करुणामूलक नौकरी न देने पर बुरे फंसे प्रधान सचिव शिक्षा
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अदालती आदेशों की अनुपालना न किए जाने पर हाईकोर्ट ने प्रधान सचिव (शिक्षा) पीसी धीमान को अदालत के आदेशों की अवमानना का दोषी पाते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अदालत ने प्रधान सचिव से पूछा है कि क्यों न उसे अदालत के आदेशों की अवमानना करने के लिए दंडित किया जाए।
प्रधान सचिव को आगामी 9 जुलाई को अदालत के समक्ष पेश होने के आदेश दिए गए हैं। अवमानना याचिका में दिए तथ्यों के अनुसार प्रार्थी के पिता शिक्षा विभाग में शारीरिक शिक्षक के पद पर कार्यरत था। 13 सितंबर 2006 को सेवा काल के दौरान उसकी मृत्यु हो गई थी। प्रार्थी ने करुणामूलक आधार पर नौकरी दिए जाने के लिए आवेदन किया था।
नहीं दी करुणामूलक नौकरी
शिक्षा विभाग ने इसे यह कहकर खारिज कर दिया था कि प्रार्थी की वार्षिक आय करुणामूलक आधार पर नौकरी दिए जाने के लिए रखे गए मापदंडों से अधिक है। प्रार्थी ने इसे हाई कोर्ट के समक्ष चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने अपने आदेशों में स्पष्ट किया था कि प्रार्थी के पिता की मृत्यु के बाद मिलने वाले सभी सेवा लाभों को वार्षिक आय में नहीं गिना जा सकता।
अदालत ने प्रार्थी की याचिका को स्वीकारते हुए शिक्षा विभाग को आदेश दिए थे कि प्रार्थी के आवेदन पर दोबारा विचार किया जाए, लेकिन प्रधान सचिव शिक्षा ने प्रार्थी के आवेदन को दोबारा से इसी आधार पर खारिज कर दिया। मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश धर्मचंद चौधरी की खंडपीठ ने प्रधान सचिव शिक्षा को अदालत के आदेशों की अवमानना का दोषी मानते हुए आगामी 9 जुलाई को अदालत के समक्ष पेश होने के आदेश दिए हैं।