HAS परीक्षा में बड़ा बदलाव, जानिए क्या-क्या बदल गया
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हिमाचल में प्रशासनिक सेवाओं की सबसे बड़ी परीक्षा एचएएस से दो वैकल्पिक विषयों का झंझट खत्म हो गया है। अब मुख्य परीक्षा में केवल एक ही वैकल्पिक विषय होगा। पहले दो वैकल्पिक विषयों के पेपर कुल 600 अंकों के होते थे, अब एक ही वैकल्पिक विषय का पर्चा होगा।
यह महज 200 अंकों का होगा। सामान्य ज्ञान के पेपर एक के बजाय अब तीन होंगे। यह 200-200 अंकों के होंगे। इससे पहले सामान्य ज्ञान का एकमात्र पेपर महज 150 नंबर का होता था। वहीं, प्रारंभिक परीक्षा में सामान्य ज्ञान और एप्टीट्यूट टेस्ट पहले ही तरह 200-200 अंकों के होंगे।
लेकिन अब एप्टीट्यूट टेस्ट सिर्फ 33 फीसदी नंबर लेकर उत्तीर्ण करना होगा। एचएएस की परीक्षा के साथ-साथ अब आईएएस की तैयारी भी हो जाएगी। दोनों परीक्षाओं का पैटर्न अब एक जैसा हो गया है। राज्य सरकार की मंजूरी के बाद नए प्रारूप पर परीक्षा करवाने के लिए आयोग तैयार हो गया है।
नया प्रारूप जनवरी 2017 से होगा लागू
हिमाचल प्रदेश राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष केएस तोमर ने भी सोमवार को अगली परीक्षा की तैयारियों पर बैठक में आवश्यक निर्देश दिए। तोमर ने बताया कि नए प्रारूप के तहत सभी संकायों के विद्यार्थियों को अपनी-अपनी क्षमता के मुताबिक अंक प्राप्त करने का न्यायसंगत अवसर दिया गया है।
पहले दो वैकल्पिक विषयों के अभ्यर्थी अच्छे अंक आसानी से ले लेते थे। तोमर ने कहा कि इस परीक्षा के लिए मॉडल प्रश्नपत्रों को बनाने का काम प्रगति पर है। इसे जल्दी ही पूरा किया जाएगा। उन्हें जल्द आयोग की वेबसाइट पर अपलोड किया जा सकेगा।
नया प्रारूप जनवरी 2017 से होगा लागू
हिमाचल सरकार की ओर से मंजूर एचएएस परीक्षा का नया प्रारूप वर्ष 2017 से लागू होगा। राज्य मंत्रिमंडल की पिछले सप्ताह हुई बैठक में इसे अनुमोदित किया गया है। एचएएस परीक्षा का नया प्रारूप आईएएस की तर्ज पर किया गया है।
इन 31 विषयों में से चुनना होगा एक ऐच्छिक सब्जेक्ट
एचएएस की मुख्य परीक्षा में 31 विषयों में से केवल एक ऐच्छिक सब्जेक्ट चुनना होगा। 20 से अधिक विद्वानों ने एचएएस परीक्षा का पाठ्यक्रम तैयार किया है। आयोग के अध्यक्ष केएस तोमर ने कहा कि नए पाठ्यक्रम को बनाने का दायित्व आयोग के भूतपूर्व सदस्य प्रो. जेसी शर्मा को दिया गया था। ये काफी कठिन काम था। कई बार बैठकें की गईं।
जिन विषयों में से किसी एक को ऐच्छिक विषय लिया जा सकेगा, उनमें भारतीय इतिहास, कृषि, राजनीति विषय एवं अंतरराष्ट्रीय संबंध, मेकेनिकल इंजीनियरिंग, गणित, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, सांख्यिकी, सिविल इंजीनियरिंग, अर्थशास्त्र, हिंदी, वाणिज्य एवं एकाउंटेंसी, संस्कृत, केमिस्ट्री, उर्दू, बॉटनी, अंग्रेजी साहित्य, जूलॉजी, मनोविज्ञान, दर्शन शास्त्र, जियोलॉजी, विधि, भौतिक विज्ञान, समाज शास्त्र, पशुपालन, लोक प्रशासन, एंथ्रोपॉलॉजी, मैनेजमेंट, वानिकी, भूगोल, बागवानी और मेडिकल साइंसेज शामिल हैं।
वेबसाइट पर अपलोड होगा नया पाठ्यक्रम
इस पाठ्यक्रम को प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला और केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला के अनुभवी एवं प्रबुद्ध आचार्यों ने तैयार किया है। सोमवार को आयोग कार्यालय में इस पर विस्तृत चर्चा की गई और इसका अनुमोदन भी किया गया।
केएस तोमर ने अधिकारियों को आदेश दिए कि मॉडल प्रश्नपत्रों और नए सूक्ष्म पाठ्यक्रम को शीघ्र ही आयोग की वेबसाइट पर अपलोड किया जाए। तोमर ने कहा कि प्रस्तावित सूक्ष्म पाठ्यक्रम पहले से ही आयोग की वेबसाइट पर सुझावों के लिए अपलोड किया गया था। बैठक में आयोग के सदस्य प्रदीप चौहान, आरएस नेगी, डॉ. मान सिंह और आयोग के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
ऐसे होगा अंकों का निर्धारण
प्रारंभिक परीक्षा
सामान्य अध्ययन - 200 अंक
(योग्यता सूची में स्थान पाने के लिए इस प्रश्नपत्र में अर्जित अंक ही मान्य होंगे।)
एप्टीट्यूड टेस्ट - 200 अंक
(33 प्रतिशत अंक अर्जित करने की शर्त अनिवार्य)
मुख्य परीक्षा
1. अंग्रेजी - 100 अंक (40 प्रतिशत अंक अनिवार्य शर्त)
2. हिंदी - 100 अंक (40 प्रतिशत अंक अनिवार्य शर्त)
3. सामान्य ज्ञान प्रश्नपत्र -1 - 200 अंक
4. सामान्य ज्ञान प्रश्नपत्र -2 - 200 अंक
5. सामान्य ज्ञान प्रश्नपत्र -3 - 200 अंक
6. अंग्रेजी भाषा में निबंध - 100 अंक
7. ऐच्छिक विषय - 200 अंक
साक्षात्कार - 150 अंक
कुल अंक - 1050 अंक