104 कॉल सेंटर में मिलेगा रोगियों को परामर्श
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टेली हेल्थ कार्यक्रम के तहत अब स्वास्थ्य विभाग के 104 काल सेंटर में रोगियों को स्वास्थ्य से संबधित परामर्श मिलेगा। यहां महिलाओं एवं बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी पूरी जानकारी भी रहेगी। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने इस 104 चिकित्सा परामर्श सेवा समेत जच्चा-बच्चा मार्गन प्रणाली (एमसीटीएस), शिकायत निवारण तथा किशोर स्वास्थ्य परामर्श सेवा का शुभारंभ देहूंघाट में किया।
इस दौरान उन्होंने 108-राष्ट्रीय एंबुलेंस सेवा के कर्मियों से प्रदेश हित में अपनी हड़ताल समाप्त करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आपातकालीन सेवाएं सुचारु रूप से सुलभ होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य मानक देश में श्रेष्ठ हैं। राज्य में लोगों को उनके घर द्वार तक अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं देने के हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।
108, जननी सुरक्षा योजना-102 के साथ चिकित्सा परामर्श सेवा-104 से प्रदेशवासी विशेष रूप से लाभान्वित होंगे। 104 के तहत जच्चा-बच्चा मार्गन प्रणाली (एमसीटीएस), शिकायत निवारण तथा किशोर स्वास्थ्य परामर्श सेवा भी प्रदान की जाएगी। उन्होंने 104 सेवा के प्रदाता पीरामल स्वास्थ्य से आग्रह किया कि सभी सेवाओं को सुचारू रूप से लोगों को उपलब्ध करवाया जाए।
दुर्गम क्षेत्रों में वरदान साबित होगी 104 सेवा
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डा. कर्नल धनीराम शांडिल ने इस अवसर पर कहा कि 104 चिकित्सा परामर्श सेवा के अधीन प्रदान की जाने वाली सेवाएं हिमाचल जैसे दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों वाले प्रदेश में वरदान साबित होंगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लाहौल स्पीति, किन्नौर, चम्बा के साथ-साथ सिरमौर और अन्य जिलों में टेलीमेडिसिन सुविधा अहम है
क्योंकि आपातकालीन स्थितियों में समय पर उपलब्ध विशेषज्ञ परामर्श जीवन के लिए कीमती है। उन्होंने कहा कि हिमाचल ने गत तीन वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों में अभूतपूर्व प्रगति की है। उन्होंने मीडिया से आग्रह किया कि जन कल्याण की नीतियों को जनता तक पहुंचाने में अग्रणी भूमिका निभाएं।
एंबुलेंस सेवा नहीं होनी चाहिए प्रभावित- अस्पतालों में एंबुलेंस सेवा किसी भी सूरत में प्रभावित नहीं होनी चाहिए। स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने दो टूक कहा है कि हड़ताल पर गए एंबुलेंस कर्मी सरकार के कर्मी नहीं हैं। हड़ताल एंबुलेंस कंपनी का अंदरुनी मामला है इसे वह अपने स्तर पर निपटाए। स्वास्थ्य मंत्री शनिवार को आरएसएसडीआई चैप्टर के वार्षिक कांफ्रेंस में भाग ले रहे थे।
कहा कि सरकार में किसी भी प्रकार के बदलाव का फैसला मुख्यमंत्री करेंगे यह उनका विशेषाधिकार है। संगठन को लेकर जो भी फैसले किए जाएंगे वह राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी करेंगी। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य है जहां पर प्रतिव्यक्ति प्रति वर्ष 26 हजार रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि अस्पतालों में पैरामेडिकल स्टाफ की कमी है, लेकिन उसे पूरा किया जा रहा है। वही दो कॉलेजों को जल्द शुरू कर दिया जाएगा। कहा कि अभी भी अस्पतालों में 550 डाक्टरों की कमी चल रही है। कहा कि अस्पताल में डॉक्टरों की कमी न हो इसके लिए उन्होंने डॉक्टरों की रिटायरमेंट आयु को 62 से बढ़ाकर 65 वर्ष किया है।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सीनियर डॉक्टर कांफ्रेंस में आए हैं जोकि मधुमेह रोग के बारे में अवगत करवा रहे है। मधुमेह रोगियों की संख्या में इजाफा हो रहा है। आईजीएमसी के मेडिसन प्रोफेसर जितेंद्र कुमार मोक्टा ने कहा कि अस्पताल की ओपीडी में उपचार के लिए सौ लोगों में से ग्यारह लोग मधुमेह की चपेट में है।
जिनमें से आठ पुराने तो तीन नये लोग रोग की चपेट में है। डाक्टर ने कहा कि उन्होंने तीन ट्राइबल एरिया और शिमला, सिरमौर, ऊना, बिलासपुर, सोलन हमीरपुर मंडी और कुल्लू में लोग रोग की चपेट में है।