Himachal High Court: बस किराये में 50 फीसदी छूट देने और अवैध भवनों के नियमितीकरण मामले की सुनवाई टली
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में महिलाओं के लिए बस किराये में 50 फीसदी छूट देने और अवैध भवनों के नियमितीकरण को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई टल गई है।
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महिलाओं के लिए बस किराये में 50 फीसदी छूट देने के मामले की सुनवाई आठ अगस्त को निर्धारित की गई है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान व न्यायाधीश सीबी बारोवालिया की खंडपीठ के समक्ष इस मामले को सूचीबद्ध किया गया था। परिवहन सचिव और निदेशक ने इस मामले में शपथपत्र दायर किया है। अदालत को अवगत कराया गया कि महिलाओं को बस किराये में छूट देने का निर्णय कैबिनेट का है। महिलाओं को बस किराये में छूट देने के लिए हिमाचल पथ परिवहन निगम की ओर से राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा गया था। कैबिनेट की मंजूरी के बाद राज्य सरकार ने महिलाओं को बस किराये में छूट देने का निर्णय लिया है। निजी बस ऑपरेटर संघ ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार की ओर से 7 जून 2022 को जारी की गई अधिसूचना कानून के सिद्धांतों के विपरीत है। महिलाओं व पुरुषों के लिए बराबर किराया होना चाहिए। निगम की ओर से ग्रीन कार्ड जारी करने को भी प्रदेश उच्च न्यायालय के समक्ष चुनौती दी गई है। दलील दी गई है कि पथ परिवहन निगम द्वारा ग्रीन कार्ड जैसी सुविधाएं देने की वजह से उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है।
अवैध भवनों के नियमितीकरण मामले की सुनवाई टली
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में अवैध भवनों के नियमितीकरण को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई टल गई है। मुख्य न्यायाधीश एए सैयद और न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ के समक्ष मामले को सूचीबद्ध किया गया था। इस मामले में न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ ने अपने आप को सुनवाई से अलग किया है। अब इस मामले पर सुनवाई उस खंडपीठ के समक्ष होगी जिसमें न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ न हो। याचिकाकर्ता हिमांशु जिस्टू ने नगर नियोजन नियमों में किए गए संशोधन को चुनौती दी है। आरोप लगाया है कि यह संशोधन सर्वोच्च न्यायालय और प्रदेश हाईकोर्ट की ओर से समय-समय पर पारित निर्णयों के विपरीत है। याचिकाकर्ता ने हिमाचल प्रदेश टाउन एंड कंट्री प्लानिंग नियम, 2014 के नियम 35 को रद्द करने की गुहार लगाई है। याचिकाकर्ता ने अदालत से गुहार लगाई है कि अवैध निर्माण को नियमित न किया जाए। इस संशोधन के बाद अवैध निर्माण को नियमित करने के लिए हिमाचल प्रदेश टाउन एंड कंट्री के पास आवेदन आए हैं।
मंडी के द्रंग और चौंतड़ा के लिए उठाऊ जल स्कीम के मामले पर हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान
मंडी जिला के द्रंग और चौंतड़ा के लिए उठाऊ जल स्कीम के मामले पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है। अदालत ने जल शक्ति विभाग के सचिव को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब तलब किया है। मुख्य न्यायाधीश एए सैयद और न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। वर्ष 2019 में राज्य सरकार ने जोगिंद्रनगर क्षेत्र के द्रंग और चौंतड़ा के लिए उठाऊ जल स्कीम स्वीकृत की थी। इसके तहत शुकर नदी से पानी उठाया जाना प्रस्तावित था। स्थानीय निवासी मनोहर सिंह ने जनहित में याचिका दायर की है।
याचिका के माध्यम से अदालत को बताया गया कि जिस स्थान से पानी उठाए जाने का प्रस्ताव है, वहां से क्षेत्र के लगभग बीस हजार बीघा जमीन की सिंचाई की जाती है। साथ ही इस स्थान से लगभग 50 मीटर पर करीब पांच हजार मछलियां हैं। यदि प्रस्तावित स्थान से पानी उठाया जाता है तो इन मछलियों को नुकसान पहुंचेगा। इसके अलावा क्षेत्र के कृषकों को जमीन सींचने के लिए पानी कम पड़ जाएगा। याचिकाकर्ता ने अदालत से गुहार लगाई है कि द्रंग और चौंतड़ा के लिए उठाऊ जल स्कीम के फैसले को रद्द किया जाए। याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की है कि द्रंग और चौंतड़ा के लिए पांच किलोमीटर दूर शुकर नदी से ही पानी उठाया जाए।