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Shimla News: सर्दियों में बच्चों में बढ़ रहे सर्दी, खांसी जुकाम और बुखार के मामले

Thu, 20 Nov 2025 11:55 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 20 Nov 2025 11:55 PM IST
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health news ddu hospital
डीडीयू की 120 की ओपीडी में 70 फीसदी इन्हीं रोगों से ग्रस्त आ रहे बच्चे
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। डेढ़ माह से बारिश न होने से खुश्क मौसम के कारण नवजात से लेकर 18 आयु वर्ग के बच्चे खांसी, जुकाम, एलर्जी वाली खांसी, वायरल बुखार की लगातार चपेट में आ रहे हैं। बच्चे सर्दियों के मौसम में इन रोगों की चपेट में आने के बाद अस्पतालों में उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। इनका आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है।
राजधानी के क्षेत्रीय अस्पताल दीनदयाल उपाध्याय (डीडीयू) के बाल रोग विभाग की ओपीडी में रोजाना औसतन 120 से 130 बच्चों में 70 फीसदी मामले इन्हीं रोगों के आ रहे हैं। उल्टी दस्त, पेट खराब आदि के मामले भी आ रहे हैं। मुख्य रूप से गले में दर्द, बुखार वायरल, सखी खांसी, छाती जमने, एलर्जी वाली खांसी जैसे मामले अधिक हैं। सर्दियों के मौसम में ठंड से बचने के उपायों में कमी और गर्म कपड़े पहनने में लापरवाही करना ही मुख्य वजह रहती है। स्कूलों में बच्चों से एक-दूसरे को भी संक्रमण होने की संभावनाएं रहती हैं।
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डीडीयू अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ चिकित्सक डाॅ. अंकुर धर्माणी ने माना कि लंबे अंतराल से बारिश नहीं हुई है, ठंड भी बढ़ गई है। सीजनल बीमारियों की चपेट में बच्चे अधिक आ रहे हैं। उन्होंने अभिभावकों से कहा कि सर्दियों से निपटने के लिए बच्चों के लिए खास एहतियात बरतने की आवश्यकता होती है। इसलिए लापरवाही न करें और अपना और बच्चों का सर्दियों में खास ख्याल रखने की जरूरत है। सर्दियों में टेंपरेचर रेगगुलेशन क्षमता को बनाए रखना, रोग प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखना और त्वचा की नमी को बनाए रखने की जरूरत होती है। नवजात शिशुओं के शरीर में तापमान नियंत्रित करने की क्षमता पूरी तरह से विकसित नहीं हुई होती है। उन्हें जल्दी ठंड लगती है। इसलिए बच्चों को अधिक गर्म कपड़े पहनाने की जरूरत होती है। उनकी त्वचा की नमी कम हो जाती है, बच्चों को पांच से सात मिनट में गुनगुने पानी से नहलाएं, स्नान के बाद माइश्चराइजर जरूर लगाएं, नवजात के पास जाने से पहले हाथ अच्छे से धोएं, भीड़ में जाने से बचें। एक से तीन साल के बच्चों को सर्दियों में लचीले कपड़े पहनाएं, इस मौसम में विटामीन सी, जिंक, आयरन प्रोटीन से भरपूर भोजन खिलाएं, बाहरी खेल और सूर्य का प्रकाश शरीर को विटामिन डी देता है। यह इम्यून सिस्टम और हड़ियों की मजबूती और विकास के जरूरी होता है। किशोर वर्ग के बच्चों को प्रोटीन, ओमेगा, फैटी एसिड, हरी सब्जियों और कैल्शियम युक्त भोजन जरूरी होता है। ठंड में इनकी ओरल ग्रंथियां धीमी हो जाती हैं, इससे त्वचा और बाल खुश्क होते हैं। इसमें माइश्चराइजर और हल्के तेल का उपयोग किया जा सकता है। सर्दियों में नियमित व्यायम, खेलकूद और पर्याप्त नींद इनके लिए जरूरी होती है, जिससे वे तनाव मुक्त रहें।
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