बुरा न मानो होली है, कौल ने थामा भाजपा का दामन!
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‘वापस जाइए-वापस जाइए’ कौल साहब होली नहीं खेलेंगे। साहब के पीएस सबको लौटा रहे हैं। हाथों में रंग लगाए बाली और मैडम होली खेलने को आतुर हैं। हम तो रंग लगाएंगे। लेकिन दरवाजा नहीं खुलता। दोनों सीएम आवास की तरह बढ़ जाते हैं। हां, भाई कहां हैं कौल साहब। केंद्रीय मंत्री चौधरी वीरेंद्र सिंह दरवाजे पर खड़े हैं। विकल्प की तलाश में हिमाचल आए हैं। यहां विकल्प की क्या जरूरत है। विकल्प तो है ही नहीं। हिमाचल भाजपा में विकल्प की जरूरत है।
नड्डा साहब तो अब दिल्ली छोड़ने वाले नहीं। वीरेंद्र सिंह ने केंद्रीय नेतृत्व के सामने कौल साहब को अगला सीएम प्रोजेक्ट कर दिया है। भाजपाइयों की दिल्ली दौड़ बढ़ गई है। केंद्रीय नेतृत्व के सामने गुहार लगाने लगे हैं कि अगर यही रहा तो हिमाचल में भी भाजपा का हाल दिल्ली जैसा हो जाएगा। भाजपाई सवाल कर रहे हैं कि हिमाचल में कांग्रेस से नेता आयात करने की जरूरत क्या पड़ गई।
सेटिंग गेटिंग का खेल
कबीरा सा...रा..रा..रा। सीएम आवास पर होली का हुड़दंग सजा है। मस्ती का माहौल। राजा साहब की निगाहें दरवाजे पर लगी हैं। बाहर शोर उठता है... धूमल साहब आए हैं ... धूमल साहब आए हैं। मुस्कुराते हुए धूमल राजा साहब को गले लगा लेते हैं। राजा साहब उनके माथे पर अबीर लगा देते हैं। सारे विवाद खत्म हो गए हैं। दरवाजे के पीछे खड़े युवराज मुस्कुरा रहे हैं। कहते हैं अब सूबे में न एचपीसीए का केस कोई मुद्दा बनेगा और न ही आयकर का मामला कोई उठाएगा। हिमाचल की शांत वादियों में प्रदेश की राजनीति सरपट दौड़ेगी। पांच साल तुम पांच साल हम का फार्मूला पहले से तय है।
फिर झगड़ा टंटा क्यों? दोनों दिग्गज नेता एक-दूसरे से जमकर दोस्ती निभाएंगे। कोई किसी के खिलाफ तलवार नहीं निकालेगा। सड़क से सदन तक दोनों एक दूसरे का साथ देंगे। यह सिलसिला तीन साल बाद भी जारी रहेगा। दोनों ने तय किया है कि मिलकर प्रदेश को आगे ले जाएंगे। शुरुआत होली से होगी। बैकग्राउंड में गाना बज रहा है ..ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे।
बीसीसीआई में हमीरपुर के वोटर नहीं
आज बिरज में होरी मोरे रसिए....। भाजपा के दफ्तर में होली गीत चल रहा है। लान में नेताजी कार्यकर्ताओं को अबीर गुलाल लगा रहे हैं। प्रदेश अध्यक्ष भांग घोट रहे हैं। किनारे कुर्सी पर बैठे साहब लैपटॉप पर होली के बधाई संदेश भेज रहे हैं। छोटे साहब केसरिया ठंडई पर जुटे हैं। मैडम चिप्स तल रही हैं। दफ्तर के बाहर गेट पर गार्ड समर्थकों को धकिया रहे हैं कि ‘अंदर जाइए’। ‘कैसे अंदर चले जाएं बताइए अंदर पारिवारिक फंक्शन चल रहा है।’ ‘अरे भाई भूल गए।
ये परिवार नहीं पार्टी है। एक घर में इतनी सारी प्रतिभाएं पैदा हो जाएं तो कोई क्या करे बताइए’। हिंद महासागर में धक्का दे दें। ‘अब बीसीसीआई हमारे बाप की पार्टी तो है नहीं। बेटा क्रिकेट खेलता था। टेलेंट को कोई रोक थोड़े सकता है। देखो क्रिकेट के लिए इत्ता बड़ा स्टेडियम बनवा कर सिरदर्द मोल ले लिया। चुनाव जीत गया। बीसीसीआई के चुनाव में हमीरपुर के वोटर नहीं हैं। फिर भी वोट मिले। बात करते हैं परिवारवाद की।
दरवाजे पर कुंडी मारे बैठे हैं सुक्खू
