हाटी समुदाय मांगेगा हक, केंद्रीय मंत्री से करेंगे मुलाकात
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उत्तराखंड के जौनसार बाबर की तरह सिरमौर जिला के गिरीपार क्षेत्र को भी उनका हक दो। इस क्षेत्र को जनजातीय क्षेत्र घोषित करो। ट्रांसगिरी (गिरीपार) का हाटी समुदाय और अन्य संस्थाएं इस मामले को एक सुर में एक बार फिर नई दिल्ली में उठाने जा रहे हैं। सिरमौर जिले के विधायकों, पंचायतों और अन्य संस्थाओं जनप्रतिनिधियों का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल शिमला के सांसद वीरेंद्र कश्यप के नेतृत्व में आगामी 12 दिसंबर 2016 को संपूर्ण ट्रांसगिरी क्षेत्र को जनजातीय घोषित करने की मांग के लिए केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री जुयल ओराम से नई दिल्ली में भेंट करेगा।
उत्तराखंड के जौनसार-बाबर क्षेत्र को 25 वर्ष पहले जनजातीय क्षेत्र घोषित किया गया था, जबकि जौनसार-बाबर और ट्रांसगिरी क्षेत्र सिरमौर रियासत के अंग थे। दोनों क्षेत्रों में पूरी तरह समानताएं हैं। ये जानकारी देते हुए सांसद वीरेंद्र कश्यप ने कहा कि केंद्र से ये मांग उठाई जा रही है कि पूरे ट्रांसगिरी क्षेत्र को जौनसार-बाबर क्षेत्र की तर्ज पर जनजातीय क्षेत्र घोषित किया जाना चाहिए। वहीं, सिरमौर युवा विकास मंच के अध्यक्ष वीरेंद्र शर्मा ने कहा है कि वर्तमान में इस मामले की फाइल रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया के पास है।
इसे जल्दी ही जनजातीय आयोग में पेश किया जाएगा। इस क्षेत्र के लोग वर्ष 1967 से लेकर अपना हक मांग रहे हैं। ट्रांसगिरी क्षेत्र में हाटी समुदाय के लोग पूरे रेणुका और शिलाई क्षेत्रों के अलावा राजगढ़ और पांवटा के कई क्षेत्रों में आते हैं। करीब 124 पंचायतों को इसका लाभ होगा। अगर इस क्षेत्र को जनजातीय क्षेत्र घोषित कर दिया जाता है तो यहां लोगों के जीवन का कायाकल्प हो जाएगा। ये लड़ाई अब निर्णायक चरण पर पहुंच चुकी है। इसके सिरे लगने के आसार हैं। इस पर क्षेत्र के सभी राजनेता एकजुट हैं।
प्रस्ताव से सरकार ने हटा दी 25 पंचायतें, ये मामला भी उठाएंगे: वीरेंद्र कश्यप
सांसद वीरेंद्र कश्यप ने कहा कि हिमाचल सरकार ने केंद्र सरकार को सौंपी नई रिपोर्ट में पांवटा साहिब और राजगढ़ तहसील की 25 पंचायतों को जनजातीय क्षेत्र घोषित करने के प्रस्ताव से बाहर किया गया है।इन 25 पंचायतों में रहने वाले समुदाय के लोगों की जीवन शैली, रहन-सहन, आर्थिक-सामाजिक स्थिति, लोक संस्कृति और भौगोलिक स्थितियां बाकी ट्रांसगिरी क्षेत्र से पूरी तरह मिलती-जुलती हैं।
इस पूरे क्षेत्र की जनजातीय घोषित करने के लिए बार-बार संसद में मांग उठाई और अनेक संवैधानिक एवं अन्य मंचों पर मुद्दा उठाया था, जिसके फलस्वरूप केंद्र सरकार ने राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन राज्य सरकार ने त्रुटिपूर्ण और अधूरी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी। ये बात भी केंद्रीय मंत्री के समक्ष रखेंगे।
सांसद वीरेंद्र कश्यप के इस बयान पर हिमाचल सरकार के एक प्रवक्ता का कहना है कि केंद्र सरकार के निर्देश के बाद हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के ट्राइबल स्टडी सेंटर शिमला से अध्ययन करवाया गया। जो क्षेत्र इसके लिए तय मानकों को पूरा करते हैं। प्रस्ताव में वो सारा क्षेत्र शामिल है।