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हाईकोर्ट: सिक्किम के विवि से स्नातकोत्तर प्रार्थी हिमाचल में प्रवक्ता पद के लिए अयोग्य
Mon, 21 Mar 2022 08:45 PM IST
Krishan Singh
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Mon, 21 Mar 2022 08:45 PM IST
सार
न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सीबी बारोवालिया की खंडपीठ ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि यूजीसी की ओर से कोर्ट के समक्ष दाखिल किए गए शपथपत्र से यह स्पष्ट होता है कि यूजीसी ने सिक्किम मनिपाल यूनिवर्सिटी को दूसरे राज्यों में डिस्टेंस एजूकेशन मोड से स्नातकोत्तर की डिग्री के लिए दाखिला देने के लिए स्वीकृति नहीं दी है।
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कोर्ट(सांकेतिक)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सिक्किम के विश्वविद्यालय से डिस्टेंस एजूकेशन मोड से अंग्रेजी में स्नातकोत्तर की डिग्री लेने वाले प्रार्थी को हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय से राहत नहीं मिली है। हाईकोर्ट ने अंग्रेजी प्रवक्ता के पद के लिए उसे अयोग्य पाते हुए उसकी याचिका खारिज कर दी है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सीबी बारोवालिया की खंडपीठ ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि यूजीसी की ओर से कोर्ट के समक्ष दाखिल किए गए शपथपत्र से यह स्पष्ट होता है कि यूजीसी ने सिक्किम मनिपाल यूनिवर्सिटी को दूसरे राज्यों में डिस्टेंस एजूकेशन मोड से स्नातकोत्तर की डिग्री के लिए दाखिला देने के लिए स्वीकृति नहीं दी है।
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जब यूजीसी को इस तरह की गतिविधियों के बारे में पता लगा तो यूजीसी ने नोटिस जारी कर विद्यार्थियों के अभिभावकों को यह बताने का प्रयास भी किया कि यूजीसी की मान्यता न होने के कारण इस तरह के विश्वविद्यालय से डिग्री प्राप्त करने का जोखिम न उठाएं। याचिका में दिए तथ्यों के अनुसार प्रार्थी ने अंग्रेजी प्रवक्ता के पद को अनुबंध के आधार पर भरने के लिए आवेदन किया था। लिखित परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उसे साक्षात्कार के दौरान इस कारण बाहर कर दिया गया कि उसकी स्नातकोत्तर की डिग्री हिमाचल प्रदेश में मान्य नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 के मुताबिक उच्च न्यायालय इस तरह की परिस्थितियों में प्रार्थी को राहत देने के लिए सक्षम नहीं है।
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