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हुनर: देखकर नहीं, हरियाणा की रिया छूकर और सूंघकर पढ़ती है अक्षर

Wed, 06 Oct 2021 03:44 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Wed, 06 Oct 2021 03:44 PM IST
सार

रिया की इस प्रतिभा को परखने के लिए शिक्षकों ने छात्र-छात्राओं के आधार कार्ड, एटीएम, पैन कार्ड, किताब, न्यूज पेपर सब उसके हाथ में देकर पढ़ने को कहा तो रिया ने पढ़कर सुना दिया। हैरानी तब हुई जब रिया ने मोबाइल पर आए मैसेज तक बिना छूए पढ़कर सुना दिए। 

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Haryana matric class student Riya read blindfolded in rkmv shimla
राजकीय कन्या महाविद्यालय शिमला में आंख पर पट्टी बांधकर छूकर अक्षर पढ़ती रिया और मंच पर मौजूद शिक्षक। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आंख पर पट्टी बांधकर सिर्फ छूकर और गंध से ही किताब, मोबाइल पर क्या लिखा है, सब पढ़ पाना किसी के लिए संभव नहीं। लेकिन हरियाणा के भिवानी की दसवीं कक्षा की छात्रा रिया यह सब कर लेती है। राजकीय कन्या महाविद्यालय (आरकेएमवी) शिमला में विभिन्न कॉलेजों के छात्र-छात्राओं तथा शिक्षकों के बीच रिया ने यह सब करके दिखाया। रिया की इस प्रतिभा को परखने के लिए मौजूद शिक्षकों ने छात्र-छात्राओं के आधार कार्ड, एटीएम, पैन कार्ड, किताब, न्यूज पेपर सब उसके हाथ में देकर पढ़ने को कहा तो रिया ने पढ़कर सुना दिया। हैरानी तब हुई जब रिया ने मोबाइल पर आए मैसेज तक बिना छूए पढ़कर सुना दिए। 

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हिमाचल प्रदेश साइंस एंड मैनेजमेंट सोसायटी की ओर से रिया को आरकेएमवी में बुलाकर डेमोस्ट्रेशन का आयोजन किया था। रिया ने कहा कि वह चार सालों से यह सब कर रही है। इनके पिता इंजीनियर जितेंद्र जांगड़ा ने उन्हें यह सब सिखाया। इस पर उसने इसका पूरा अभ्यास किया और अब वह और उनके पिता करीब साढ़े पांच सौ दृष्टिहीन या दृष्टिबाधितों को इस तरह से गंध और छूने से लिखने पढ़ने की कला सीखा रहे हैं। इसके लिए इंजीनियर जितेंद्र और उनकी बेटी को कई सम्मान भी मिल चुके हैं। 
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जितेंद्र ने बताया कि वह करीब 15000 लोगों को इस कला को सीखा चुके हैं। गुरु जंबेशवर यूनिवर्सिटी में साइंटिफिक ऑफिसर के पद पर तैनात जितेंद्र ने बताया कि यह कुछ नहीं तीसरी इंद्री को जागृत करने की एक कला है। इससे याददाश्त और एकाग्रता बढ़ती है। यह बायो इलेक्ट्रोमैगनेटिक फील्ड के तहत संभव हो पाता है। 
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रिया ने बताया कि जब मैं आंखें बंद कर किसी चीज का आभास करती हूं तो उसे सब नजर आ जाता है। लेकिन आंखें खोलने पर वह उतना महसूस या पढ़ नहीं पाती। आंखें बंद होने पर छूकर और गंध से वह आभास करती हैं कि क्या लिखा है। रिया के इस हुनर को आरकेएमवी, कोटशेरा, सीमा, संजौली कॉलेज और कुछ स्कूलों से बुलाए करीब 200 छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने देखा। इस मौके पर आयोजक संस्था की ओर से डॉ. बृजेश चौहान और गोपाल चौहान मौजूद रहे। रिया और उनके पिता ने इसके बाद हायर एजुकेशन काउंसिल के चेयरमैन प्रो. सुनील गुप्ता से भी मुलाकात की।

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