शहीद विदेश ने मां से किया था जल्द घर आने का वादा, अब तिरंगे में लिपटा पहुंचेगा पार्थिव शरीर
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किन्नौर में भारत-तिब्बत सीमा के साथ डोगरी नाले में हिमखंड में दबने से शहीद हुए विदेश कुमार के परिजनों को उनके सलामत घर लौटने का भरोसा था, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।
अब शहीद बेटे का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा घर पहुंचेगा। निरमंड की खरगा पंचायत के थरूवा गांव के सैनिक विदेश कुमार (32) के शहीद होने की खबर मिलने के बाद समूचे क्षेत्र के लोग गमगीन हैं। क्षेत्रवासी परिजनों को ढांढस बंधाने पहुंच रहे हैं।
बीते 23 दिनों से विदेश के पिता आईपीएच विभाग से सेवानिवृत्त ईश्वर दास और माता पुष्पा देवी अपने बेटे की सही सलामत लौटने की उम्मीद लगाए हुए थे। लेकिन बेटे के शहीद होने की सूचना मिलते ही उन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
सात साल पहले हुआ था विवाह
वहीं, विदेश की पत्नी निंटा देवी सूचना मिलने के बाद बेसुध हैं। विदेश का सात साल पहले विवाह हुआ था, लेकिन अभी तक उनकी कोई संतान नहीं है। दादा केशू राम (90) अपने पोते के शहीद होने की खबर से सदमे में हैं।
हिमखंड की चपेट में आने से पहले शहीद विदेश कुमार ने मां पुष्पा देवी काे फोन कर बताया था कि वे जल्द छुट्टी लेकर घर वापस लौटेंगे। लेकिन उन्हें क्या पता था कि ऐसी खबर सुनने को मिलेगी। विदेश 20 फरवरी को सेना के छ जवानों के साथ हिमंखड में दब गए थे।
विदेश के चाचा सुरेश कुमार 7 डोगरा रेजिमेंट से सेवानिवृत्त हुए हैं। बडे़ भाई दिनेश कुमार महार रेजिमेंट 6 बटालियन सियाचिन पर तैनात थे। वहां से एक माह पहले सेवानिवृत्त हुए हैं।