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Shimla News: महिलाओं के हाथों से बनाए उत्पादों की धूम, खूब बिका खुशबू भरा साबुन
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जिले की 200 ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों को मिला मंच, बैग और सजावटी सामान की खूब हुई बिक्री
60 हजार रुपये से अधिक की महिलाओं ने की कमाई
खास खबर
दीक्षा सरोय
शिमला। आत्मनिर्भर महिला और स्वावलंबी हिमाचल की मिसाल पेश करते हुए शिमला की महिलाएं अपने हाथों से बने उत्पादों से बाजार में पहचान बना रही हैं। दो अलग-अलग स्टॉलों पर महिलाओं ने अब तक 60 हजार रुपये से अधिक की बिक्री की है। हाथों से बने इन उत्पादों को लोगों की खूब पसंद मिल रही है। इसमें फूलों की खुशबू से भरा साबुन खूब बिका।
महिलाओं ने पहला स्टॉल हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) में लगाया था जो सीएमएस एंटरप्राइजेज के तहत संचालित था। इस स्टॉल में महिलाओं के हैंडमेड साबुन, निटिंग और स्टिचिंग के उत्पाद, जैसे कार्डिगन, निटिंग फ्लावर, की-चेन, बैग और घर की सजावट का सामान प्रदर्शित किया था। इन उत्पादों को युवाओं और अन्य लोगों ने खूब पसंद किया। यहां महिलाओं ने 50 हजार रुपये से अधिक की बिक्री की। इसके बाद उन्होंने दूसरा स्टॉल ऐतिहासिक रिज मैदान पर लगाया जो राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत संचालित किया गया। यह स्टॉल दो दिन तक लगाया गया जिसमें पर्यटकों और स्थानीय लोगों की भीड़ उमड़ी। महज दो दिन में इस स्टॉल पर महिलाओं ने 10 हजार रुपये से अधिक की बिक्री की। महिलाओं के यह उत्पाद हेल्पिंग हैंड वेलफेयर एंड एजुकेशन संस्था शिमला से भी जुड़े हैं। संस्था के संस्थापक कपिल कुमार ने कहा कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्र की महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ना और उन्हें बाजार उपलब्ध करवाना है। उन्होंने कहा कि रिज पर यह स्टॉल दो दिन तक लगाया गया और शुक्रवार को बंद हुआ।
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60 हजार रुपये से अधिक की महिलाओं ने की कमाई
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दीक्षा सरोय
शिमला। आत्मनिर्भर महिला और स्वावलंबी हिमाचल की मिसाल पेश करते हुए शिमला की महिलाएं अपने हाथों से बने उत्पादों से बाजार में पहचान बना रही हैं। दो अलग-अलग स्टॉलों पर महिलाओं ने अब तक 60 हजार रुपये से अधिक की बिक्री की है। हाथों से बने इन उत्पादों को लोगों की खूब पसंद मिल रही है। इसमें फूलों की खुशबू से भरा साबुन खूब बिका।
महिलाओं ने पहला स्टॉल हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) में लगाया था जो सीएमएस एंटरप्राइजेज के तहत संचालित था। इस स्टॉल में महिलाओं के हैंडमेड साबुन, निटिंग और स्टिचिंग के उत्पाद, जैसे कार्डिगन, निटिंग फ्लावर, की-चेन, बैग और घर की सजावट का सामान प्रदर्शित किया था। इन उत्पादों को युवाओं और अन्य लोगों ने खूब पसंद किया। यहां महिलाओं ने 50 हजार रुपये से अधिक की बिक्री की। इसके बाद उन्होंने दूसरा स्टॉल ऐतिहासिक रिज मैदान पर लगाया जो राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत संचालित किया गया। यह स्टॉल दो दिन तक लगाया गया जिसमें पर्यटकों और स्थानीय लोगों की भीड़ उमड़ी। महज दो दिन में इस स्टॉल पर महिलाओं ने 10 हजार रुपये से अधिक की बिक्री की। महिलाओं के यह उत्पाद हेल्पिंग हैंड वेलफेयर एंड एजुकेशन संस्था शिमला से भी जुड़े हैं। संस्था के संस्थापक कपिल कुमार ने कहा कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्र की महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ना और उन्हें बाजार उपलब्ध करवाना है। उन्होंने कहा कि रिज पर यह स्टॉल दो दिन तक लगाया गया और शुक्रवार को बंद हुआ।
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