{"_id":"595d27f14f1c1b9d078b46f3","slug":"gst-impact-medicines-not-available-at-medical-stores","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"जीएसटी की मार: सरकारी दुकानों में दवा बिक्री बंद, भटक रहे मरीज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जीएसटी की मार: सरकारी दुकानों में दवा बिक्री बंद, भटक रहे मरीज
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Thu, 06 Jul 2017 08:44 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जीएसटी लागू होने के बाद हिमाचल में अधिकांश सरकारी सस्ती दवा दुकानों के शटर डाउन हो गए हैं। खाद्य आपूर्ति निगम ने बिक्री के लिए कंप्यूटर डाटा बेस को जीएसटी के मुताबिक अपडेट नहीं किया है।
विज्ञापन
जिससे अधिकांश फार्मासिस्ट लाइसेंस धारक ने दवाएं बेचना बंद कर दिया है। ऐसे में सरकारी अस्पताल पहुंच रहे मरीजों को बाजार से मंहगे दाम पर दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।
विज्ञापन
हालांकि बुधवार को निगम ने साफ्टवेयर डाटा बेस अपडेट करने के साथ दुकानधारकों को जीएसटी के तहत पंजीकरण करवाने के निर्देश जारी किये हैं।
प्रदेश में 1 जुलाई से सरकारी सस्ते दवा दुकानों पर बिक्री प्रभावित चल रही है। निगम ने समय रहते बिक्री प्रणाली के लिए स्थापित साफ्टवेयर डाटा बेस जीएसटी के अनुरूप अपडेट नहीं किया।
विज्ञापन
बाजार से महंगी दवा खरीदने को मजबूर
बुधवार को इस मामले पर खाद्य आपूर्ति निगम के अधिकारियों की अतिरिक्त मुख्य सचिव खाद्य आपूर्ति तरुण कपूर के साथ बैठक हुई। इसमें पुराने दवा स्टाक पर 3.25 फीसदी छूट देने का फैसला लिया गया। जीएसटी लागू होने से पहले इन दुकानों के लिए सप्लाई की गई दवाओं में 10.25 फीसदी की छूट थी।
अतिरिक्त मुख्य सचिव तरुण कपूर ने निगम अधिकारियों को निर्देश दिए कि वह जल्द से जल्द सिस्टम को अपडेट करें, ताकि लोगों को सुविधा मुहैया हो सके। हिमाचल में 50 से अधिक सस्ती दवाओं की दुकानें हैं। इनमें कई फार्मासिस्ट दवाइयां नहीं बेच रहे थे।
बाजार से महंगी दवा खरीदने को मजबूर
सिविल सप्लाई की दुकानों पर सस्ती दवाएं न मिलने पर तीमारदारों को मजबूरन बाजारों से महंगी दवाएं खरीदने पर मजबूर होना पड़ रहा है। खाद्य आपूर्ति निगम का दावा है कि मामला सुलझाया गया है। वीरवार से मरीजों को सेवाएं उपलब्ध हो जाएंगी।
अतिरिक्त मुख्य सचिव तरुण कपूर ने निगम अधिकारियों को निर्देश दिए कि वह जल्द से जल्द सिस्टम को अपडेट करें, ताकि लोगों को सुविधा मुहैया हो सके। हिमाचल में 50 से अधिक सस्ती दवाओं की दुकानें हैं। इनमें कई फार्मासिस्ट दवाइयां नहीं बेच रहे थे।
बाजार से महंगी दवा खरीदने को मजबूर
सिविल सप्लाई की दुकानों पर सस्ती दवाएं न मिलने पर तीमारदारों को मजबूरन बाजारों से महंगी दवाएं खरीदने पर मजबूर होना पड़ रहा है। खाद्य आपूर्ति निगम का दावा है कि मामला सुलझाया गया है। वीरवार से मरीजों को सेवाएं उपलब्ध हो जाएंगी।