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स्वास्थ्य मंत्री स्वयं करेंगे एंबुलेंस वाहनों का निरीक्षण, संचालन कंपनी को दिए कड़े निर्देश

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Updated Wed, 18 Apr 2018 08:55 AM IST
health minister vipin parmar directions to ambulance company
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स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री विपिन सिंह परमार ने कहा कि हर एंबुलेंस में निर्धारित मापदंडों के अनुरूप 31 दवाइयां, दो स्ट्रेचर और अन्य आपात उपकरण होने चाहिए। उन्होंने कहा कि वह स्वयं एंबुलेंस वाहनों का निरीक्षण करेंगे। उन्होंने इस संबंध में संचालन कंपनी को भी कड़े निर्देश जारी किए हैं। 
मंगलवार को राज्य में राष्ट्रीय एंबुलेंस सेवा की प्रगति और गुणवत्ता की समीक्षा करते हुए कहा कि वर्ष 2010 में राज्य में आरंभ की गई इस सेवा से स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन आया है।

राज्य के विभिन्न भागों में हर चौथे मिनट में 108 एंबुलेंस की जरूरत पड़ती है। गर्भवती महिलाओं के लिए यह सेवा वरदान साबित हुई है। अभी तक 2,06,027 गर्भ संबंधी मामलों में महिलाओं को राहत पहुंचाई है।

यह सेवा शहरी क्षेत्रों में औसतन 12 मिनट जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 35 मिनट के भीतर दी जा रही है। जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत 102 राष्ट्रीय एंबुलेंस सेवा आरंभ की गई है। यह सेवा मां और शिशु को अस्पताल से घर तक नि:शुल्क पहुंचाती है। इस सेवा में 10,38,891 आपातकालीन मामलों को पंजीकृत किया गया है। 

जहां सड़कें संकरी, वहां बाइक से अस्पताल पहुंचाए जा रहे रोगी 
स्वास्थ्य मंत्री परमार ने कहा कि राज्य की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए बाइक एंबुलेंस सेवा आरंभ की गई है। हिमाचल प्रदेश उत्तरी भारत का पहला राज्य है, जहां इस सेवा को शुरू किया गया है।

इस सेवा की सुविधा आपात के दौरान 108 नंबर पर कॉल कर प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने कहा कि जहां चौपहिया वाहन नहीं पहुंच पाते, ऐसे क्षेत्रों में एंबुलेंस बाइक मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाती है।

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