Himachal News: हिमाचल में बनेगा ग्रीन कॉरिडोर, एक साल में एचआरटीसी को मिलेंगी 300 इलेक्ट्रिक बसें
शिमला के रिज मैदान पर 11 इलेक्ट्रिक वाहनों को शुक्रवार को हरी झंडी दिखाने के बाद मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि शिमला शहर और इसके आसपास के क्षेत्रों में संचालित होने वाले अधिकांश बस रूटों पर ई-बसें चलाई जाएंगी।
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प्रदेश सरकार परवाणू-नालागढ़-ऊना-हमीरपुर-नादौन-देहरा परिवहन लाइन को क्लीन एंड ग्रीन कॉरिडोर बनाने जा रही है। इस योजना पर काम चल रहा है। शिमला के रिज मैदान पर 11 इलेक्ट्रिक वाहनों को शुक्रवार को हरी झंडी दिखाने के बाद मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि शिमला शहर और इसके आसपास के क्षेत्रों में संचालित होने वाले अधिकांश बस रूटों पर ई-बसें चलाई जाएंगी। उन्होंने कहा कि रामपुर-शिमला कॉरिडोर में भी अधिकांश ई-बसों का संचालन किया जाएगा। शिमला में लोकल डिपो को पूरी तरह से इलेक्ट्रिक बस डिपो बनाया जाएगा। नादौन में नया इलेक्ट्रिक बस डिपो खोला जाएगा। दो साल में हिमाचल पथ परिवहन निगम को 60 प्रतिशत इलेक्ट्रिक बसें प्रदान कर दी जाएंगी। अगले वित्त वर्ष में सरकार हिमाचल पथ परिवहन निगम के बेड़े में 300 नई ई-बसें शामिल करेगी। इसके लिए हिमाचल पथ परिवहन निगम को 400 करोड़ रुपये की धनराशि एकमुश्त स्वीकृत की जाएगी। निगम के बेड़े में चरणबद्ध तरीके से और अधिक ई-बसें शामिल की जाएंगी।
इलेक्ट्रिक वाहन उपयोग वाला देश का पहला विभाग
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश का परिवहन विभाग पूर्ण रूप से इलेक्ट्रिक वाहन उपयोग करने वाला देश का पहला सरकारी विभाग बन गया है। कहा कि परिवहन विभाग के बाद अब राज्य सरकार अन्य विभागों के परंपरागत ईंधन से चलने वाले वाहनों को भी एक साल के भीतर इलेक्ट्रिक वाहनों के साथ प्रतिस्थापित करेगी। इससे विभागों के खर्चों में काफी कमी आएगी। कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेश में वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम किया जाए। सरकार वर्ष 2025 तक प्रदेश को हरित ऊर्जा राज्य बनाने की दिशा में अनेक प्रभावी कदम उठा रही है।
इलेक्ट्रिक वाहन नीति को बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि परंपरागत ईंधन वाले वाहनों से उड़ने वाला धुआं वायु प्रदूषण का मुख्य कारक है, इसलिए देश में अब इलेक्ट्रिक वाहनों की अनिवार्यता महसूस की जाने लगी है। कहा कि सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहन नीति-2022 अधिसूचित की है। इसका मुख्य उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों को परिवहन साधन के रूप में अपनाने को बढ़ावा देकर पर्यावरण की सुरक्षा को सुनिश्चित करना, हिमाचल को इलेक्ट्रिक परिवहन और इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण के हब के रूप में विकसित करना है। इसके साथ-साथ इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए प्रदेश भर में सरकारी और निजी क्षेत्र में चार्जिंग ढांचा स्थापित करना, प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण उद्योगों को स्थापित करने के लिए उद्यमियों को सब्सिडी और अन्य प्रोत्साहन देना भी शामिल है।
यह एक क्रांतिकारी पहल: उप मुख्यमंत्री
उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री ने रिज मैदान से परिवहन विभाग को इलेक्ट्रिक वाहन प्रदान कर एक ऐतिहासिक एवं क्रांतिकारी पहल की है। इस नई पहल से जहां पैसे की बचत होगी, वहीं पर्यावरण तथा प्रदूषण मुक्त वातावरण बनाने के लिए भी एक सार्थक कदम होगी। प्रधान सचिव, परिवहन आरडी नजीम ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया और परिवहन विभाग के इलेक्ट्रिक वाहनों को हरी झंडी दिखाने के लिए उनका आभार व्यक्त किया। इस मौके पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल, कृषि मंत्री चंद्र कुमार, उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (मीडिया) नरेश चौहान, मुख्य संसदीय सचिव मोहन लाल ब्राक्टा, आशीष बुटेल, रामकुमार चौधरी तथा किशोरी लाल, विधायक विनय कुमार, नंद लाल, इन्द्र दत्त लखनपाल, रवि ठाकुर, हरीश जनारथा, मलेंदर राजन तथा सुदर्शन बबलू और पूर्व मंत्री आशा कुमारी भी मौजूद रहे।
ये हैं नए वाहनों की खासियत
रिज मैदान से रवाना किए गए नए इलेक्ट्रिक वाहनों में फास्ट चार्जर की सुविधा है जिससे पांच-छह घंटे में वाहन को फुल चार्ज किया जा सकता है। फुल चार्ज होने पर वाहन को 437 से 452 किलोमीटर तक चलाया जा सकता है।