पांच बीघा जमीन से पेड़ न काटने पर रोक से हाईकोर्ट का इंकार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रदेश उच्च न्यायालय ने चैथला में वन भूमि पर सेब के बगीचे विकसित करने के मामले में प्रतिवादियों की इस मांग को नामंजूर कर दिया। इसके तहत उनके द्वारा काबिज 5 बीघा तक सरकारी जमीन से सेब के पेड़ न काटे जाने की गुहार लगाई थी।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने वर्ष 2002 में अवैध कब्जों को नियमित करने के लिए बनाए ड्राफ्ट रूल्स की व्याख्या करने के बाद यह आदेश पारित किए हैं।
हाईकोर्ट ने कहा कि ड्राफ्ट रूल्स में बनाए गए प्रावधान के मुताबिक प्रतिवादी राज्य सरकार को 5 बीघा जमीन को उनके नाम हस्तांतरित करने के लिए आवेदन कर सकते हैं, जिसमें कि राज्य सरकार द्वारा केवल मेरिट के आधार पर ही फैसला करना है।
प्रतिवादियों के आवेदन को कानूनी तौर पर ठीक नहीं
न्यायालय ने प्रतिवादियों के आवेदन को कानूनी तौर पर ठीक नहीं पाया। न्यायालय के अनुसार ड्राफ्ट रूल्स के तहत उनका हक जायज नहीं है। दूसरे वह 5 बीघा जमीन पर काबिज हैं, जबकि उनकी अपनी जमीन 5 बीघा से कहीं अधिक है।इसके अलावा नियमों के मुताबिक राजस्व नियमों में बनाए अन्य प्रावधानों का भी अवलोकन किया जाना जरूरी है।
न्यायालय ने पाया कि 5 बीघा तक अधिकतम सरकारी जमीन पर कब्जा किया जा सकता है। लेकिन यह जमीन अपनी निजी जमीन को मिलाकर 10 बीघा से अधिक नहीं होनी चाहिए। अगर होगी तो अतिरिक्त भूमि छोड़नी पड़ेगी। यानी जिसके पास पहले ही अपनी जमीन 10 बीघा से अधिक है, वह रूल्स के मुताबिक सरकारी जमीन को अपने कब्जे में हस्तांतरित करने का हक नहीं रखता है।