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Shimla News: विश्व टीबी दिवस विशेष, जिला शिमला में 250 नए टीबी रोगियों की पहचान
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स्वास्थ्य विभाग ने 60 साल से अधिक आयु के हाई रिस्क वाले मरीजों की थी स्क्रीनिंग
टीबी पॉजिटिव आने के बाद अब विभाग ने शुरू किया इलाज
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिला शिमला में 250 नए टीबी रोगियों की पहचान हुई है। जिला स्वास्थ्य विभाग ने 60 साल से अधिक आयु वाले हाई रिस्क लोगों की घर-घर जाकर स्क्रीनिंग की गई। इस दौरान यह नया आंकड़ा सामने आया है। वहीं स्वास्थ्य विभाग ने सभी रोगियों को दवाइयां देकर इलाज शुरू कर दिया है। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. विनीत लखनपाल ने इसकी जानकारी दी है।
जिला स्वास्थ्य विभाग ने टीबी की बीमारी को लेकर सौ दिनों तक अभियान चलाया। अभियान में शुगर व बीपी की जांच करवाने के लिए आए हाई रिस्क वाले लोगों की टीबी की स्क्रीनिंग करवाई गई। इसमें कैंसर, डायलिसिस के अलावा स्मोकर की जांच भी की गई। कुल 95 हजार लोगों की जांच का लक्ष्य रखा गया था। कुछ मरीजों में लक्षण थे, जबकि कुछ को लक्षण नहीं थे। लिहाजा जांच के बाद पॉजिटिव आए सभी रोगियों को टीबी की छह से नौ महीने की रुटीन दवाएं देकर इलाज शुरू कर दिया है। वहीं स्वास्थ्य विभाग की टीमें इन पर अपनी निगरानी रखे हुए हैं। बता दें कि जिला में तीस हजार रोगियों के एक्सरे भी किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है इन रोगियों की पहचान होने के बाद इनसे अन्य को बीमारी फैलने का खतरा भी कम हुआ है।
टीबी की बीमारी के कई लक्षण हो सकते हैं। बलगम वाली खांसी, बलगम में खून आना, बुखार, सीने में दर्द, शरीर के किसी हिस्से में गांठ होना, हाल ही में हुए शारीरिक बदलाव, वजन में गिरावट, थकान, पुरानी बीमारी और रात में पसीना आना भी बीमारी के लक्षण हो सकते हैं।
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इनसेट
इस तरह बचें
टीबी की शीघ्र पहचान करवाएं। समय पर संपूर्ण इलाज मिलने से बीमारी से बचा जा सकता हैं। इसके अलावा पौष्टिक आहार खाएं। वहीं जिन समूह को टीबी का खतरा हैं, उनकी देखभाल करें।
अहम इनसेट
700 लोगों में निकली छुपी हुई टीबी
जिला में 700 लोगों को छुपी हुई टीबी की बीमारी का पता चला है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि यह बीमारी टीबी की बीमारी से अलग है। यह लोगों में जल्दी नहीं फैलती है। लेकिन बीमारी का पता लगने के बाद टीबी प्रीवेंटिव थेरेपी के तहत हफ्ते में एक बार तीन महीने तक दवा देने का कोर्स शुरू कर दिया गया है।
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टीबी पॉजिटिव आने के बाद अब विभाग ने शुरू किया इलाज
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिला शिमला में 250 नए टीबी रोगियों की पहचान हुई है। जिला स्वास्थ्य विभाग ने 60 साल से अधिक आयु वाले हाई रिस्क लोगों की घर-घर जाकर स्क्रीनिंग की गई। इस दौरान यह नया आंकड़ा सामने आया है। वहीं स्वास्थ्य विभाग ने सभी रोगियों को दवाइयां देकर इलाज शुरू कर दिया है। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. विनीत लखनपाल ने इसकी जानकारी दी है।
जिला स्वास्थ्य विभाग ने टीबी की बीमारी को लेकर सौ दिनों तक अभियान चलाया। अभियान में शुगर व बीपी की जांच करवाने के लिए आए हाई रिस्क वाले लोगों की टीबी की स्क्रीनिंग करवाई गई। इसमें कैंसर, डायलिसिस के अलावा स्मोकर की जांच भी की गई। कुल 95 हजार लोगों की जांच का लक्ष्य रखा गया था। कुछ मरीजों में लक्षण थे, जबकि कुछ को लक्षण नहीं थे। लिहाजा जांच के बाद पॉजिटिव आए सभी रोगियों को टीबी की छह से नौ महीने की रुटीन दवाएं देकर इलाज शुरू कर दिया है। वहीं स्वास्थ्य विभाग की टीमें इन पर अपनी निगरानी रखे हुए हैं। बता दें कि जिला में तीस हजार रोगियों के एक्सरे भी किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है इन रोगियों की पहचान होने के बाद इनसे अन्य को बीमारी फैलने का खतरा भी कम हुआ है।
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टीबी की बीमारी के कई लक्षण हो सकते हैं। बलगम वाली खांसी, बलगम में खून आना, बुखार, सीने में दर्द, शरीर के किसी हिस्से में गांठ होना, हाल ही में हुए शारीरिक बदलाव, वजन में गिरावट, थकान, पुरानी बीमारी और रात में पसीना आना भी बीमारी के लक्षण हो सकते हैं।
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इस तरह बचें
टीबी की शीघ्र पहचान करवाएं। समय पर संपूर्ण इलाज मिलने से बीमारी से बचा जा सकता हैं। इसके अलावा पौष्टिक आहार खाएं। वहीं जिन समूह को टीबी का खतरा हैं, उनकी देखभाल करें।
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700 लोगों में निकली छुपी हुई टीबी
जिला में 700 लोगों को छुपी हुई टीबी की बीमारी का पता चला है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि यह बीमारी टीबी की बीमारी से अलग है। यह लोगों में जल्दी नहीं फैलती है। लेकिन बीमारी का पता लगने के बाद टीबी प्रीवेंटिव थेरेपी के तहत हफ्ते में एक बार तीन महीने तक दवा देने का कोर्स शुरू कर दिया गया है।