फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   high court double bench decision regarding minor rape case

रेप केस में सजायाफ्ता पिता बेकसूर, रिहा करो: हाईकोर्ट

Sun, 24 Sep 2017 12:50 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Sun, 24 Sep 2017 12:50 PM IST
विज्ञापन
high court double bench decision regarding minor rape case

अपनी ही 2 वर्षीय बेटी से दुराचार मामले में दस साल की सजा काट रहे पिता को हाईकोर्ट ने बेकसूर करार देते हुए निचली अदालत के फैसले को पलट दिया। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष ने मामले से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को जांचे परखे बिना ही एक बेकसूर को दोषी करार देकर सजा दिलवा दी। 

विज्ञापन


न्यायाधीश धर्म चंद चौधरी व न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर की डबल बेंच ने स्पेशल जज चंबा के 12 अप्रैल 2016 के फैसले को खारिज करते हुए आरोपी पिता को तत्काल रिहा करने के आदेश जारी किए।
विज्ञापन


खंडपीठ ने यह भी कहा कि भविष्य में इस तरह के मामलों में पुलिस, अभियोजन पक्ष और फैसला देने वाले जज कानून के सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए अपने कर्तव्य का पालन करें। मामले की शिकायतकर्ता ने अपने पति पर अपनी 2 वर्ष से भी कम उम्र की बच्ची से दुराचार करने का आरोप लगाते हुए डीसी चंबा को पत्र लिखा था।
विज्ञापन
विज्ञापन


एडीएम चंबा ने इस पत्र को चंबा पुलिस थाने को भेजा जहां 10 फरवरी 2015 को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 व पॉस्को अधिनियम की धारा 4 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। 

पुलिस ने मामले की जांच के बाद निचली अदालत में चालान पेश कर दिया। अभियोजन पक्ष ने आरोपी को दोषी साबित कर दिया। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अदालत ने जो पाया है वह शिकायतकर्ता और आरोपी की आपसी रंजिश से उपजी साजिश साबित हुई है। अदालत ने कहा, पुलिस ने इस मामले की तह तक जाने की जहमत भी नहीं उठाई। 

जांच अधिकारी ने शिकायतकर्ता से न तो यह पूछा कि वह अपने पति से अलग क्यों रह रही थी और न ही यह जाना कि शिकायतकर्ता अपनी मां के साथ कितने समय से रह रही थी। जांच अधिकारी ने यह जांचना भी जरूरी नहीं समझा कि शिकायतकर्ता ने आरोपी पति के पिता व भाई के खिलाफ  यौन शोषण की जो शिकायतें की हैं, वे सच हैं या फिर झूठ। 

वास्तव में जांचकर्ता ने केवल शिकायतकर्ता की बातों पर ही विश्वास किया। हाईकोर्ट ने पाया कि निचली अदालत ने भी इन महत्वपूर्ण सवालों को नजरअंदाज करते एक ऐसे मामले में बेकसूर को सजा सुना दी जिसमें कोई साक्ष्य था ही नहीं।

हाईकोर्ट पहुंचा 1300 कंडक्टर भर्ती का मामला

high court double bench decision regarding minor rape case

हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) में हो रही 1300 कंडक्टर भर्ती का मामला हिमाचल हाईकोर्ट पहुंच गया है। कौशल विकास भत्ता के तहत काम कर रहे अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट से गुहार लगाई है कि इस भर्ती प्रक्रिया में उन्हें नियुक्ति दी जाए। वे कंडक्टर की ट्रेनिंग के बाद स्थायी नियुक्ति के हकदार हैं।

सुनवाई के बाद न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सीबी बारोवालिया की खंडपीठ ने एचआरटीसी से जवाब तलब करते हुए भर्ती प्रक्रिया को जारी रखने के आदेश दिए।

उन्होंने कहा कि इस भर्ती प्रक्रिया के तहत दी गई नियुक्ति कोर्ट के अंतरिम आदेश पर निर्भर करेगी। मामले पर सुनवाई 11 अक्तूबर को होगी। एचआरटीसी में लगभग 2000 अभ्यर्थी कौशल विकास भत्ता के तहत वर्ष 2015 से सेवाएं दे रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed