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Shimla News: निजी फायदे के लिए पेड़ काटने पर हाईकोर्ट सख्त
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प्रदेश सरकार और निजी प्रतिवादियों को नोटिस जारी
शिमला-मंडी सड़क से बने रहे लिंक रोड निर्माण पर रोक
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मशोबरा रेंज में एक निजी व्यक्ति को लाभ पहुंचाने के लिए पर्यावरण को नुकसान पहुंचाकर बनाई जा रही सड़क के मामले में कड़ा रुख अपनाया है।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सड़क निर्माण गतिविधियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। अदालत ने राज्य सरकार और निजी प्रतिवादियों को भी नोटिस जारी किया है। अदालत ने याचिका को इस विषय पर लंबित एक अन्य जनहित याचिका के साथ सूचीबद्ध करते हुए अगली सुनवाई 15 सितंबर 2026 को निर्धारित की है। अदालत को बताया कि 27 अप्रैल 2026 को शिमला-मंडी मार्ग से बलदेयां के पास शिलथॉर्न टॉप तक 0.07.20 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन की अनुमति इस आधार पर दी थी कि इससे सधोरा गांव के 245 लोगों को लाभ होगा। हालांकि तस्वीरों और रिकॉर्ड से सामने आया कि 144 मीटर लंबी यह सड़क केवल एक निजी घर को मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए बनाई जा रही है।अदालत को सूचित किया कि वन स्वीकृति इस गलत धारणा के आधार पर दी गई थी कि गांव पहाड़ी के शीर्ष पर स्थित है, जबकि वास्तव में सधोरा गांव सड़क के नीचे स्थित है। याचिकाकर्ता ने तस्वीरों का हवाला देते हुए बताया कि घने हरे-भरे जंगल के बीच से सड़क निकालने के लिए बड़ी संख्या में पेड़ काटे गए हैं। निर्माण कार्य के कारण क्षेत्र की पारिस्थितिकी को भी भारी नुकसान पहुंचाया गया है।
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शिमला-मंडी सड़क से बने रहे लिंक रोड निर्माण पर रोक
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मशोबरा रेंज में एक निजी व्यक्ति को लाभ पहुंचाने के लिए पर्यावरण को नुकसान पहुंचाकर बनाई जा रही सड़क के मामले में कड़ा रुख अपनाया है।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सड़क निर्माण गतिविधियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। अदालत ने राज्य सरकार और निजी प्रतिवादियों को भी नोटिस जारी किया है। अदालत ने याचिका को इस विषय पर लंबित एक अन्य जनहित याचिका के साथ सूचीबद्ध करते हुए अगली सुनवाई 15 सितंबर 2026 को निर्धारित की है। अदालत को बताया कि 27 अप्रैल 2026 को शिमला-मंडी मार्ग से बलदेयां के पास शिलथॉर्न टॉप तक 0.07.20 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन की अनुमति इस आधार पर दी थी कि इससे सधोरा गांव के 245 लोगों को लाभ होगा। हालांकि तस्वीरों और रिकॉर्ड से सामने आया कि 144 मीटर लंबी यह सड़क केवल एक निजी घर को मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए बनाई जा रही है।अदालत को सूचित किया कि वन स्वीकृति इस गलत धारणा के आधार पर दी गई थी कि गांव पहाड़ी के शीर्ष पर स्थित है, जबकि वास्तव में सधोरा गांव सड़क के नीचे स्थित है। याचिकाकर्ता ने तस्वीरों का हवाला देते हुए बताया कि घने हरे-भरे जंगल के बीच से सड़क निकालने के लिए बड़ी संख्या में पेड़ काटे गए हैं। निर्माण कार्य के कारण क्षेत्र की पारिस्थितिकी को भी भारी नुकसान पहुंचाया गया है।
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