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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Gutbaji in BJP in Kangra in himachal pradesh

भाजपा में फिर से लौटा गुटबाजी का इतिहास, कांगड़ा में उभरा नया धड़ा

Mon, 01 Jun 2020 12:29 PM IST
अरविन्द ठाकुर सुनील चड्ढा, अमर उजाला नेटवर्क, धर्मशाला
सुनील चड्ढा, अमर उजाला नेटवर्क, धर्मशाला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Mon, 01 Jun 2020 12:29 PM IST
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Gutbaji in BJP in Kangra in himachal pradesh
फाइल फोटो

कांगड़ा में एक धड़े की गुप्त बैठक के बाद बीते दिन दूसरे गुट की ओर से किए गए जोरदार पलटवार ने एक बार फिर से भाजपा को गुटबाजी के इतिहास के पुराने मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है। खास बात यह है कि इस बार धूमल गुट के सामने नया गुट जयराम गुट के रूप में उभरा है। कांगड़ा-चंबा से विधायक राकेश पठानिया, विक्रम जरियाल, अरुण मेहरा, विशाल नैहरिया, मुल्ख राज प्रेमी, अर्जुन सिंह, रीता धीमान, पवन नैयर, जिया लाल, रविंद्र धीमान ने जयराम की ढाल बनकर नया गुट बनाया है।

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इन विधायकों ने सांसद किशन कपूर, पूर्व मंत्री रविंद्र रवि, पूर्व विधायक संजय चौधरी, नूरपुर जिला के महामंत्री रणबीर सिंह निक्का, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य घनश्याम शर्मा, बलदेव ठाकुर, निर्मल सिंह, डॉ नरेश बरमानी के खिलाफ मोर्चा खोलकर सभी को बागी कहा है। इनमें से अधिकतर नेता धूमल गुट के हैं। 2017 में जीत के बाद हाईकमान ने हिमाचल भाजपा में धूमल और शांता खेमे में गुटबाजी खत्म करने के लिए जयराम ठाकुर को प्रदेश की बागडोर सौंपी थी।
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रविवार को 10 विधायकों की ओर से अपनी ही पार्टी के सांसद और पूर्व मंत्री विधायकों के खिलाफ जेपी नड्डा को पत्र लिखने के साथ ही अब हिमाचल भाजपा में एक बार फिर से दो खेमों में गुटबाजी शुरू हो गई है। खास बात इसमें इस बार भी गुटबाजी का केंद्र कांगड़ा ही बना। धूमल सरकार के 1998 और 2007 के कार्यकाल के दौरान भी दो खेमों में गुटबाजी चरम पर थी। उस वक्त भी इसका केंद्र बिंदु कांगड़ा ही था। हालांकि, कांगड़ा से उपजी यह गुटबाजी सरकार के मिशन रिपीट के लिए फिर से घातक सिद्ध हो सकती है। अब देखना यह होगा कि फिर से उपजी गुटबाजी पर हाईकमान क्या कार्रवाई करता है। 
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हर बार कांगड़ा ही केंद्र बिंदु
धूमल सरकार के कार्यकाल में पार्टी के भीतर ज्यादा विरोध कांगड़ा के ही नेताओं ने किया था। उस वक्त राजन सुशांत सहित पांच नेताओं ने तिकड़ी ने फंट फुट पर आकर विरोध किया था। यह लोग शांता खेमे से थे। अपनी और कांगड़ा जिला की कथित अनदेखी पर इन नेताओं ने विरोध की मशाल उठाई थी। अब जयराम सरकार के कार्यकाल में कांगड़ा जिला से 3 में से 2 मंत्री पद वर्तमान में नहीं रहे हैं।


पूर्व मंत्री रविंद्र रवि पत्र बम के मामले में थाने तक बुलाए गए।  विधानसभा और लोकसभा चुनाव में टिकट के तलबगार नेताओं को जो आश्वासन देखकर बिठाया गया था, वे पूरे नहीं हुए तो उनमें से कुछ में असंतोष बढ़ता गया। स्वास्थ्य विभाग में कथित घोटाला और प्रदेशाध्यक्ष का इस्तीफे ने कांगड़ा जिला के असंतुष्ट नेताओं को अपनी भड़ास निकालने का मौका दे दिया।

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