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Shimla News: शहर के बाजार में गुच्छी की दस्तक, छह हजार किलो तक बिकी
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ऊपरी शिमला में पंचायत चुनाव में व्यस्तता के चलते अभी कम आ रहे गुच्छी बेचने वाले,
चीन में पाॅलीहाउस में उत्पादन शुरू होने से घटे दाम
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी शिमला के बाजार में जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगने वाली गुच्छी ने दस्तक देनी शुरू कर दी है। शहर की अनाज मंडी में गुच्छी खरीदने और उसे आगे बेचने का कार्य करने वाले कारोबारियों के पास ऊपरी शिमला से किसान और बागवान गुच्छी लेकर आने लगे हैं।
गुच्छी का अधिकतम दाम छह हजार रुपये प्रति किलो चल रहा है। पंचायत चुनाव की व्यस्तता के चलते गुच्छी बेचने वाले अभी कम आ रहे हैं। चुनाव के बाद मार्केट में गुच्छी की आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद है। इस बार सर्दियों में मौसम के कारण गुच्छी कम है। शिमला के गुच्छी कारोबारियों को गुच्छी बेचने को आने वाले इन लोगों का बेसब्री से इंतजार है। कोरोनाकाल के बाद से गुच्छी की आपूर्ति कम हुई है। चीन में गुच्छी को पॉलीहाउस में उगाए जाने और मार्केट में बेचे जाने से अंतरराष्ट्रीय मार्केट में गुच्छी के रेट में कमी आई है। पॉलीहाउस में उगने वाली गुच्छी ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
प्राकृतिक रूप से उगने पर गुच्छी को जंगलों से एकत्र करने के बाद सुखाया जाता है और फिर बाजार में बेची जाती है। तीन साल पूर्व इसके दाम 10 हजार से 13 हजार प्रति किलो तक रहे हैं। एक किलो गुच्छी निकालने के बाद सूखने पर सौ ग्राम रह जाती है। इससे कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है।
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कारोबारी मुनीश सेखरी ने माना कि कारोबार कम हुआ है। अभी तक इक्के-दुक्के लोग ही गुच्छी बेचने आए हैं। पंचायत चुनाव के बाद गुच्छी मार्केट में आना शुरू हो सकती है। उन्होंने बताया कि मौसम में बदलाव भी गुच्छी के कारोबार के कम होने की वजह है। सर्दियों में बारिश बर्फबारी कम होगी तो नमी कम रहेगी, इससे जंगलों में उगने वाली गुच्छी भी कम उगेगी। कारोबारी विशाल सूद ने बताया कि गुच्छी का पहले एक्सपोर्ट होता था, अब वो कम हो गया है, तो मांग नहीं है।
गुच्छी के औषधीय गुण
चीन में गुच्छी का इस्तेमाल शारीरिक रोगों को ठीक करने में किया जाता है। दावा है कि गुच्छी में 32.7 प्रतिशत प्रोटीन, 2 प्रतिशत फैट, 17.6 प्रतिशत फाइबर, 38 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट होता है। यह स्वास्थ्यवर्धक है। इसे सूजनरोधी दवा के रूप में भी उपयोग किया जाता है। माना जाता है कि गुच्छी के सेवन से ट्यूमर नहीं बनता, गठिया की सूजन को कम करने, प्रोस्टेट और स्तन कैंसर की संभावना को भी गुच्छी कम करती है।
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चीन में पाॅलीहाउस में उत्पादन शुरू होने से घटे दाम
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी शिमला के बाजार में जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगने वाली गुच्छी ने दस्तक देनी शुरू कर दी है। शहर की अनाज मंडी में गुच्छी खरीदने और उसे आगे बेचने का कार्य करने वाले कारोबारियों के पास ऊपरी शिमला से किसान और बागवान गुच्छी लेकर आने लगे हैं।
गुच्छी का अधिकतम दाम छह हजार रुपये प्रति किलो चल रहा है। पंचायत चुनाव की व्यस्तता के चलते गुच्छी बेचने वाले अभी कम आ रहे हैं। चुनाव के बाद मार्केट में गुच्छी की आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद है। इस बार सर्दियों में मौसम के कारण गुच्छी कम है। शिमला के गुच्छी कारोबारियों को गुच्छी बेचने को आने वाले इन लोगों का बेसब्री से इंतजार है। कोरोनाकाल के बाद से गुच्छी की आपूर्ति कम हुई है। चीन में गुच्छी को पॉलीहाउस में उगाए जाने और मार्केट में बेचे जाने से अंतरराष्ट्रीय मार्केट में गुच्छी के रेट में कमी आई है। पॉलीहाउस में उगने वाली गुच्छी ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
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प्राकृतिक रूप से उगने पर गुच्छी को जंगलों से एकत्र करने के बाद सुखाया जाता है और फिर बाजार में बेची जाती है। तीन साल पूर्व इसके दाम 10 हजार से 13 हजार प्रति किलो तक रहे हैं। एक किलो गुच्छी निकालने के बाद सूखने पर सौ ग्राम रह जाती है। इससे कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है।
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कारोबारी मुनीश सेखरी ने माना कि कारोबार कम हुआ है। अभी तक इक्के-दुक्के लोग ही गुच्छी बेचने आए हैं। पंचायत चुनाव के बाद गुच्छी मार्केट में आना शुरू हो सकती है। उन्होंने बताया कि मौसम में बदलाव भी गुच्छी के कारोबार के कम होने की वजह है। सर्दियों में बारिश बर्फबारी कम होगी तो नमी कम रहेगी, इससे जंगलों में उगने वाली गुच्छी भी कम उगेगी। कारोबारी विशाल सूद ने बताया कि गुच्छी का पहले एक्सपोर्ट होता था, अब वो कम हो गया है, तो मांग नहीं है।
गुच्छी के औषधीय गुण
चीन में गुच्छी का इस्तेमाल शारीरिक रोगों को ठीक करने में किया जाता है। दावा है कि गुच्छी में 32.7 प्रतिशत प्रोटीन, 2 प्रतिशत फैट, 17.6 प्रतिशत फाइबर, 38 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट होता है। यह स्वास्थ्यवर्धक है। इसे सूजनरोधी दवा के रूप में भी उपयोग किया जाता है। माना जाता है कि गुच्छी के सेवन से ट्यूमर नहीं बनता, गठिया की सूजन को कम करने, प्रोस्टेट और स्तन कैंसर की संभावना को भी गुच्छी कम करती है।