सोलन-ढली फोरलेन प्रभावितों को तुरंत मुआवजा दे प्रशासन
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प्रदेश हाईकोर्ट ने सोलन-शिमला-ढली फोरलेन मामले में भू अधिग्रहण अधिकारी को अधिग्रहित भूमि का मुआवजा प्रभावितों को देने में तत्परता दिखाते हुए आवश्यक कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं।
कोर्ट ने यह आदेश इसलिए दिए हैं ताकि अधिग्रहित भूमि का वास्तविक कब्जा एनएचएआई की ओर से लिया जा सके। इस मामले की सुनवाई के दौरान एनएचएआई की ओर से कोर्ट को बताया गया कि करीब 89 करोड़ रुपये की राशि भू अधिग्रहण अधिकारी के पास जमा करवा दी गई है।
एनएचएआई ने बताया कि शिमला में इस फोरलेन के लिए 84 हेक्टेयर के करीब भूमि का अधिग्रहण किया गया है। इसमें 81 हेक्टेयर भूमि का वास्तविक कब्जा भी ले लिया गया है।
शिमला जिले में इस फोरलेन प्रोजेक्ट के में 250 ऐसे निर्माण पाए गए हैं, जिन्हें तोड़ना पड़ेगा। इनमें से 218 निर्माणों के लिए मुआवजा राशि घोषित कर दी गई है और मुआवजा जमा करवा दिया गया है। अभी तक केवल 123 निर्माणों को तोड़ा गया है।
2020 तक पूरा होगा प्रोजेक्ट : प्रोजेक्ट संचालक
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने जिला प्रशासन शिमला को आदेश दिए कि वे एनएचएआई की उक्त निर्माणों को हटाने में हर तरह से मदद करे।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अभी केवल उन्हीं निर्माणों को तोड़ा जाए, जिनके मुआवजे प्रभावितों को दे दिए गए हैं। जिन निर्माणों के मुआवजा संबंधित मामले लंबित हैं उन निर्माणों को न छेड़ा जाए।
प्रोजेक्ट संचालक की ओर से बताया गया कि फोरलेन का कार्य शुरू कर दिया गया है और तय समय के भीतर यानी 27 सितंबर 2020 तक यह प्रोजेक्ट पूरा कर लिया जाएगा।
कोर्ट ने अपने आदेशों में स्पष्ट किया कि इस प्रोजेक्ट पेड़ों को काटने के लिए हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी आदेशों का पालन किया जाए और उपरोक्त आदेशों की अनुपालना रिपोर्ट 24 जून तक कोर्ट के समक्ष पेश करे।