों का ब्योरा तलब किया है। पीपल फॉर रिस्पांसिबल गवर्नेंस संस्था ने सूबे में दवाइयों के परीक्षण प्रयोगशाला न होने पर याचिका दायर की है। आरोप लगाया है कि 2014 में उद्योग विभाग ने 3.50 करोड़ प्रयोगशाला के निर्माण के लिए खर्च किए हैं, लेकिन अभी इसे चालू नहीं किया गया है। इसके अलावा केंद्र ने 12वीं पंच वर्षीय योजना के तहत 30 करोड़ की राशि जारी की थी। आरोप लगाया है कि दवाइयों के परीक्षण के लिए प्रयोगशाला न होने के कारण घटिया दवाइयों का उत्पादन किया जा रहा है। याचिका में बताया गया है कि बद्दी में निर्मित खांसी की दवाई पीने के कारण दिसंबर 2019 और जनवरी 2020 में जम्मू के उधमपुर में नौ बच्चों की जान चली गई थी। जून और नवंबर 2022 में जांबिया के 82 बच्चों की किडनी खराब हो गई थी और उनमें 70 बच्चों की जान चली गई थी। उज्बेकिस्तान के 18 बच्चे भी घटिया दवाई के शिकार हुए थे। आरोप लगाया गया है कि सूबे में दवाइयों के परीक्षण के लिए प्रयोगशाला न होने के कारण ऐसे हादसे हो रहे हैं।
विज्ञापन


हिमाचल में निर्मित 11 दवाइयों के नमूने किए गए हैं घटिया घोषित
राष्ट्रीय औषधि नियामक और केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने हिमाचल में निर्मित 11 दवाइयों के नमूने घटिया घोषित किए गए हैं। हिमाचल से घटिया घोषित की गई दवाओं में एस्ट्राजोल इंजेक्शन, एस्ट्रीजो टैबलेट, मिसोप्रोस्टोल टैबलेट, एमोक्सिसिलिन कैप्सूल, पैरासिटामोल ओरल सस्पेंशन, फिनाविव टैबलेट, पैंटोप्राजोल और डोमपेरिडोन कैप्सूल, रैंटिडिन हाइड्रोक्लोराइड टैबलेट और लेवोसेटिरिजिन और इबुप्रोफेन टैबलेट शामिल हैं। घटिया और नकली दवाइयों के निर्माता बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़, काला अंब के साथ पांवटा साहिब के औद्योगिक समूहों में स्थित हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed