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Shimla News: डीडीयू में दवाइयां खरीदने के बाद नहीं मिल रहे बिल
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क्लैम करने में मरीजों को पेश आ रही परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। डीडीयू अस्पताल के परिसर स्थित सरकारी दवा दुकान से हजारों रुपये की महंगी दवाइयां खरीदने के बाद मरीजों को बिल नहीं दिया जा रहा है। बिल न देने के कारण अब सैकड़ों मरीजों को रिंबर्समेंट क्लैम करना मुश्किल हो रहा है। मरीज बार-बार दवा की दुकान के चक्कर काट रहे है। इसके बावजूद समाधान नहीं हो पा रहा है।
दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में हिमाचल प्रदेश राज्य नागरिक आपूर्ति सीमित सस्ती दवाइयों की सरकारी दुकान है। रोजाना सैकड़ों मरीज दवाइयां लेने के लिए आते हैं। यहां पर तैनात कर्मचारी मरीजों को हजारों रुपये लेकर दवाइयां तो उपलब्ध करवा रहे हैं, लेकिन बिल नहीं दिए जा रहे हैं। लिहाजा जब मरीज बिल के बारे में पूछ रहे हैं, तो उन्हें दुकान पर मौजूद फार्मासिस्टों द्वारा बिल अभी नहीं देने की बात की जा रही है। स्पष्ट नहीं किया जा रहा है कि आखिर बिल कब दिए जाएंगे? इस वजह से सैकड़ों मरीज दुकान के चक्कर काटने को मजबूर हैं। तीमारदार नवीन और रमेश का कहना है कि राज्य सरकार इस ओर ध्यान दे, जिससे कि यह परेशानी हल हो सके।
इनसेट
प्रिंटर नहीं है ठीक
दवा की दुकान में प्रिंटर के जरिये बिल निकलता है, लेकिन प्रिंटर काफी समय से खराब है। ऐसे में सवाल उठता है कि लाखों की कमाई करने वाली इस दवा की दुकानों में क्या हजारों रुपये का प्रिंटर नहीं खरीदा जा सकता? जिससे मरीजों की समस्या का समाधान हो सके।
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संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। डीडीयू अस्पताल के परिसर स्थित सरकारी दवा दुकान से हजारों रुपये की महंगी दवाइयां खरीदने के बाद मरीजों को बिल नहीं दिया जा रहा है। बिल न देने के कारण अब सैकड़ों मरीजों को रिंबर्समेंट क्लैम करना मुश्किल हो रहा है। मरीज बार-बार दवा की दुकान के चक्कर काट रहे है। इसके बावजूद समाधान नहीं हो पा रहा है।
दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में हिमाचल प्रदेश राज्य नागरिक आपूर्ति सीमित सस्ती दवाइयों की सरकारी दुकान है। रोजाना सैकड़ों मरीज दवाइयां लेने के लिए आते हैं। यहां पर तैनात कर्मचारी मरीजों को हजारों रुपये लेकर दवाइयां तो उपलब्ध करवा रहे हैं, लेकिन बिल नहीं दिए जा रहे हैं। लिहाजा जब मरीज बिल के बारे में पूछ रहे हैं, तो उन्हें दुकान पर मौजूद फार्मासिस्टों द्वारा बिल अभी नहीं देने की बात की जा रही है। स्पष्ट नहीं किया जा रहा है कि आखिर बिल कब दिए जाएंगे? इस वजह से सैकड़ों मरीज दुकान के चक्कर काटने को मजबूर हैं। तीमारदार नवीन और रमेश का कहना है कि राज्य सरकार इस ओर ध्यान दे, जिससे कि यह परेशानी हल हो सके।
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प्रिंटर नहीं है ठीक
दवा की दुकान में प्रिंटर के जरिये बिल निकलता है, लेकिन प्रिंटर काफी समय से खराब है। ऐसे में सवाल उठता है कि लाखों की कमाई करने वाली इस दवा की दुकानों में क्या हजारों रुपये का प्रिंटर नहीं खरीदा जा सकता? जिससे मरीजों की समस्या का समाधान हो सके।
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