स्वास्थ्य बजट हिमाचल: दवाइयां और उपकरण खरीद के लिए मेडिकल सर्विस कॉरपोरेशन, मेडिकल कॉलेजों में रोबोटिक सर्जरी
मेडिकल कॉलेजों में आपात विभाग को अपग्रेड कर आपात मेडिसिन विभाग बनाया जाएगा। सरकार के इस फैसले से मरीजों को राहत मिलेगी। मेडिकल कॉलेजों के आपात विभाग में बिस्तरों की संख्या कम होने से मरीजों को परेशानी होती थी।
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हिमाचल प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में आपात विभाग को अपग्रेड कर आपात मेडिसिन विभाग बनाया जाएगा। सरकार के इस फैसले से मरीजों को राहत मिलेगी। मेडिकल कॉलेजों के आपात विभाग में बिस्तरों की संख्या कम होने से मरीजों को परेशानी होती थी। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की ओर से शुक्रवार को पेश किए बजट में कहा गया है कि आपात मेडिसिन विभाग बनाए जाने से जहां 50 बिस्तरों की क्षमता के क्रिटिकल केयर ब्लॉक का निर्माण किया जाएगा, वहीं 24 घंटे विशेषज्ञों, मेडिकल अधिकारियों, स्टाफ नर्सों सहित पैरा मेडिकल स्टाफ की तैनाती होगी। मरीजों की संख्या ज्यादा होने की स्थिति में आसपास के स्वास्थ्य संस्थानों से समन्वय किया जाएगा।
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मुख्यमंत्री ने अपने बजट भाषण में हर विधानसभा क्षेत्रों में एक स्वास्थ्य संस्थान को आदर्श स्वास्थ्य संस्थान के रूप में विकसित करने की घोषणा की है। इनमें विशेषज्ञों और अन्य स्टाफ सहित 134 तरह की लेबोरेटरी जांच सुविधा और आवश्यकतानुसार आधुनिक एमआरआई, सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड और डिजिटल एक्सरे सुविधा उपलब्ध होगी। सरकार के इस फैसले से जिला अस्पतालों और मेडिकल काॅलेजों में मरीजों की भीड़ कम रहेगी।
नाहन, चंबा और हमीरपुर मेडिकल कॉलेजों में अब नर्सिंग कॉलेज भी
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सुक्खू ने नाहन, चंबा और हमीरपुर मेडिकल कॉलेजों में अब नर्सिंग कॉलेज आरंभ करने की घोषणा की है। कहा कि इन संस्थानों के खोलने से लोगों को फायदा होगा।
मेडिकल कॉलेजों में रोबोटिक सर्जरी
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल के सभी छह मेडिकल कॉलेजों और सुपरस्पेशिलिटी चम्याणा अस्पताल में रोबोटिक सर्जरी शुरू होगी। कॉलेजों के सुपरस्पेशिलिटी विभाग यूरोलॉजी, जनरल सर्जरी, गायनोकॉलोजी, कार्डियोथेरेपिक सर्जरी और गेस्ट्रो सर्जरी विभाग में चरणबद्ध तरीके से रोबोटिक सर्जरी की जाएगी। इस पर प्रदेश सरकार 100 करोड़ रुपये की राशि व्यय की जाएगी।
पेट स्कैन मशीनें लगेगी
हिमाचल के सभी छह मेडिकल कालेजों में पेट स्कैन मशीनें स्थापित होगी। इसके लिए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।
दवाइयां, उपकरण खरीद के लिए बनेगा मेडिकल सर्विस कॉरपोरेशन
प्रदेश के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों के लिए आवश्यक दवाइयां और आधुनिक मशीनरियों की खरीद के लिए मेडिकल सर्विस कॉरपोरेशन बनाने का फैसला लिया है। शुगर से पीड़ित गर्भवती महिलाओं और बच्चों को प्रतिदिन इंसुलिन इंजेक्शन लगवाना पड़ता है। उन्हें किडनी और अन्य अंगों के गंभीर संक्रमण का खतरा बना रहता है। सरकार गर्भवती महिलाओं और बच्चों को इंसुलिन पंप उपलब्ध कराएगी।
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हमीरपुर, नाहन और चंबा मेडिकल कॉलेज में खर्च होंगे 100 करोड़
आगामी वित्तीय वर्ष में मेडिकल काॅलेज हमीरपुर, नाहन और चंबा के निर्माणाधीन भवनों का कार्य पूरा कर उनका लोकार्पण होगा। इससे प्रदेश की जनता को उच्च गुणवत्ता की स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। इस पर 100 करोड़ रुपये के करीब राशि व्यय की जाएगी।
हमीरपुर कैंसर केयर के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस होगा स्थापित
मेडिकल कॉलेज हमीरपुर के साथ कैंसर केयर के लिए एक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जाएगा। मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में न्यूक्लेयर मेडिसिन विभाग स्थापित किया जाएगा। वर्ष 2023-24 में इसके लिए 50 करोड़ रुपये की राशि खर्च होने का अनुमान है।
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राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय हमीरपुर में कैंसर के लिए उत्कृष्ट केंद्र स्थापित करने तथा प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में आदर्श स्वास्थ्य संस्थान विकसित करने का प्रस्ताव है। सभी मेडिकल कॉलेज में पीईटी स्कैन की स्थापना प्रशंसनीय है। बजट में मूल्य वर्धित पाठ्यक्रम और व्यावसायिक शिक्षा पर जोर है। समाज के लगभग हर वर्ग के मानदेय में वृद्धि का प्रस्ताव है। सरकार ने मनरेगा कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा कार्यकर्ताओं, जल रक्षकों से लेकर पंचायती राज संस्थाओं के सदस्यों, जिला परिषद और शहरी स्थानीय निकायों के सदस्यों के लिए समाज के अधिकांश वर्गों के मानदेय में वृद्धि की है।
एक चुनावी गारंटी को पूरा करते हुए 2.31 लाख महिलाओं को 1,500 रुपये प्रतिमाह दिया जाएगा। इस पर सरकार हर साल 416 करोड़ रुपये खर्च करेगी। 7,000 पात्र विधवाओं एवं अविवाहित महिलाओं के लिए आवास निर्माण के लिए मुख्यमंत्री विधवा एवं एकल नारी आवास योजना भी इस बजट की एक योजना है। बजट में कई घोषणाएं और योजनाएं करने के बावजूद यह बजट कमियों से वंचित नहीं है। सबसे पहले हिमाचल प्रदेश सरकार का बढ़ता घाटा (राजकोषीय घाटा) और कर्ज प्रमुख चिंता का विषय है, लेकिन बजट इस समस्या का समाधान करने में विफल रहा है। -डॉ. कमल सिंह, अर्थशास्त्र विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर, केंद्रीय विश्वविद्यालय