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10 वर्षों तक अंशकालिक कार्यकाल पूरा करने वाले पंचायत चौकीदार बनेंगे दैनिक वेतनभोगी, हाईकोर्ट ने दिए आदेश
Thu, 22 Jul 2021 06:41 PM IST
Krishan Singh
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Thu, 22 Jul 2021 06:41 PM IST
सार
हालांकि हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि याचिकाकर्ता अपनी सेवाओं को नियत तिथि से अंशकालिक से दैनिक वेतन भोगी में बदलने के कारण किसी भी वित्तीय लाभ के हकदार नहीं होंगे। लेकिन नियत तारीख से उनकी वरिष्ठता को नियमितीकरण के उद्देश्य से माना जाएगा।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने 10 वर्षों तक बतौर अंशकालिक कार्यकाल पूरा करने वाले याचिकाकर्ता पंचायत चौकीदारों को नियत तिथि से दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों में परिवर्तित करने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट ने सरकार को आठ सप्ताह का समय दिया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि याचिकाकर्ता अपनी सेवाओं को नियत तारीख से अंशकालिक से दैनिक वेतन भोगी में बदलने के कारण किसी भी वित्तीय लाभ के हकदार नहीं होंगे।
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नियत तारीख से उनकी वरिष्ठता को नियमितीकरण के उद्देश्य से माना जाएगा। इसका बाद में दावा कर सकते हैं। सरकार की दलील थी कि पार्ट टाइम चौकीदारों को संबंधित पंचायत के कर्मचारी होने के कारण पंचायत को दिए जाने वाले सहायता अनुदान से मानदेय दिया जा रहा है। कोर्ट ने पाया कि प्रतिवादी सरकार द्वारा जारी सहायता अनुदान से पारिश्रमिक का 90 फीसदी भुगतान किया जाता है।
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अंशकालिक श्रमिकों की सभी नियुक्तियां सक्षम प्राधिकारी की पूर्व सहमति और अनुमोदन से की जाती हैं। इसलिए यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता है कि उक्त पदों पर कार्यरत व्यक्ति पंचायत के कर्मचारी हैं। सरकार ने 31 मार्च, 2009 तक 10 साल निरंतर सेवा पूरी करने वाले शिक्षा और आयुर्वेद विभाग को छोड़कर सभी अंशकालिक चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की सेवाएं दैनिक भोगी में परिवर्तित करने का निर्णय लिया है।
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मामले के अनुसार पंचायत समितियों और जिला परिषदों में अंशकालिक आधार पर कार्यरत पंचायत चौकीदारों और चपरासी को 13 अक्तूबर 2009 और 11 सितंबर 2018 को लिए गए नीतिगत निर्णयों का लाभ दिया गया। याचिकाकर्ताओं इस आधार पर छोड़ दिया कि उनको सरकार ने नियुक्त नहीं किया था। न ही उन्हें सरकार से वेतन दिया जाता है।
न्यायाधीश संदीप शर्मा ने कहा कि पूर्वोक्त अनुमति केवल उन्हीं जिला परिषदों और पंचायत समितियों को दी गई है, जिनके पास अपने स्वयं के संसाधनों से सक्षम प्राधिकारी के पूर्व अनुमोदन से उनकी ओर से नियुक्त कर्मचारियों के वेतन और वेतन के खर्च को पूरा करने के लिए पर्याप्त आय है। कार्यालय आदेश 11 सितंबर 2018 का अध्ययन करने के बाद न्यायालय ने पाया कि उत्तर दाताओं ने कार्यालय आदेश जारी करके वर्ग के भीतर वर्ग बनाने का प्रयास किया है, जो न्यायोचित नहीं है।