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शिमला: विनियामक आयोग के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देगा हेरिटेज इंस्टीट्यूट संजौली
Thu, 07 Apr 2022 01:52 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Thu, 07 Apr 2022 01:52 PM IST
सार
इंस्टीट्यूट के चेयरमैन डीके सिंह ने बताया कि मदुरै कामराज विश्वविद्यालय तमिलनाडु सरकार की एक सरकारी इकाई है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से अनुमोदित और डिस्टेंस एजूकेशन काउंसिल नई दिल्ली से भी प्रमाणित है। इससे संबंधित सभी साक्ष्य, शुल्क आदेश और एमओयू आयोग को प्रस्तुत किए गए हैं। आयोग की ओर से दिए गए फैसले के खिलाफ अब हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
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हेरिटेज इंस्टीट्यूट ऑफ होटल एंड टूरिज्म संजौली
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
निजी शिक्षण संस्थान विनियामक आयोग के फैसले को हेरिटेज इंस्टीट्यूट ऑफ होटल एंड टूरिज्म संजौली हाईकोर्ट में चुनौती देगा। आयोग की अदालत ने मंगलवार को संबंधित संस्थान में कई कमियां पाए जाने पर इसे बंद करने का फैसला सुनाया है। हेरिटेज इंस्टीट्यूट ऑफ होटल एंड टूरिज्म संजौली के चेयरमैन डीके सिंह ने बताया कि उनके संस्थान ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय और मदुरै कामराज विश्वविद्यालय से संबद्धता के साथ बीएचएम और बीएससी एचएम-सीएस की नियमित पाठ्यक्रम में सफलतापूर्वक शिक्षा देते हुए विद्यार्थियों का शत-प्रतिशत नियोजन किया है।
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पूर्व में कुछ शिकायतें निजी शिक्षण संस्थान विनियामक आयोग को मिली थीं। आयोग ने एक निरीक्षण कमेटी का गठन किया था। जांच रिपोर्ट में किसी भी प्रकार की अनियमितता नहीं पाई गई थी। संस्थान ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय को फीस ढांचा मंजूर करने के संबंध में पत्र लिखा था। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने पत्र को अस्वीकार कर कहा था कि वह किसी कॉलेज के फीस स्ट्रक्चर को मंजूरी देने का अधिकार नहीं रखते हैं। फीस संबंधित स्वीकृति के लिए इसे डीन ऑफ कॉलेज विकास परिषद एचपीयू को भेजा। अभी वहां से कोई जवाब नहीं आया है। इस संबंध में संस्थान ने उच्च न्यायालय में अपील भी दाखिल की है।
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चेयरमैन डीके सिंह ने बताया कि मदुरै कामराज विश्वविद्यालय तमिलनाडु सरकार की एक सरकारी इकाई है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से अनुमोदित और डिस्टेंस एजूकेशन काउंसिल नई दिल्ली से भी प्रमाणित है। इससे संबंधित सभी साक्ष्य, शुल्क आदेश और एमओयू आयोग को प्रस्तुत किए गए हैं। मंगलवार को आयोग की ओर से दिए गए फैसले के खिलाफ अब हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
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