वापस जाइए.... सुक्खू जी, होली नहीं खेलना चाहते। कांग्रेस के प्रवक्ता डा. सुभाष मंगलेट यहां पार्टी दफ्तर आ रहे सभी नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को वापस लौटा रहे हैं। हाथों में रंग लगाए हर्ष महाजन भी सुक्खू साहब से होली खेलने को आतुर हैं। मगर सुक्खू साहब भीतर से दरवाजे में कुंडी मारे बैठे हैं।
यहां से गुजर रहे भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता गणेश दत्त गाड़ी रोककर पत्रकारों को बताते हैं- कांग्रेस हाईकमान ने सदस्यता शुल्क 250 रुपये कर गड़बड़ जो किया है। ये सदस्यता अभियान गति नहीं पकड़ पा रहा है। इसलिए फिलहाल कांग्रेस कार्यालय के भीतर वह होली नहीं खेलना चाहते। हां, कार्यालय से बाहर आएं तो हम भी देखते हैं कि कैसे होली नहीं खेलते। ऐसा रंग लगाएंगे कि निकलने का नाम न लेगा।
होली खेलनी है तो ठियोग चलो ना
मैडम के नवबहार स्थित घर भूमिया एस्टेट में होली खेलने बहुत लोग गए हैं। इनमें शामिल हैं प्रकाश ठाकुर, अतुल शर्मा, देवेंद्र श्याम, राजेंद्र वर्मा वगैरह- वगैरह। ये वे लोग हैं जो राजनीति में लंबा सफर तय कर चुकी मैडम जी की विरासत संभालना चाहते हैं। भीतर से मैडम आती हैं और कहती हैं, होली खेलनी है तो ठियोग चलो ना। बस स्टैंड ठियोग में खेलो..शाली बाजार में खेलो.. कोटगढ़-कुमारसैन में खेलो। यहां वनों से आच्छादित भूमिया एस्टेट में कौन देखेगा कि तुमने होली खेली।
इस पर प्रकाश ठाकुर कहते हैं- मैडम जी, ठियोग में होली न तो अतुल खेलेगा और न देवेंद्र... न ही कोई और...। बस, मैं खेलूंगा मैडम! ऐसा खेलूंगा कि आपका नाम रोशन हो जाए। इस पर अतुल चलते बने। बोले, प्रकाश जी! ठियोग में तो होली मैं ही खेलूंगा। देखते रहना, मैं जो खेलूंगा, वो आप नहीं खेल पाएंगे। पिछली बार का भूल गए क्या? मैडम ने झिड़का . -तो जाओ खुद ही होली खेलो।
बाली सुग्रीव संग्राम
राजा साहब ने कइयों का पत्ता काटकर प्रदेश के प्रभावशाली मंत्री बाली को डिप्टी सीएम बना दिया है। वे होली के दिन राजभवन में शपथ लेंगे। शपथ लेने के बाद वे साथियों को गुलाल भी लगाएंगे। क्योंकि, इस दिन उनकी मुराद पूरी होने वाली है। सूबे के कई दिग्गज मंत्रियों-विधायकों की सिफारिश पर कांग्रेस की ओर से यह कदम उठाया गया है। सुग्रीव के भाजपा में शामिल होने की सूचना के बाद कांग्रेस के लिए यह कदम उठाना बेहद जरूरी हो गया था।
मंत्रियों का कहना है कि पार्टी के इस कदम से कांग्रेस और मजबूत होगी। दो नेता बाली साहब को रंग लगाने के लिए चुपके से बंगले में कूदते हैं। सिक्योरिटी गार्ड उनकी कॉलर पकड़ लेता है। दोनों लोग जेब से एक कागज निकाल कर गार्ड की तरफ बढ़ा देते हैं। वे बताते हैं- ‘साहब को रंग लगाने का परमिट है हाईकमान ने जारी किया है।’
विक्रमादित्य सिंह का लट्ठमार होली खेलने से इंकार
युवा कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष विक्रमादित्य सिंह ने भाजयुमो के प्रदेशाध्यक्ष सुनील ठाकुर की लट्ठमार होली खेलने की चुनौती को मानने से इंकार किया है। सूत्रों की सही मानें तो सुनील ठाकुर ने विक्रमादित्य सिंह को खुली चुनौती दी है कि वह चाहें तो इस बार लट्ठमार होली खेलने के लिए किसी भी मैदान में खड़े हो सकते हैं। इस पर विक्रमादित्य सिंह ने कहा है कि वह घरेलू व्यस्तता में हैं और वह अगर बिजी होते भी नहीं तो भी इस तरह की होली खेलने की चुनौती को वह किसी भी हालत में स्वीकार नहीं करते।
