हाईकोर्ट ने 1900 पदों पर शिक्षक भर्ती को लेकर विभाग को दिए ये आदेश
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प्रदेश के स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के मामले में हाईकोर्ट ने अधीनस्थ सेवाएं चयन आयोग द्वारा हाल ही में भरे जाने वाले 1900 शिक्षकों के पदों के बारे में स्पष्ट विवरण देने के आदेश जारी किए हैं।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान यह आदेश पारित किए। मामले पर वीरवार को दोबारा सुनवाई होगी।
पिछली सुनवाई के दौरान प्रदेश हाईकोर्ट के समक्ष कोर्ट मित्र ने बताया था कि शिक्षा सचिव द्वारा दायर शपथ पत्र शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के मुताबिक नहीं है।
शिक्षकों की तैनाती विद्यार्थियों की संख्या के हिसाब से होगी
विशेषता जब शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार यह स्पष्ट किया गया है कि शिक्षकों की तैनाती विद्यार्थियों की संख्या के हिसाब से होगी। राज्य सरकार ने हालांकि 9 जुलाई को 1331 व 1036 शिक्षकों के पदों को भरने के लिए कदम उठाए हैं।
जबकि उनके मुताबिक 14354 पद अभी तक रिक्त पड़े हैं। कोर्ट मित्र ने न्यायालय को यह भी बताया था कि शिक्षा सचिव न्यायालय को रिक्त पदों के बारे में स्पष्ट ब्यौरा देने में नाकाम रहे हैं। उनके अनुसार शिक्षा विभाग की ओर से जो कदम उठाए गए हैं वह पर्याप्त नहीं है।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप उठाए गए कदम नाकाफी है। पिछली सुनवाई के दौरान सचिव शिक्षा को शपथ पत्र के माध्यम से रिक्त पदों का स्पष्ट ब्यौरा देने को कहा था।
इसके अलावा हाईकोर्ट ने कोर्ट मित्र द्वारा न्यायालय के समक्ष रखी दलीलों व कोर्ट में दायर नोट के दृष्टिगत शिक्षा सचिव को शपथ पत्र दाखिल करने के लिए बुधवार तक का समय दिया था लेकिन उन्होंने इस बाबत अतिरिक्त समय देने के लिए हाईकोर्ट के समक्ष आवेदन दाखिल किया।