कुओं का पानी दूषित होने पर सीएस और सोलन के उपायुक्त को हाईकोर्ट का नोटिस
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि मलीमठ और न्यायमूर्ति ज्योत्सना रेवाल दुआ की खंडपीठ ने ये आदेश जिला सोलन के ग्राम माजरा के जोगिंदर सिंह की ओर से मुख्य न्यायाधीश को लिखे एक पत्र पर जनहित याचिका के रूप में न्यायालय द्वारा स्वत: संज्ञान लेकर पारित किए।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने नालागढ़ के ग्राम माजरा में स्थापित शिवालिक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्र के रसायनिक अपशिष्ट के कारण आसपास के क्षेत्रों के कुओं और बोरवेलों के पानी के दूषित होने के मामले में मुख्य सचिव, सदस्य सचिव प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और उपायुक्त सोलन को नोटिस जारी किया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि मलीमठ और न्यायमूर्ति ज्योत्सना रेवाल दुआ की खंडपीठ ने ये आदेश जिला सोलन के ग्राम माजरा के जोगिंदर सिंह की ओर से मुख्य न्यायाधीश को लिखे एक पत्र पर जनहित याचिका के रूप में न्यायालय द्वारा स्वत: संज्ञान लेकर पारित किए। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि शिवालिक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट गांव मजरा में पंद्रह साल पहले पंचायत से एनओसी लेने के बाद यह गुमराह कर स्थापित किया गया था कि वहां स्थापित करने के लिए एक पर्यावरण परियोजना जा रही है लेकिन बाद में जब शिवालिक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट बनाया गया तो ग्रामीणों को पता चला कि हिमाचल प्रदेश के विभिन्न कारखानों के खतरनाक रासायनिक ठोस जहरीले कचरे को इस ठोस अपशिष्ट संयंत्र में लाया जाना था और इस ठोस अपशिष्ट के उपचार की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि उक्त संयंत्र की ओर से ठोस अपशिष्ट को बिना उचित उपचार के मिट्टी से ढककर पिछले 15 वर्षों से जमीन में डाला जा रहा है। समय बीतने के साथ पंचायत मजरा और आसपास के गांवों के प्राकृतिक स्रोतों, कुओं और बोरवेलों का पानी इस संयंत्र के रासायनिक रूप से दूषित पानी के जमीन में रिसने से जहरीला हो गया है और इसके परिणामस्वरूप पानी से दुर्गंध आ रही है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि ग्रामीणों ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ.साथ कई अन्य उच्च अधिकारियों को भी शिकायत की लेकिन आज तक ठोस अपशिष्ट कंपनी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है एवं जहरीले पानी की वजह से उनके मवेशियों की मौत हो गई है और यहां तक कि ग्रामीण भी कई गंभीर बीमारियों के शिकार हो गए हैं। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से आग्रह किया है कि शिवालिक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं। मामले पर दो सप्ताह के बाद सुनवाई होगी।
बीडीसी की शेल्फ में फेरबदल करने पर मुख्य सचिव समेत कई अधिकारियों को नोटिस
प्रदेश हाईकोर्ट ने बीडीसी की बजट शेल्फ को 15वें वित्तायोग के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते हुए कथित फेरबदल करने के मामले में प्रदेश के मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त, प्रधान सचिव पंचायती राज, उपायुक्त कुल्लू, खंड विकास अधिकारी आनी एवं खंड विकास कार्यालय आनी के पंचायत निरीक्षक को नोटिस जारी किया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि मलीमठ और न्यायमूर्ति ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने ब्लॉक के पांच सदस्यों की ओर से मुख्य न्यायाधीश को लिखे पत्र पर स्वत: संज्ञान लेने वाली याचिका पर ये आदेश पारित किए। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि 15वें वित्त आयोग की ओर से खंड विकास समिति के सभी सदस्यों के लिए बजट उपलब्ध कराया गया था और उन्होंने इस संबंध में योजना का शेल्फ तैयार कर अनुमोदन के लिए पंचायत निरीक्षक के पास भेजा। हालांकि, बीडीसी के अध्यक्ष ने पंचायत निरीक्षक के साथ मिलकर पूरे बजट शेल्फ में फेरबदल किया, जो याचिकाकर्ताओं की ओर से तैयार किया गया था और याचिकाकर्ताओं का हिस्सा अन्य सदस्यों को अपने स्तर पर आवंटित किया गया था।
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि जब इस बाबत स्पष्टीकरण जानना चाहा तो अध्यक्ष कोई प्रशंसनीय स्पष्टीकरण नहीं दे सका, सिवाय इसके कि सदन के बहुमत द्वारा निर्णय लिया गया था। याचिकाकर्ताओं ने आगे आरोप लगाया है कि 15वें वित्त आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार बजट को सभी जन प्रतिनिधियों के बीच समान रूप से आवंटित किया जाना है और सदन के अध्यक्ष या बहुमत के निर्णय से कोई फेरबदल नहीं किया जा सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बीडीसी के अध्यक्ष की ओर से उनके बजट में कटौती करके और उसे अपनी पसंद के सदस्यों को स्थानांतरित करके दिशा-निर्देशों का खुले तौर पर उल्लंघन किया गया है। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से आग्रह किया है कि अध्यक्ष एवं पंचायत निरीक्षक की ओर से दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करने तथा बजट शेल्फ में फेरबदल करने का एकतरफा निर्णय लेने पर उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई का आदेश दिया जाए। मामले पर दो सप्ताह बाद सुनवाई होगी।