विक्रमादित्य सिंह ने दो टूक कहा है कि आजकल वह गांधी दर्शन पढ़ रहे हैं। अपनी अतिव्यस्तता के बावजूद एक बहुत बड़े इतिहासकार का ग्रंथ पढ़ रहे हैं। वह अहिंसा को कतई प्रमोट नहीं कर सकते। हां, अगर सुनील ठाकुर सूखे रंग का तिलक लगाकर होली खेलना चाहते हैं तो वह दिल्ली आ सकते हैं।
मुंबई से आईं वीआईपी बहू लड़ेंगी जिला परिषद का चुनाव
मुंबई से आई वीआईपी बहू मंडी के एक वार्ड से जिला परिषद का चुनाव लड़ेंगी। पंचायती राज मंत्री अनिल शर्मा के बाद पंडित सुखराम की विरासत को यही वीआईपी बहू अर्पिता खान संभालेंगी। चुनाव प्रचार के लिए खुद उनके भाई सलमान खान मोर्चा संभालेंगे। सुना है कि अर्पिता खान का चुनाव लड़ने का फैसला हिमाचल के एक और मंत्री की बेटी के लिए मुसीबत बनने वाला है। जिस वार्ड से अर्पिता खान चुनाव लड़ने जा रही हैं, वहां से इन मंत्री की की बेटी पार्षद हैं। इतनी बड़ी हस्ती और जिला परिषद का चुनाव लड़ने जा रही हैं। ये क्या बात हुई?
आबकारी मंत्री प्रकाश चौधरी ने ये सवाल मंत्री अनिल शर्मा से किया। इस पर मंत्री अनिल शर्मा बोले - अब राजनीति ग्राउंड से शुरू होती है कि नहीं। जनता में पकड़ तभी बनेगी। फिर लड़ाई किसी कम हस्ती से थोड़ी है। बेटे का राजनीति में शौक है नहीं। उसे तो फिल्मों में अभिनय का इंटरेस्ट है। कोई तो हमारे परिवार की इस विरासत को संभाले। इस पर प्रकाश चौधरी ने अनिल शर्मा के मुंह पर होली का गुलाल मलते हुए कहा - सौ टके की बात की...।
कैसे लगाएं गुलाल, नेता दफ्तर छोड़ने को नहीं तैयार
शिमला नगर निगम में भारी बहुमत से जीत दर्ज करने वाले दो नेताओं को इस होली पर गुलाल लगाने के लिए कई लोग बेताब हैं। लेकिन नेताजी हैं कि अपने दफ्तरों से बाहर ही निकलने को तैयार नहीं है। पूरी बिल्डिंग में अब सिर्फ यही दो नेता रह गए हैं, जबकि अफसर और कर्मचारी इस बिल्डिंग से शिफ्ट हो चुके हैं। उधर, एक नेताजी तो कुर्सी और कमरों पर कब्जा करने का भी कोई मौका नहीं छोड़ते हैं। बीते एक साल के दौरान यह नेता दूसरे नेता की अनुपस्थिति में उनकी कुर्सी और कमरे में अपना डेरा जमाते रहे हैं।
उक्त नेता का कार्यालय बिल्डिंग की दूसरी मंजिल पर था। ऐसे में इन्हें सड़क से सटी मंजिल के कार्यालय में बैठने का अधिक क्रेज देखा गया है। करीब पांच महीने पहले जब एक अफसर का सड़क से सटी मंजिल से ऑफिस कहीं और शिफ्ट हुआ तो इस नेता ने बिना कोई देर करते हुए अपना ऑफिस शिफ्ट कर दिया। इस नेता का ऑफिस अब दूसरे बड़े नेता के दफ्तर के बिल्कुल साथ है। नए आफिस में लोगों के बैठने के लिए स्थान भी अधिक है।
गुप्त गुफ्तगू करने के लिए अब इस नेता को एक अलग से कमरा मिल गया है। अब यह नेता दूसरे नेता की अनुपस्थिति में उनके कमरे में नहीं जाते हैं। अपने बड़े दफ्तर से कामकाज देखते हैं। उधर, अब इन दोनों ही नेताओं को इस दफ्तर को भी खाली करना है। ऐसे में इनके सामने बड़ी परेशानियां खड़ी हो गई हैं। दोनों नेताओं ने अफसरों को नई जगह बड़े कमरे तलाशने को कहा है। शर्त रखी गई है कि ग्राउंड फ्लोर पर ही दोनों के ऑफिस होने चाहिए।