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जबाव दो, किसने की बसों की अवैध चेकिंग
ब्यूरो/ अमर उजाला, शिमला
Updated Thu, 08 May 2014 09:25 PM IST
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हिमाचल परिवहन निगम के कर्मचारियों की ओर से निजी बसों की अवैध चेकिंग करने को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार और परिवहन निगम से जवाबतलब किया है।
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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायमूर्ति वीके शर्मा की खंडपीठ ने प्राइवेट ऑपेरटर वेलफेयर सोसाइटी की ओर से दायर याचिका की प्रारंभिक सुनवाई के बाद परिवहन निगम हमीरपुर के क्षेत्रीय प्रबंधक से यह जानकारी तलब की है कि निजी बसों की अवैध चेकिंग करने में निगम के कौन-कौन से कर्मचारी शामिल थे, उनका पूरा विवरण दें।
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यह ब्योरा क्षेत्रीय प्रबंधक हमीरपुर को अदालत के समक्ष शपथ पत्र के माध्यम से 29 मई तक पेश करना होगा। याचिका में प्रार्थी ने आरोप लगाया है कि निजी वाहनों के कागजों की छानबीन करना निगम कर्मचारियों के क्षेत्राधिकार में नहीं है।
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यह तथ्य जिलाधीश हमीरपुर के नोटिस में भी लाया गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अदालत को बताया गया कि परिवहन निगम भी एक ऑपरेटर की तरह काम करता है और निजी बस ऑपरेटरों के साथ उसका कंपीटीशन है।
ऐसी स्थिति में निजी बस ऑपरेटरों के कागजात चेक करने का कानूनी कोई हक नहीं है। मोटर वाहन अधिनियम के विरुद्ध की जा रही इस कार्रवाई पर रोक लगाई जानी चाहिए।
याचिका में अवैध चेकिंग करने वाले परिवहन निगम कर्मियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है। दायर याचिका पर सुनवाई आगामी 29 मई को होगी।