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Shimla News: धरोहर रिपन अस्पताल बदहाल, संरक्षण के लिए बजट की दरकार

Wed, 29 Jul 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 29 Jul 2026 11:59 PM IST
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Heritage Ripon Hospital in a dilapidated condition, needs budget for its preservation
धरोहरों के हाल...7
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अंग्रेजी हुकूमत के समय 141 साल पहले हुआ था अस्पताल का निर्माण, सड़ रही दरवाजों की लकड़ी
भवन की बाहरी दीवारें भी हो रही हैं खराब
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। अंग्रेजी हुकूमत के समय शिमला में बना ऐतिहासिक रिपन अस्पताल 141 वर्षों से मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहा है। इस धरोहर को संरक्षित करने के लिए सरकारें अब तक विशेष बजट का प्रावधान नहीं कर पाई हैं।
भवन की बाहरी दीवारें खराब हो रही हैं और खिड़कियों तथा दरवाजों की लकड़ी भी धीरे-धीरे सड़ रही है। हालांकि, छत बदलने और रंग-रोगन जैसे कार्य समय-समय पर होते रहे हैं। राजधानी शिमला के ऐतिहासिक दीन दयाल उपाध्याय (डीडीयू) क्षेत्रीय अस्पताल को ही रिपन अस्पताल के नाम से जाना जाता है। इस अस्पताल की शुरुआत ब्रिटिश अधिकारियों और शिमला के आम नागरिकों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से की थी। आज यह प्रदेश के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में शामिल है।
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रिपन अस्पताल का वास्तुकला शैली में निर्मित ऐतिहासिक लकड़ी का भवन आज भी अपने मूल स्वरूप में खड़ा है। सरकारी अस्पताल बनाए जाने के बाद पुराने भवन में समय-समय पर मरम्मत कार्य जरूर हुए हैं, लेकिन जिस तरह एक ऐतिहासिक धरोहर भवन का संरक्षण किया जाना चाहिए। भवन का मूल ढांचा आज भी कायम है। बाहर लॉन और फव्वारा है लेकिन अंदर जरूरत के अनुसार कमरों में विभाजन कर और रंग-रोगन करके इसे आधुनिक स्वरूप दे दिया है। गेयटी थियेटर और टाउन हॉल की तर्ज पर इस ऐतिहासिक धरोहर को भी मूल स्वरूप में संरक्षित करने और इसकी हालत सुधारने के लिए बड़े बजट की आवश्यकता है। धरोहर भवन होने के कारण ही इसके मुख्य हिस्से को गिराकर नया भवन नहीं बनाया गया है।
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1882 में हुआ था अस्पताल का निर्माण

रिपन अस्पताल की नींव ब्रिटिश शासनकाल में रखी गई थी। वर्ष 1882 में भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड रिपन ने इस अस्पताल की आधारशिला रखी थी। इन्हीं के नाम पर इसका नाम रिपन अस्पताल रखा गया। 14 मई 1885 को तत्कालीन वायसराय लॉर्ड डफरिन ने अस्पताल का औपचारिक उद्घाटन किया था। भवन निर्माण में अधिकांश राशि दान और जनसहयोग से एकत्र की थी।



स्वतंत्रता के बाद बदला अस्पताल का स्वरूप
देश की आजादी के बाद भी अस्पताल की ऐतिहासिक भूमिका बनी रही। सरकार ने इसका नाम बदलकर दीनदयाल उपाध्याय क्षेत्रीय अस्पताल कर दिया। बढ़ती आबादी और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की आवश्यकता को देखते हुए वर्ष 2017 में लगभग 35 करोड़ रुपये की लागत से इसके साथ एक भव्य सात मंजिला भवन का निर्माण किया गया। पुराने और नए दोनों भवनों को मिलाकर अब अस्पताल में 300 बिस्तरों की सुविधा उपलब्ध है। अस्पताल में सीटी स्कैन, ब्लड बैंक, केंद्रीय हीटिंग सिस्टम, आधुनिक पार्किंग और अत्याधुनिक ओपीडी जैसी सुविधाएं मौजूद हैं। इसके अलावा मेडिसिन, सर्जरी, हड्डी रोग, स्त्री एवं प्रसूति रोग, बाल रोग, आपातकालीन और रेडियोलॉजी विभागों के विशेषज्ञ चिकित्सक भी यहां सेवाएं दे रहे हैं।
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